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Showing posts from May, 2021

मौसम बदले जीवन बदले, तुम फिर फिर अपने गीत सुनाना

जीवन है तो मौसम हैं, मरने के बाद बस एक मौसम रहेगा। फिर कभी नए नए मौसम देखने का मौका ना रहेगा। जीवन है तो आयेंगे उबासी भरे दिन, कभी बसंत महोत्सव कभी पतझड़ कभी बरसाती काली रातें। तुम चलते रहना अपनी राह, चाहे कोई भी हो। तुम बदल मत लेना चलने का ढ़ंग सिर्फ़ इसलिए  क्योंकि पूरी दुनिया तुम्हारे साथ गलत कर रही है। तुम रुक मत जाना देखकर कि कितना आसान है सब यहाँ, जहाँ तुम्हारे लिए सब कुछ उपलब्ध हो बिना किसी कठिनता के। तुम बहक मत जाना सुख देखकर, रखना याद की ये केवल एक मौसम है बदल जायेगा, तुम मन मत बना लेना सबसे कट जाने का इसलिए कि तुम्हारे साथ कोई ज्यादती हुई है, तुम ख़ुद से बचकर मत भागना इसलिए कि तुम में कमियाँ बहुत हैं। तुम कोई बोझ मत लाद लेना, अपने कंधे पर की तुम्हारे बिना ये सब काम कोई और ना करेगा। तुम होना खड़े किसी रास्ते पर, देखना ऊपर आसमान में और देखना फिर अपने शरीर को, कोई फ़र्क नहीं है तुम में और इस खुले आसमान में। तुम ऐसे चलना जैसे कोई राजा चलता है, ऐसे बोलना जैसे राजा बोलते हैं। तुम राजी मत हो जाना किसी के गुलाम बनने को, तुम देना सबको जितना दे सको, देखना मत मुड़कर पीछे की तरफ, राजा देते हैं

फिर एक दिन ऐसा भी आयेगा!

फिर एक दिन ऐसा भी आयेगा,  जब आपको दो और दो चार कहने में हिचक नहीं होगी।  आप लंबी सांस भरके उन सबके मुँह पर कह दोगे कि,  पाँच और छः का नाटक आपको मुबारक, मैंने जाना है कि दो और दो चार होते हैं।  उस दिन आपको यह डर नहीं रहेगा कि अगर मैं अकेला पड़ गया तब क्या होगा,  तब आपको पहली बार दिखाई पड़ेगा कि आसमान इतना बड़ा कैसे है,  मेरी जहाँ तक नज़र है सब जगह दिखाई दे रहा है,  आप देखोगे कि कैसे सूरज डूब रहा है सचमुच में,  अब ये कोई सुनी हुई सौंदर्य कविता की बात नहीं रही।  आप जानोगे कि हवा दिखती नहीं है फिर भी गुजर रही है तुमसे छूकर,  आप देख पाओगे कि जरा सी हवा चलने पर नाचने लगते हैं पेडों पर लगे हुए पत्ते।  आप जानोगे की एकांत अब अकेलापन नहीं है,  मनुष्यों की भाषा के अलावा भी जीव जंतुओं की आवाजें शोर कर रही हैं,  अब आप जानोगे कि शांति प्रकृति में है ही नहीं  तो फिर उसे प्राप्त करने के प्रयास सब व्यर्थ ही हैं।  अब आप पाओगे कि एलईडी की रोशनी में सब चकाचौंध हो गया है,  इसलिए आप बत्ती बन्द करके देखने लगते हो चाँद और तारे।  एक दिन आप देखोगे सब वैसा, जैसा वो है,  आप पाओगे कुछ भी नहीं बदला मगर सब बदल गया। 

स्वतंत्र होने का एक और भ्रम ! विचार

 किसी विचार को मानने के बाद, किसी व्यक्ति के साथ पूर्ण सहमति होने के बाद अथवा किसी धर्म को मानने के बाद मिली परम स्वतंत्रता भी खूंटे से बँधी लंबी रस्सी में जकड़ी हुई आज़ादी है। आपको यह भ्रम हो सकता है कि आप पूर्ण आज़ाद हो गए हो आपको खूंटी के चारों तरफ गोल गोल घूमकर पूरा विश्व दिखाई दे सकता है, मगर आपकी सोच का दायरा उस खूँटी से बाहर नहीं जा  सकता है। खूँटी वास्तव में है नहीं आपने यह माना ही हुआ है कि आप खूँटी से बंधे हुए हो, आप इतने लाचार हैं कि स्वंय को बिना बांधे रह नहीं पाते हो।  स्वयं को परतन्त्र बनाने के लिए अनेकों मार्ग खोज रखे हैं, एक भ्रम के अंदर दूसरा भ्रम आप पूरा मैट्रिक्स बनाकर खुद को फंसाये हुए हो। ~ #ShubhankarThinks