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Showing posts from November, 2021

आओ बैठो थोड़ी देर

 बैठो कुछ देर अकेले आख़िर कब तक भागोगे ऐसे ही, यात्रा कभी समाप्त होगी नहीं, तुम्हें ही रुक कर आराम करना होगा। जब इतनी दूर चल लिए तो अब आओ बैठो थोड़ी देर, ये गठरी जो तुमने बेवजह लादी हुई है कंधे पर उतार के रख दो किसी किनारे पर, कब तक स्वयं को बोझ से दबाते रहोगे, थोड़ा देर ठहरो देखो क्या भरा है इस गठरी में, कहीं तुम कंकड़ पत्थर तो भर कर नहीं घूम रहे हैं, अरे पागल ये तो पड़े ही हुए हैं सब जगह तुम क्यों इन्हें लाद कर फिर रहे हो। सब संसार की फिक्र तुम ही लिए बैठे हो, कभी थोड़ी देर खुद का हाल चाल भी तो पूछो। क्या पता तुम्हें तुम्हारे बारे में फिक्र करने की सबसे ज्यादा जरूरत हो। तुम सुन कहाँ रहे हो अपनी, तुम चले आ रहे हो सबके अनुसार सबके प्रभाव में सबको देखकर। कभी देखो खुद को वो चाहता है कि विश्राम हो,  वो नहीं चाहता कि तुम कठिन बन जाओ, वो चाहता है कि सब काम सरलता से निपट जायें तो बोझ हल्का रहेगा। लेकिन तुम सुनते कहाँ हो? तुम तो अपनी विशेषता साबित करने में खप गए हो। किसे साबित करके दिखाना चाहते हो! क्या तुम जानते हो कि तुम भी हो इस दुनिया में? तुम्हारा भी वजूद है। अभी समय है आओ बैठो कुछ देर, बैठो ख

आओ बैठो थोड़ी देर

 बैठो कुछ देर अकेले आख़िर कब तक भागोगे ऐसे ही, यात्रा कभी समाप्त होगी नहीं, तुम्हें ही रुक कर आराम करना होगा। जब इतनी दूर चल लिए तो अब आओ बैठो थोड़ी देर, ये गठरी जो तुमने बेवजह लादी हुई है कंधे पर उतार के रख दो किसी किनारे पर, कब तक स्वयं को बोझ से दबाते रहोगे, थोड़ा देर ठहरो देखो क्या भरा है इस गठरी में, कहीं तुम कंकड़ पत्थर तो भर कर नहीं घूम रहे हैं, अरे पागल ये तो पड़े ही हुए हैं सब जगह तुम क्यों इन्हें लाद कर फिर रहे हो। सब संसार की फिक्र तुम ही लिए बैठे हो, कभी थोड़ी देर खुद का हाल चाल भी तो पूछो। क्या पता तुम्हें तुम्हारे बारे में फिक्र करने की सबसे ज्यादा जरूरत हो। तुम सुन कहाँ रहे हो अपनी, तुम चले आ रहे हो सबके अनुसार सबके प्रभाव में सबको देखकर। कभी देखो खुद को वो चाहता है कि विश्राम हो,  वो नहीं चाहता कि तुम कठिन बन जाओ, वो चाहता है कि सब काम सरलता से निपट जायें तो बोझ हल्का रहेगा। लेकिन तुम सुनते कहाँ हो? तुम तो अपनी विशेषता साबित करने में खप गए हो। किसे साबित करके दिखाना चाहते हो! क्या तुम जानते हो कि तुम भी हो इस दुनिया में? तुम्हारा भी वजूद है। अभी समय है आओ बैठो कुछ देर, बैठो ख

आख़िरी दिन !

  फिर एक आख़िरी दिन सब ऐसा ही होगा जैसे पहले दिन से था, तुम होगे जब अपनी अंतिम सीढ़ी पर, साँस तैयार होंगी एक बार बाहर जाने के बाद  हमेशा के लिए आज़ाद हो जाने के लिए। तुम देखना अपने आस पास अगर कुछ क्षण रहें होश के तुम्हारे पास, अगर मृत्यु करे थोड़ा विलंब और तुम देख पाओ उसके आने के संकेत। तब देखना , सूरज निकलेगा उतनी ही गर्मी के साथ, हवा बहेगी अपनी रफ्तार में मस्त मगन, आसमान रहेगा तब वही नीले रंग का। पानी बहता जाएगा नदियों में, समंदर में, पहाड़ खड़े होंगे अपने विशाल स्वरूप में। फिर देखना एक बार इस संसार को, जहाँ आज भी दौड़ रहे हैं लोग इधर से उधर, आज भी बोझ लेकर सब भागे चले जा रहे हैं। आज भी किसी के पास साँस लेने भर की फुरसत नहीं है। आज भी पैसे के पीछे पागल हुई है दुनिया। आज भी कोई लड़ रहा है कोई गिड़गिड़ा रहा है किसी के सामने, आज भी कोई गुस्से से आग बबूला हुआ है किसी छुट पुट सी बात पर। फिर याद करना अपने पुराने दिन जब तुम भी ये सब में उलझे हुए थे, फिर देखना एक बार राह में कि मृत्यु बस आती ही होगी। फिर देखना अपने बैंक अकाउंट चेक करके,  देखना कितनी जमीन तुम्हारे नाम लिखी है, देखना अपने दोस्त परिवार व