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Showing posts from June, 2020

मौसम बदले जीवन बदले, तुम फिर फिर अपने गीत सुनाना

जीवन है तो मौसम हैं, मरने के बाद बस एक मौसम रहेगा। फिर कभी नए नए मौसम देखने का मौका ना रहेगा। जीवन है तो आयेंगे उबासी भरे दिन, कभी बसंत महोत्सव कभी पतझड़ कभी बरसाती काली रातें। तुम चलते रहना अपनी राह, चाहे कोई भी हो। तुम बदल मत लेना चलने का ढ़ंग सिर्फ़ इसलिए  क्योंकि पूरी दुनिया तुम्हारे साथ गलत कर रही है। तुम रुक मत जाना देखकर कि कितना आसान है सब यहाँ, जहाँ तुम्हारे लिए सब कुछ उपलब्ध हो बिना किसी कठिनता के। तुम बहक मत जाना सुख देखकर, रखना याद की ये केवल एक मौसम है बदल जायेगा, तुम मन मत बना लेना सबसे कट जाने का इसलिए कि तुम्हारे साथ कोई ज्यादती हुई है, तुम ख़ुद से बचकर मत भागना इसलिए कि तुम में कमियाँ बहुत हैं। तुम कोई बोझ मत लाद लेना, अपने कंधे पर की तुम्हारे बिना ये सब काम कोई और ना करेगा। तुम होना खड़े किसी रास्ते पर, देखना ऊपर आसमान में और देखना फिर अपने शरीर को, कोई फ़र्क नहीं है तुम में और इस खुले आसमान में। तुम ऐसे चलना जैसे कोई राजा चलता है, ऐसे बोलना जैसे राजा बोलते हैं। तुम राजी मत हो जाना किसी के गुलाम बनने को, तुम देना सबको जितना दे सको, देखना मत मुड़कर पीछे की तरफ, राजा देते हैं

रंगीन मौसम के अलग अलग रंग

भीषण गर्मी में ऐसी की ठंडक, बारिश में फुर्सत की गर्म चाय, सर्दी में लिहाफ में क़ैद होकर ख़ूब लंबी प्यारी नींद। यह रंगीन मौसम सबके लिए देता है अलग अलग सुख के अनुभव! और किसानों के लिए देता है, कभी रोमांच, नई आफत तो कभी चुनौती। ~ #ShubhankarThinks

आख़िर दुःख सबको होता है

रातों में भी करता उत्पात, समुंदर कहां कब सोता है। जब धरती की कोख़ उबलती है, तो आसमान भी तो रोता है। ये बड़े पेड़ जब कटते हैं, दर्द उन्हें भी होता है। ज़ुल्म सह लेते हैं मूक पशु, कलेजा तो उनका भी होता है। उजाड़ दिए जाते हैं घर पंछियों के, दुख उनका भी तो होता है। इन सब का जिम्मेदार जगत में, इंसान ख़ुद ही तो होता है। दुख दर्द भरे हों अगर मन में, आदमी ख़ुद को ही खोता है। देता है कयामत को अंज़ाम रोज़, फ़िर भी कभी ख़ुश नहीं होता है। ~ #ShubhankarThinks

मृत्यु - सामाजिक दृष्टिकोण में सुखद अवस्था

सामाजिक दृष्टिकोण से अगर देखा जाए तो मृत्यु किसी भी मनुष्य के जीवन की सबसे अधिक सुखद अवस्था होगी। केवल इस अवस्था के बाद ही मित्र, शत्रु अथवा कोई परिचित भी औपचारिकता का पालन करते हुए, आपकी सभी सकारात्मक स्मृतियों को चर्चा का विषय बनाता है। ~ Shubhankar Thinks

प्रेम विच्छेद के तीन स्तर

शारीरिक स्तर का प्रेम जब टूट जाता है, तब वह खोजता है दूसरा शरीर। मानसिक स्तर के प्रेम को खो देने के बाद, वह अवसाद, क्रोध और शोक से भर जाता है। आत्मा के स्तर पर प्रेम करने वाला, रहता है सदैव उसी प्रेम में जीवन - पर्यन्त। उपरोक्त तीनों स्तर पर उत्पन्न हुए प्रेम का विच्छेद जब होता है तो वह योगी बनकर स्वयं की खोज में निकल जाता है। ~ #ShubhankarThinks

समस्या खोजने वाला व्यक्ति

केवल समस्याएं खोजने वाला व्यक्ति एक अच्छा वक्ता हो सकता है, एक अच्छा विश्लेषक हो सकता है, बुद्धिमान हो सकता है। लेकिन कभी भी समाज अथवा स्वयं के लिए लाभदायक नहीं हो सकता है। ~ #ShubhankarThinks

गलत - सही । Quote - 6 June 20

किसी को कुछ खबर नहीं है, गलत क्या है, क्या सही है? वहां तक सब सही है, जहां तक नज़र नहीं गई है। ~ #ShubhankarThinks

किस्सा कोई भी सुनाया जा सकता है

सच हो या झूठ बस दिलचस्पी भरा हो, किस्सा तो कोई भी सुनाया जा सकता है। हुनर चाहिए किसी को ख़ुद में मिलाने का, रिश्ता तो कोई भी निभाया जा सकता है। बेशक, छोटी और भागदौड़ भरी है जिंदगानी, कुछ वक़्त फिर भी सुकून से बिताया जा सकता है। अगर मौकापरस्ती की लत लग गई है, मुद्दा छोटी सी बात को भी बनाया जा सकता है। सियासत की सूरत सब सच तो नहीं हैं, दृश्य कोई भी हम को दिखाया जा सकता है। पसंद आता है सब को फरेब और दिखावा, अच्छा इंसान तो सिर्फ़ आजमाया जा सकता है। ~ ShubhankarThinks