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Showing posts from December, 2020

आओ बैठो थोड़ी देर

 बैठो कुछ देर अकेले आख़िर कब तक भागोगे ऐसे ही, यात्रा कभी समाप्त होगी नहीं, तुम्हें ही रुक कर आराम करना होगा। जब इतनी दूर चल लिए तो अब आओ बैठो थोड़ी देर, ये गठरी जो तुमने बेवजह लादी हुई है कंधे पर उतार के रख दो किसी किनारे पर, कब तक स्वयं को बोझ से दबाते रहोगे, थोड़ा देर ठहरो देखो क्या भरा है इस गठरी में, कहीं तुम कंकड़ पत्थर तो भर कर नहीं घूम रहे हैं, अरे पागल ये तो पड़े ही हुए हैं सब जगह तुम क्यों इन्हें लाद कर फिर रहे हो। सब संसार की फिक्र तुम ही लिए बैठे हो, कभी थोड़ी देर खुद का हाल चाल भी तो पूछो। क्या पता तुम्हें तुम्हारे बारे में फिक्र करने की सबसे ज्यादा जरूरत हो। तुम सुन कहाँ रहे हो अपनी, तुम चले आ रहे हो सबके अनुसार सबके प्रभाव में सबको देखकर। कभी देखो खुद को वो चाहता है कि विश्राम हो,  वो नहीं चाहता कि तुम कठिन बन जाओ, वो चाहता है कि सब काम सरलता से निपट जायें तो बोझ हल्का रहेगा। लेकिन तुम सुनते कहाँ हो? तुम तो अपनी विशेषता साबित करने में खप गए हो। किसे साबित करके दिखाना चाहते हो! क्या तुम जानते हो कि तुम भी हो इस दुनिया में? तुम्हारा भी वजूद है। अभी समय है आओ बैठो कुछ देर, बैठो ख

Consious vs Unconscious ! Thought 26 Dec

 The basic difference between consciousness and unconsciousness is to have faith in By-products, not in goals. ~ #ShubhankarThinks

ख़ुशी की प्रेरणा कोई बच्चा ही होगा! कविता

समझदार हसेंगे तभी कि  पहले कुछ अच्छा ही होगा, फूटकर निकली ख़ुशी की प्रेरणा  तो कोई बच्चा ही होगा। कोई जरूरत से ज्यादा मिठाई बांट दे, तो सावधान यहां कुछ गच्चा ही होगा। कड़वाहट भरा तन- मन जिसका भी, वो फल अभी भी कच्चा ही होगा! तीखी बातें करे और चलता बने जो, तो जान लेना वो कोई सच्चा ही होगा, बिना एहसान मदद कर दे जो किसी की, वो आदमी कोई अच्छा ही होगा। नाचकर उभर आए, झूमता गिर पड़े जो वो वैरागी या फ़िर पीपल का पत्ता ही होगा। होश में चल रहा जो कछुए की चाल से, वो आदमी संकल्प का पक्का ही होगा। ~ #ShubhankarThinks

विचार ! स्थिरता | 23 Dec 20

 अगर आप शरीर हैं तो स्थिरता केवल मृत्यु के उपरांत आ सकती है, उसके पहले या तो आप बढ़ रहे हो या फिर दिन प्रतिदिन घट रहे हो। ~ #ShubhankarThinks

विचार! वास्तविकता को उपेक्षित करना ! 23/12/2020

 वास्तविकता को उपेक्षित करने से प्राप्त सुख क्षणिक है, यह कृत्य, स्वयं के भविष्य के साथ कपट करने जैसा है। ~ #ShubhankarThinks

पुष्पों से लदा पौधा और इंसान

 पुष्पों से लदा हुआ एक पौधा, फलों से लदा हुआ एक पेड़, और पारिवारिक जिम्मेदारी से लदा हुआ इंसान! सब बोझ के तले झुक ही जाते हैं, और कभी तनकर खड़े नहीं हो पाते। ~ #ShubhankarThinks

संतोष, चापलूसी

 संतोष कर लेना, स्वयं को सुखी रखने की एक मात्र सिद्धि है। जीवित व्यक्ति की प्रशंसा करना, चापलूसी को श्रेणी में आता है।

साहित्य में चरित्रों की अतिश्योक्ति

किसी भी विषय की अतिश्योक्ति में लिखे गए कथा, उपन्यास एवम् कविताएं, वर्तमान पाठकों को रस देते हैं और भविष्य को दे जाते हैं भ्रम एवम् मिथ्या तथ्य। ~ #ShubhankarThinks #sahitya #katha #upanyaas

जीवन का अस्तित्व

 मनुष्य के अंदर प्रेम का स्थान और भूमि की उर्वरता का सुरक्षित रहना, भविष्य में जीवन के अस्तित्व की पुष्टि करता है।