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Showing posts from May, 2021

पूरे खर्च हो जाओ ! विचार

 नया रखोगे कहाँ ज़नाब अगर पहले से भरे पड़े हो? कहीं ख़र्च हो लो, कुछ तो ख़ाली जगह बनाओ। ~ #ShubhankarThinks

फिर एक दिन ऐसा भी आयेगा!

फिर एक दिन ऐसा भी आयेगा,  जब आपको दो और दो चार कहने में हिचक नहीं होगी।  आप लंबी सांस भरके उन सबके मुँह पर कह दोगे कि,  पाँच और छः का नाटक आपको मुबारक, मैंने जाना है कि दो और दो चार होते हैं।  उस दिन आपको यह डर नहीं रहेगा कि अगर मैं अकेला पड़ गया तब क्या होगा,  तब आपको पहली बार दिखाई पड़ेगा कि आसमान इतना बड़ा कैसे है,  मेरी जहाँ तक नज़र है सब जगह दिखाई दे रहा है,  आप देखोगे कि कैसे सूरज डूब रहा है सचमुच में,  अब ये कोई सुनी हुई सौंदर्य कविता की बात नहीं रही।  आप जानोगे कि हवा दिखती नहीं है फिर भी गुजर रही है तुमसे छूकर,  आप देख पाओगे कि जरा सी हवा चलने पर नाचने लगते हैं पेडों पर लगे हुए पत्ते।  आप जानोगे की एकांत अब अकेलापन नहीं है,  मनुष्यों की भाषा के अलावा भी जीव जंतुओं की आवाजें शोर कर रही हैं,  अब आप जानोगे कि शांति प्रकृति में है ही नहीं  तो फिर उसे प्राप्त करने के प्रयास सब व्यर्थ ही हैं।  अब आप पाओगे कि एलईडी की रोशनी में सब चकाचौंध हो गया है,  इसलिए आप बत्ती बन्द करके देखने लगते हो चाँद और तारे।  एक दिन आप देखोगे सब वैसा, जैसा वो है,  आप पाओगे कुछ भी नहीं बदला मगर सब बदल गया। 

स्वतंत्र होने का एक और भ्रम ! विचार

 किसी विचार को मानने के बाद, किसी व्यक्ति के साथ पूर्ण सहमति होने के बाद अथवा किसी धर्म को मानने के बाद मिली परम स्वतंत्रता भी खूंटे से बँधी लंबी रस्सी में जकड़ी हुई आज़ादी है। आपको यह भ्रम हो सकता है कि आप पूर्ण आज़ाद हो गए हो आपको खूंटी के चारों तरफ गोल गोल घूमकर पूरा विश्व दिखाई दे सकता है, मगर आपकी सोच का दायरा उस खूँटी से बाहर नहीं जा  सकता है। खूँटी वास्तव में है नहीं आपने यह माना ही हुआ है कि आप खूँटी से बंधे हुए हो, आप इतने लाचार हैं कि स्वंय को बिना बांधे रह नहीं पाते हो।  स्वयं को परतन्त्र बनाने के लिए अनेकों मार्ग खोज रखे हैं, एक भ्रम के अंदर दूसरा भ्रम आप पूरा मैट्रिक्स बनाकर खुद को फंसाये हुए हो। ~ #ShubhankarThinks