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Showing posts from November, 2019

बातों में अब सरलता नहीं है

बेशक पढ़ लिए हैं वो इल्मी किताबें बहुतायत में,
क्या फ़ायदा गर बातों में अब भी सरलता नहीं है|

कोशिश कर रहा है इन्सां पैरों से आसमाँ तक चढ़ने की,
बिना पर की पैदाइश है इसलिए कोई सफलता नहीं है|

पड़ती है तो पड़ जाने दो किसी पर मार वक़्त की,
ठोकर खाने से पहले कोई भी संभलता नहीं है|

मत करो गुज़ारिश किसी से बदल जाने की,
बिना खुदगर्ज़ी कोई यूँ ही बदलता नहीं है|

कुछ लोग रहते हैं ऐसे गुमान में अपने,
जिन्हें लगता है की सूरज कभी ढ़लता नहीं है|

तुम अकेले चलो, किसी को खींचा मत करो साथ में,
ऐसे जबरदस्ती कोई किसी के भी साथ चलता नहीं है|

थम जाता है सब कुछ मुश्क़िल घड़ी में,
तब वक़्त का आँकड़ा भी ठीक से चलता नहीं|

कुछ लोग अँधेरे में बेवज़ह इतने हताश हुए जाते हैं,
क्यों लग रहा है उनको कि कभी दिन निकलता नहीं है|







#ShubhankarThinks


दीपवाली

रौनकें शहर में हुई हैं अच्छा ही हुआ, कुछ खुशदिली भी होती तो क्या बात होती।
भर गया फोन मेरा लोगों के संदेशों से, बधाइयां मिलकर देते सब तो क्या बात होती।
मोहल्ला चमक गया है पूरा बनावटी लाइट से, उजाले मन में भी होते तो क्या बात होती।
घरों पर लद गए हैं फूल किलो की मात्रा में, कुछ खूबसूरती दिलों में भी होती तो क्या बात होती।
मिठाई बांटी गई हैं खूब इस घर से उस घर तक, कुछ मिठास रिश्तोें में भी लाते तो क्या बात होती।
पैसे बहाये गए हैं खूब अपने घर त्योहार मनाने में, कुछ गरीबों को भी देते तो उनकी दीपावली होती। #ShubhankarThinks