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Showing posts from March, 2021

मौसम बदले जीवन बदले, तुम फिर फिर अपने गीत सुनाना

जीवन है तो मौसम हैं, मरने के बाद बस एक मौसम रहेगा। फिर कभी नए नए मौसम देखने का मौका ना रहेगा। जीवन है तो आयेंगे उबासी भरे दिन, कभी बसंत महोत्सव कभी पतझड़ कभी बरसाती काली रातें। तुम चलते रहना अपनी राह, चाहे कोई भी हो। तुम बदल मत लेना चलने का ढ़ंग सिर्फ़ इसलिए  क्योंकि पूरी दुनिया तुम्हारे साथ गलत कर रही है। तुम रुक मत जाना देखकर कि कितना आसान है सब यहाँ, जहाँ तुम्हारे लिए सब कुछ उपलब्ध हो बिना किसी कठिनता के। तुम बहक मत जाना सुख देखकर, रखना याद की ये केवल एक मौसम है बदल जायेगा, तुम मन मत बना लेना सबसे कट जाने का इसलिए कि तुम्हारे साथ कोई ज्यादती हुई है, तुम ख़ुद से बचकर मत भागना इसलिए कि तुम में कमियाँ बहुत हैं। तुम कोई बोझ मत लाद लेना, अपने कंधे पर की तुम्हारे बिना ये सब काम कोई और ना करेगा। तुम होना खड़े किसी रास्ते पर, देखना ऊपर आसमान में और देखना फिर अपने शरीर को, कोई फ़र्क नहीं है तुम में और इस खुले आसमान में। तुम ऐसे चलना जैसे कोई राजा चलता है, ऐसे बोलना जैसे राजा बोलते हैं। तुम राजी मत हो जाना किसी के गुलाम बनने को, तुम देना सबको जितना दे सको, देखना मत मुड़कर पीछे की तरफ, राजा देते हैं

जीने के साथ मरने के भी इंतेजाम किये जायें

जीने के प्रयास जितने भी हो तमाम किए जाएं,  खत्म होने के लिए पहले से इंतजाम किये जाएं।  जोड़ा जाए जिन्दगी को सभी तरकीबों से, वहीं ख़ुद को मिटा देने वाले काम किए जाएं। बूंद बूंद समेटा जाए तजुर्बा सब किस्म का, वहीं कतरा कतरा ख़ुद को बे नाम किया जाये।  भिड़ जाओ हर मुश्किल से बेवक्त यूं ही, कभी फुर्सत में ख़ुद से ही संग्राम किए जाएं।  बाहरी जरूरत में बन जाओ पैसों के इबादी मगर अंदर के सारे रकबे बे-दाम किये जायें।  मतलब ढूंढ़कर तुम करते ही हो सब कुछ,  कुछ बेमतलब के भी दो चार काम किये जायें।  अंदर बहुत दबा लिया ख़ुद को समझदारी में आकर,  अब पागलपन के सब लम्हे खुलेआम जिये जाएँ।  बहुत जी ली जिंदगी दूसरों को दिखाने के मकसद से,  अब कुछ किस्से जिन्दगी के गुमनाम जिये जाएँ।  दिमाग रख लेता है हिसाब हर एक चीज का,  अब हिसाब किताब सारे बेलगाम किये जायें।  जीना की तरकीबें जितनी भी हों सारी अपना लो,  मगर साथ में मरने के भी पूरे इंतेजाम किये जायें।  ~ #ShubhankarThinks

जिंदगी खुलकर जीने की शर्त

 खुलकर ज़िंदगी जीना बड़ा आसान काम है, बस शर्त ये है की आप पागल हो जाएं! ~ #ShubhankarThinks

जिंदगी और दौड़ भाग ! 02 March 21

 कितना भी संवार लो कुछ गड़बड़ी तो रहेगी, और दौड़ने से तो केवल हड़बड़ी बढ़ेगी! #ShubhankarThinks