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Showing posts from November, 2020

एक से लेकर शून्य तक! विचार

 संसार में कहीं भी एक को महत्व नहीं दिया गया है, वो एक हमेशा से अधूरा रहा है,  जब तक उसके साथ दूसरा कुछ जुड़ नहीं जाता है। ब्रह्माण्ड की बात करें तो चीजें दो, तीन, पांच अथवा सात रही हैं। ये सब वैचारिक मदांधता है जिसमें "मैं अकेला" जैसे शब्द आ सकते हैं अथवा कोई बड़ा योगी जो उस एक का प्रयोग शून्य प्राप्ति के लिए कर रहा है। ~ #ShubhankarThinks

एक से लेकर शून्य तक! विचार

 संसार में कहीं भी एक को महत्व नहीं दिया गया है, वो एक हमेशा से अधूरा रहा है,  जब तक उसके साथ दूसरा कुछ जुड़ नहीं जाता है। ब्रह्माण्ड की बात करें तो चीजें दो, तीन, पांच अथवा सात रही हैं। ये सब वैचारिक मदांधता है जिसमें "मैं अकेला" जैसे शब्द आ सकते हैं अथवा कोई बड़ा योगी जो उस एक का प्रयोग शून्य प्राप्ति के लिए कर रहा है। ~ #ShubhankarThinks