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Showing posts from December, 2020

कुछ क्षण ऐसे भी आते हैं ! 10 May 2022

 कभी कभी घिर जाते हैं हम गहरे किसी दलदल में, फँस जाते हैं जिंदगी के चक्के किसी कीचड़ में, तब जिंदगी चलती भी है तो रेंगकर, लगता है सब रुका हुआ सा। बेहोशी में लगता है सब सही है, पता नहीं रहता अपने होने का भी, तब बेहोशी हमें पता नहीं लगने देती कि होश पूरा जा चुका है। ठीक भी है बेहोशी ना हो तो पता कैसे लगाइएगा की होश में रहना क्या होता है, विपरीत से ही दूसरे विपरीत को प्रकाश मिलता है अन्यथा महत्व क्या रह जायेगा किसी भी बात का फिर तो सही भी ना रहेगा गलत भी ना रहेगा सब शून्य रहेगा। बेहोशी भी रूकती नहीं हमेशा के लिए कभी आते हैं ऐसे क्षण भी जब एक दम से यूटूर्न मार जाती है आपकी नियति, आपको लगता है जैसे आँधी आयी कोई और उसने सब साफ कर दिया, बेहोशी गिर गयी धड़ाम से जमीन पर, आपसे अलग होकर। अभी आप देख पा रहे हो बाहर की चीजें साफ साफ, आपको दिख रहा है कि बेहोशी में जो कुछ चल रहा था वो मेरे भीतर कभी नही चला। जो भी था सब बाहर की बात थी, मैं तो बस भूल गया था खुद को बेहोशी में, ध्यान ना रहा था कि सब जो चल रहा था कोई स्वप्न था। खैर जो भी था सही था, जैसी प्रभु की इच्छा, जब मन किया ध्यान में डुबो दिया जब मन कि

Consious vs Unconscious ! Thought 26 Dec

 The basic difference between consciousness and unconsciousness is to have faith in By-products, not in goals. ~ #ShubhankarThinks

ख़ुशी की प्रेरणा कोई बच्चा ही होगा! कविता

समझदार हसेंगे तभी कि  पहले कुछ अच्छा ही होगा, फूटकर निकली ख़ुशी की प्रेरणा  तो कोई बच्चा ही होगा। कोई जरूरत से ज्यादा मिठाई बांट दे, तो सावधान यहां कुछ गच्चा ही होगा। कड़वाहट भरा तन- मन जिसका भी, वो फल अभी भी कच्चा ही होगा! तीखी बातें करे और चलता बने जो, तो जान लेना वो कोई सच्चा ही होगा, बिना एहसान मदद कर दे जो किसी की, वो आदमी कोई अच्छा ही होगा। नाचकर उभर आए, झूमता गिर पड़े जो वो वैरागी या फ़िर पीपल का पत्ता ही होगा। होश में चल रहा जो कछुए की चाल से, वो आदमी संकल्प का पक्का ही होगा। ~ #ShubhankarThinks

विचार ! स्थिरता | 23 Dec 20

 अगर आप शरीर हैं तो स्थिरता केवल मृत्यु के उपरांत आ सकती है, उसके पहले या तो आप बढ़ रहे हो या फिर दिन प्रतिदिन घट रहे हो। ~ #ShubhankarThinks

विचार! वास्तविकता को उपेक्षित करना ! 23/12/2020

 वास्तविकता को उपेक्षित करने से प्राप्त सुख क्षणिक है, यह कृत्य, स्वयं के भविष्य के साथ कपट करने जैसा है। ~ #ShubhankarThinks

पुष्पों से लदा पौधा और इंसान

 पुष्पों से लदा हुआ एक पौधा, फलों से लदा हुआ एक पेड़, और पारिवारिक जिम्मेदारी से लदा हुआ इंसान! सब बोझ के तले झुक ही जाते हैं, और कभी तनकर खड़े नहीं हो पाते। ~ #ShubhankarThinks

संतोष, चापलूसी

 संतोष कर लेना, स्वयं को सुखी रखने की एक मात्र सिद्धि है। जीवित व्यक्ति की प्रशंसा करना, चापलूसी को श्रेणी में आता है।

साहित्य में चरित्रों की अतिश्योक्ति

किसी भी विषय की अतिश्योक्ति में लिखे गए कथा, उपन्यास एवम् कविताएं, वर्तमान पाठकों को रस देते हैं और भविष्य को दे जाते हैं भ्रम एवम् मिथ्या तथ्य। ~ #ShubhankarThinks #sahitya #katha #upanyaas

जीवन का अस्तित्व

 मनुष्य के अंदर प्रेम का स्थान और भूमि की उर्वरता का सुरक्षित रहना, भविष्य में जीवन के अस्तित्व की पुष्टि करता है।