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Showing posts from October, 2020

आओ बैठो थोड़ी देर

 बैठो कुछ देर अकेले आख़िर कब तक भागोगे ऐसे ही, यात्रा कभी समाप्त होगी नहीं, तुम्हें ही रुक कर आराम करना होगा। जब इतनी दूर चल लिए तो अब आओ बैठो थोड़ी देर, ये गठरी जो तुमने बेवजह लादी हुई है कंधे पर उतार के रख दो किसी किनारे पर, कब तक स्वयं को बोझ से दबाते रहोगे, थोड़ा देर ठहरो देखो क्या भरा है इस गठरी में, कहीं तुम कंकड़ पत्थर तो भर कर नहीं घूम रहे हैं, अरे पागल ये तो पड़े ही हुए हैं सब जगह तुम क्यों इन्हें लाद कर फिर रहे हो। सब संसार की फिक्र तुम ही लिए बैठे हो, कभी थोड़ी देर खुद का हाल चाल भी तो पूछो। क्या पता तुम्हें तुम्हारे बारे में फिक्र करने की सबसे ज्यादा जरूरत हो। तुम सुन कहाँ रहे हो अपनी, तुम चले आ रहे हो सबके अनुसार सबके प्रभाव में सबको देखकर। कभी देखो खुद को वो चाहता है कि विश्राम हो,  वो नहीं चाहता कि तुम कठिन बन जाओ, वो चाहता है कि सब काम सरलता से निपट जायें तो बोझ हल्का रहेगा। लेकिन तुम सुनते कहाँ हो? तुम तो अपनी विशेषता साबित करने में खप गए हो। किसे साबित करके दिखाना चाहते हो! क्या तुम जानते हो कि तुम भी हो इस दुनिया में? तुम्हारा भी वजूद है। अभी समय है आओ बैठो कुछ देर, बैठो ख

State of joyfulness

 You become happy when outside circumstances come in your favor, You become joyful when none of the outside circumstances affect you anymore. ~ #ShubhankarThinks #joyfull #happy #quote

आधी उम्र तो सोचने में जा रही है

 पहले आधी से ज्यादा जिंदगी सोचने में लगा दी, अब सदमे में हैं लोग कि जिंदगी व्यर्थ जा रही है| सबकी चाहत होती है दिक्कतें ना हो कभी, मुश्किलें हैं तभी तो आसानी समझ आ रही है! कोई कमाता है इतना की खपत भी नहीं है, कहीं रोज़ी रोटी जुटाने पूरी उमर जा रही है। घुमा फिरा के चीजें जटिल बन गई हैं, वरना जीने की कला तो सरलता रही है। जहां हंस बोलकर वक़्त भी काटा जा सकता था, वहां नफरतों की पूरी फसल आ रही है! सब जानते हैं कि दुःख सब दिमागी उपज हैं, फिर भी चिंता है कि डायन खाये जा रही है। भीड़ दौड़ रही है बहुत कुछ पा लेने को, भीड़ खाली हाथ धरती से चली जा रही है। ~ #ShubhankarThinks

रिश्तों में हिसाब किताब! विचार

 आपसी लेन देन की बड़ी सुंदर व्यवस्था हैं, रिश्ते! जब तक इनमें हिसाब लगाना शुरू ना किया जाए। ~ #ShubhankarThinks