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Showing posts from May, 2020

सम्मान ! विचार 23 May

सम्मान
एक स्वैच्छिक भाव है जो हृदय पटल पर प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होता है।
यह कोई लेन देन की वस्तु नहीं है।

~ #ShubhankarThinks

"अच्छा होना"
एक आदमी के जीवन के संदर्भ में बहुत बुरी बात है।

एक लड़की का घर से भाग जाना !

तिजोरी में से गहने चोरी हो जाने जैसी हृदय घातक घटना है एक लड़की का घर से फरार हो जाना,
एक गहना जिसकी रखवाली उसके बाप भाई ने जन्म लेने के बाद से ही शुरू कर दी थी। जिसको घर की दहलीज लांघने की इजाज़त नहीं मिली थी!
इतनी सुरक्षा, निगरानी और पाबंदी के बाद भी अगर वो चकमा देकर निकल जाए तो सामाजिक दृष्टकोण में  बने रहने के लिए यह एक अत्यंत चिंता करने का विषय है।
यह वास्तव में नाक कट जाने का विषय है।
~ #ShubhankarThinks

Social Media - स्वर्ण युग | 10 May 20

मैं भगवान का आभारी हूं कि मेरा जन्म
सोशल मीडिया के स्वर्ण युग में हुआ|
जहां सभी लोग कर्त्तव्यपालन, सामाजिक
चिंतन, नीति शास्त्र, आध्यात्मिक चिंतन,
मातृ ऋण, पितृ ऋण, देश प्रेम, धर्म संवाद
जैसे गंभीर और अत्यंत आवश्यक विषयों
पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते रहते हैं।
जब लोग इतनी गंभीरता से इतने सभी
विषयों पर चर्चा कर रहे हैं तो ऐसे में
"वास्तविकता" और "चरितार्थ" जैसे
हल्के फुल्के शब्दों को अनदेखा तो किया
ही जा सकता है। #ShubhankarThinks

Well Settled | 9 May 20

It is a disastrous practice, continuously harming the values of the Marriage Institution by empowering dowry and the necessity of materialism.
#ShubhankarThinks

सच और ख़ुद्दारी ! Random Thought 7 May 2020

सच और ख़ुद्दारी

 दो निहायती ख़राब आदतें हैं।
जो इंसान के ख़िलाफ़ लोगों में नफ़रत और दुश्मनी जैसे अहसास पैदा कराती हैं।

ये पच्चीस तीस की उमर के लड़के

ये पच्चीस तीस की उमर के लड़के लड़की,
जिनमें होती है मजबूती!
पैसे की, शरीर की और भावनाओं की!
वो अकड़कर बोल देते हैं,
उन्हें किसी की जरूरत नहीं,
पचास पार करने के बाद,
वही ढूंढने लगते हैं सहारा यहीं कहीं।


कोरे पन्ने पर कलम मैं चलाता रहूंगा

वैसे तो सभी जी रहे हैं अपनी जिन्दगी
अपने हाशिये से कुछ अनुभव दर्शाता चलूंगा,
कुछ जीने के तरीके मैं भी बताता चलूंगा।

दुनिया बंट गई है, झूठे सच्चे किस्सों में,
कुछ हकीकत के किस्से मैं भी सुनाता चलूंगा,
सच को सच की तरह ही बताता रहूंगा।

उम्मीदें हारते कुछ उजड़े जनों में,
हास्य व्यंग मैं अपने सुनाता चलूंगा,
हौसले डोरी से बंधवाता रहूंगा।

बेशक भूल जाएं मुझे शख्स सारे,
अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराता रहूंगा,
कोरे पन्नों पर कलम यूं चलाता रहूंगा।

#ShubhankarThinks

तारीफ़ - Quote - 2 May 20

जबआपको सम्मान के तौर पर फलों से भरी हुई प्लास्टिक की टोकरी मिलती है तब आप शुक्रिया अदा करने के बाद उसे कहीं कोने में रख देते हैं | इसी तरह तारीफ़ भी कोई हजम करने योग्य चीज नहीं है|