Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2020

कुछ क्षण ऐसे भी आते हैं ! 10 May 2022

 कभी कभी घिर जाते हैं हम गहरे किसी दलदल में, फँस जाते हैं जिंदगी के चक्के किसी कीचड़ में, तब जिंदगी चलती भी है तो रेंगकर, लगता है सब रुका हुआ सा। बेहोशी में लगता है सब सही है, पता नहीं रहता अपने होने का भी, तब बेहोशी हमें पता नहीं लगने देती कि होश पूरा जा चुका है। ठीक भी है बेहोशी ना हो तो पता कैसे लगाइएगा की होश में रहना क्या होता है, विपरीत से ही दूसरे विपरीत को प्रकाश मिलता है अन्यथा महत्व क्या रह जायेगा किसी भी बात का फिर तो सही भी ना रहेगा गलत भी ना रहेगा सब शून्य रहेगा। बेहोशी भी रूकती नहीं हमेशा के लिए कभी आते हैं ऐसे क्षण भी जब एक दम से यूटूर्न मार जाती है आपकी नियति, आपको लगता है जैसे आँधी आयी कोई और उसने सब साफ कर दिया, बेहोशी गिर गयी धड़ाम से जमीन पर, आपसे अलग होकर। अभी आप देख पा रहे हो बाहर की चीजें साफ साफ, आपको दिख रहा है कि बेहोशी में जो कुछ चल रहा था वो मेरे भीतर कभी नही चला। जो भी था सब बाहर की बात थी, मैं तो बस भूल गया था खुद को बेहोशी में, ध्यान ना रहा था कि सब जो चल रहा था कोई स्वप्न था। खैर जो भी था सही था, जैसी प्रभु की इच्छा, जब मन किया ध्यान में डुबो दिया जब मन कि

देश में कुछ लोग बस इम्यूनिटी बढ़ा रहे हैं

 शायर शायरी छोड़कर भाषण बना रहे हैं, खिलाड़ी खेल छोड़कर रोडीज में जा रहे हैं अभिनेता अभिनय छोड़कर राजनीति में आ रहे हैं राजनेता नेतागिरी छोड़कर अभिनय दिखा रहे हैं पत्रकार पत्रकारिता छोड़कर धारावाहिक दिखा रहे हैं। मंत्री जी रोटी छोड़कर सरकारी नौकरी खा रहे हैं, अस्पताल पैसे छोड़कर जिंदगी खा रहे हैं। कौन मर रहा है, किसी को क्या फ़र्क पड़ता है, अब तो ड्रग्स लेने वाले बस सुर्खियों में आ रहे हैं। बच्चे किताब छोड़कर स्मार्टफोन चला रहे हैं, मास्टर जी वॉट्सएप की मदद से नौकरी बचा रहे हैं। स्थिति विचित्र है अगर थोड़ा भी ध्यान दिया जाए, सुखी वही हैं जो इम्यूनिटी बढ़ा रहे हैं। ~ #ShubhankarThinks

रिश्तों के मध्य तरलता

 भावनाएं अत्यन्त आवश्यक होती हैं रिश्तों के मध्य तरलता बनाए रखने के लिए, वरना टूट जाते है मजबूत से मजबूत जोड़ भी अगर उनके बीच सूखा घर्षण हो। ~ #ShubhankarThinks

चापलूसी एवम् प्रशंसा ! विचार

 जीवित व्यक्ति की प्रशंसा करना, चापलूसी को श्रेणी में आता है।   ~ # ShubhankarThinks

छोटे बड़े की समस्या !

 ये उसकी समस्या है, जो खुद को तुमसे बड़ा समझ रहा है, समस्या तुम्हारे अंदर है अगर कोई तुम्हारे सामने ख़ुद को छोटा महसूस करे। ~ #ShubhankarThinks

ज्ञान और प्रवचन

 ज्ञान में से प्रवचन को घटा दिया जाए तो केवल व्यवहारिकता शेष रह जाती है। अगर प्रवचन में से ज्ञान को हटा दिया जाए तो शेष रह जाते हैं बड़े बड़े बोल। ~ #ShubhankarThinks