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Showing posts from March, 2021

आओ बैठो थोड़ी देर

 बैठो कुछ देर अकेले आख़िर कब तक भागोगे ऐसे ही, यात्रा कभी समाप्त होगी नहीं, तुम्हें ही रुक कर आराम करना होगा। जब इतनी दूर चल लिए तो अब आओ बैठो थोड़ी देर, ये गठरी जो तुमने बेवजह लादी हुई है कंधे पर उतार के रख दो किसी किनारे पर, कब तक स्वयं को बोझ से दबाते रहोगे, थोड़ा देर ठहरो देखो क्या भरा है इस गठरी में, कहीं तुम कंकड़ पत्थर तो भर कर नहीं घूम रहे हैं, अरे पागल ये तो पड़े ही हुए हैं सब जगह तुम क्यों इन्हें लाद कर फिर रहे हो। सब संसार की फिक्र तुम ही लिए बैठे हो, कभी थोड़ी देर खुद का हाल चाल भी तो पूछो। क्या पता तुम्हें तुम्हारे बारे में फिक्र करने की सबसे ज्यादा जरूरत हो। तुम सुन कहाँ रहे हो अपनी, तुम चले आ रहे हो सबके अनुसार सबके प्रभाव में सबको देखकर। कभी देखो खुद को वो चाहता है कि विश्राम हो,  वो नहीं चाहता कि तुम कठिन बन जाओ, वो चाहता है कि सब काम सरलता से निपट जायें तो बोझ हल्का रहेगा। लेकिन तुम सुनते कहाँ हो? तुम तो अपनी विशेषता साबित करने में खप गए हो। किसे साबित करके दिखाना चाहते हो! क्या तुम जानते हो कि तुम भी हो इस दुनिया में? तुम्हारा भी वजूद है। अभी समय है आओ बैठो कुछ देर, बैठो ख

जीने के साथ मरने के भी इंतेजाम किये जायें

जीने के प्रयास जितने भी हो तमाम किए जाएं,  खत्म होने के लिए पहले से इंतजाम किये जाएं।  जोड़ा जाए जिन्दगी को सभी तरकीबों से, वहीं ख़ुद को मिटा देने वाले काम किए जाएं। बूंद बूंद समेटा जाए तजुर्बा सब किस्म का, वहीं कतरा कतरा ख़ुद को बे नाम किया जाये।  भिड़ जाओ हर मुश्किल से बेवक्त यूं ही, कभी फुर्सत में ख़ुद से ही संग्राम किए जाएं।  बाहरी जरूरत में बन जाओ पैसों के इबादी मगर अंदर के सारे रकबे बे-दाम किये जायें।  मतलब ढूंढ़कर तुम करते ही हो सब कुछ,  कुछ बेमतलब के भी दो चार काम किये जायें।  अंदर बहुत दबा लिया ख़ुद को समझदारी में आकर,  अब पागलपन के सब लम्हे खुलेआम जिये जाएँ।  बहुत जी ली जिंदगी दूसरों को दिखाने के मकसद से,  अब कुछ किस्से जिन्दगी के गुमनाम जिये जाएँ।  दिमाग रख लेता है हिसाब हर एक चीज का,  अब हिसाब किताब सारे बेलगाम किये जायें।  जीना की तरकीबें जितनी भी हों सारी अपना लो,  मगर साथ में मरने के भी पूरे इंतेजाम किये जायें।  ~ #ShubhankarThinks

जिंदगी खुलकर जीने की शर्त

 खुलकर ज़िंदगी जीना बड़ा आसान काम है, बस शर्त ये है की आप पागल हो जाएं! ~ #ShubhankarThinks

जिंदगी और दौड़ भाग ! 02 March 21

 कितना भी संवार लो कुछ गड़बड़ी तो रहेगी, और दौड़ने से तो केवल हड़बड़ी बढ़ेगी! #ShubhankarThinks