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Showing posts from July, 2021

छोड़कर भागने से पहले सोचना की शुरुआत कहाँ से हुई!

जब जब तुम खड़े हो किसी मोड़ पर, जब तुम्हारा मन तुम्हें चौराहा बनाकर हैरान कर दे। जब तुम्हें लगे कि मैं ठग लिया गया हूँ, जब तुम्हें अपने रास्ते के अलावा सारे रास्ते फायदेमंद लगें। जब तुम्हारा मन कहे कि बचा ले खुद को जितना बचा सके, वरना ठगी हो जाएगी तेरे साथ, जब तुम्हारे पांव उखड़ने लगें और घूमने लगें दूसरे रास्तों की ओर। तब बैठना कुछ क्षण, एक लंबी साँस लेना और धीरे धीरे छोड़ना, आँखें संसार से हटाकर लगा देना अपने अंदर, याद करना कि शुरू क्यों किया मैंने, क्या वजह रही जो मुझे चुनना पड़ा यह रास्ता? तब तुम जानोगे की यात्रा कितनी रोमांचक रही, तुम निकले ही यात्रा करने के लिए थे, फिर यह फ़ायदा नुकसान बीच में कब घुस गया? क्या अर्थ है इस बात का कि तुम चले किस राह पर, रास्ते चार हों या एक, सब एक जैसे ही तो हैं! यात्रा जारी है तुम्हारी, यही तो महत्वपूर्ण है चाहे रास्ता जो भी हो, जब तुम निकल आये इतने आगे तक किसी राह पर तो पार कर जाओ पूरा रास्ता एक बार, फिर चलना जिधर मन चाहे नए रास्ते पर, यों बार बार बीच रास्ते से भाग जाना तुम्हें भगौड़ा बना देगा। ये छोड़कर भागने की आदत घुस जायेगी तुम्हारी नस नस में, तुम भाग

पूरे खर्च हो जाओ ! विचार

 नया रखोगे कहाँ ज़नाब अगर पहले से भरे पड़े हो? कहीं ख़र्च हो लो, कुछ तो ख़ाली जगह बनाओ। ~ #ShubhankarThinks