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Showing posts from August, 2020

कुछ क्षण ऐसे भी आते हैं ! 10 May 2022

 कभी कभी घिर जाते हैं हम गहरे किसी दलदल में, फँस जाते हैं जिंदगी के चक्के किसी कीचड़ में, तब जिंदगी चलती भी है तो रेंगकर, लगता है सब रुका हुआ सा। बेहोशी में लगता है सब सही है, पता नहीं रहता अपने होने का भी, तब बेहोशी हमें पता नहीं लगने देती कि होश पूरा जा चुका है। ठीक भी है बेहोशी ना हो तो पता कैसे लगाइएगा की होश में रहना क्या होता है, विपरीत से ही दूसरे विपरीत को प्रकाश मिलता है अन्यथा महत्व क्या रह जायेगा किसी भी बात का फिर तो सही भी ना रहेगा गलत भी ना रहेगा सब शून्य रहेगा। बेहोशी भी रूकती नहीं हमेशा के लिए कभी आते हैं ऐसे क्षण भी जब एक दम से यूटूर्न मार जाती है आपकी नियति, आपको लगता है जैसे आँधी आयी कोई और उसने सब साफ कर दिया, बेहोशी गिर गयी धड़ाम से जमीन पर, आपसे अलग होकर। अभी आप देख पा रहे हो बाहर की चीजें साफ साफ, आपको दिख रहा है कि बेहोशी में जो कुछ चल रहा था वो मेरे भीतर कभी नही चला। जो भी था सब बाहर की बात थी, मैं तो बस भूल गया था खुद को बेहोशी में, ध्यान ना रहा था कि सब जो चल रहा था कोई स्वप्न था। खैर जो भी था सही था, जैसी प्रभु की इच्छा, जब मन किया ध्यान में डुबो दिया जब मन कि

जीवन को जीना ! विचार - 30 Aug

 आधे से ज्यादा जीवन भविष्य की चिंता में बिताया, बचा हुआ समय भूतकाल के पश्चाताप में बिताया! अब बुढ़ापे में भी मरने से उनको डर लग रहा है,  क्योंकि जीवन को उन्होंने अभी जिया ही कहां है? #ShubhankarThinks

विचार | २४ अगस्त

 किसी की बात पर ध्यान नहीं देना मानसिक सक्षमता का सूचक है, किसी की बात नहीं सुनना मदांधता का प्रमुख लक्षण है।  #ShubhankarThinks

वास्तविकता कोई समस्या नहीं है

 लोगों के लिए "वास्तविकता" एक जटिल समस्या है तेज आंखों की रोशनी इसे देख नहीं पाती, कानों की श्रवण शक्ति इसे ग्रहण नहीं करती और बुद्धि इसे स्वीकार नहीं करती है। कभी कभी पूरी आयु लग जाती है यह समझने  में कि समस्या वास्तविकता में नहीं है। #ShubhankarThinks

वैचारिक स्वतंत्रता का मूल्य है एकाकीपन #स्वतंत्रता दिवस

 ये दुनिया बांटी हुई है दो पक्षों में, एक अच्छाई का पक्ष, एक बुराई का, एक साफ़ पक्ष, एक गंदा पक्ष एक अनपढ़ का पक्ष, एक बुद्धि जीवी पक्ष, एक अमीर पक्ष, एक गरीब पक्ष, एक वाम पक्ष, एक दक्षिण पक्ष एक धार्मिक पक्ष, एक नास्तिक पक्ष अगर आपको सामाजिक रहना है तो आपको  एक पक्ष में खुद को ढालना होगा, किसी एक को पूर्ण सहमति देनी होगी और दूसरे पक्ष को विपक्ष मानना होगा। इनमें से किसी भी पक्ष का हिस्सा बनने के  लिए आपको देनी होगी अपनी स्वतंत्र सोच  और विवेक की बलि। यही होगी पराधीनता के इस समर में पूर्ण आहुति। अन्यथा वैचारिक स्वतंत्रता का मूल्य है एकाकीपन। #स्वतंत्रता_दिवस #Happy_Independence_day #ShubhankarThinks

जिंदगी में ख़ुशी मिली तो कम लिखा

 लोगों ने मजबूरी लिखी, गरीबी लिखी, हालात में पिसती हुई जवानी लिखी, लोगों ने बेवफ़ाई लिखी, सूनापन लिखा और मोहब्बत में बिछड़ने का ग़म लिखा मगर मिली ख़ुशी जब उनको तो कम लिखा। ~ #ShubhankarThinks

मुश्किलें रास्ते में आई बहुत हैं

मजबूती से रखा है एक एक क़दम, वरना अड़चनें रास्ते में अाई बहुत हैं। ज़मीन पर गड़ाए रखना नजरें अपनी, हरियाली के बीच में खाई बहुत हैं। बस काम की बात से मतलब रखो तुम, वरना किताबों में बातें बताई बहुत हैं। गर्दिश में भी कैसे उजाले ढूंढने हैं, मुश्किलों ने तरकीब सिखाई बहुत हैं। सोच समझकर करो दिल्लगी किसी से, ज़माने में मोहब्बत को लेकर लड़ाई बहुत हैं।  सबक दूसरों की गलती से भी लेते चलो तुम, ख़ुद से सब कुछ सीखने में कठिनाई बहुत हैं। ~ #ShubhankarThinks