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Showing posts from October, 2019

कुछ क्षण ऐसे भी आते हैं ! 10 May 2022

 कभी कभी घिर जाते हैं हम गहरे किसी दलदल में, फँस जाते हैं जिंदगी के चक्के किसी कीचड़ में, तब जिंदगी चलती भी है तो रेंगकर, लगता है सब रुका हुआ सा। बेहोशी में लगता है सब सही है, पता नहीं रहता अपने होने का भी, तब बेहोशी हमें पता नहीं लगने देती कि होश पूरा जा चुका है। ठीक भी है बेहोशी ना हो तो पता कैसे लगाइएगा की होश में रहना क्या होता है, विपरीत से ही दूसरे विपरीत को प्रकाश मिलता है अन्यथा महत्व क्या रह जायेगा किसी भी बात का फिर तो सही भी ना रहेगा गलत भी ना रहेगा सब शून्य रहेगा। बेहोशी भी रूकती नहीं हमेशा के लिए कभी आते हैं ऐसे क्षण भी जब एक दम से यूटूर्न मार जाती है आपकी नियति, आपको लगता है जैसे आँधी आयी कोई और उसने सब साफ कर दिया, बेहोशी गिर गयी धड़ाम से जमीन पर, आपसे अलग होकर। अभी आप देख पा रहे हो बाहर की चीजें साफ साफ, आपको दिख रहा है कि बेहोशी में जो कुछ चल रहा था वो मेरे भीतर कभी नही चला। जो भी था सब बाहर की बात थी, मैं तो बस भूल गया था खुद को बेहोशी में, ध्यान ना रहा था कि सब जो चल रहा था कोई स्वप्न था। खैर जो भी था सही था, जैसी प्रभु की इच्छा, जब मन किया ध्यान में डुबो दिया जब मन कि

हर बात कुछ ना कुछ कहती है

बातें बनाने में लोगों का जवाब नहीं है, वैसे आदत ये उनकी खराब नहीं है| फ़र्क होता है बातों बातों में, उनके पीछे छिपे इरादों और जज्बातों में| जैसे, कुछ सादा सी बातें जो गोल गोल घूमती हैं, कुछ टेढ़ी सी बातें जो झूठ बोलती हैं| कुछ मीठी सी बातें जो गोल मोल सी हैं, कुछ कड़वी सी बातें जो सिर्फ सच बोलती हैं| कुछ बेमतलब की बातें जो हँस बोलती हैं, कुछ मतलब की बातें, जिनमें जरूरत बोलती है| कुछ लड़ाई की बातें जिनमें मोहब्बत बोलती है, कुछ व्यंग्य सी बातें जो सिर्फ नफ़रत घोलती हैं| कुछ प्यार की बातें जो दिल से बोलती हैं, कुछ इज़हार की बातें जो खुल कर बोलती हैं| कुछ इकरार की बातें जो दिल खोल बैठती हैं, कुछ इंकार की बातें जो दिल तोड़ बैठती हैं| कुछ दोस्ती की बातें जो सीधे दिल में उतरती हैं, कुछ चालाकी की बातें जो दिल से उतरती हैं| कुछ राजनीति की बातें जो लुभावनी सी हैं, कुछ कूटनीति की बातें जो डरावनी सी हैं| कुछ बच्चों सी बातें, जो बहुत बोलती हैं, कुछ समझदारी की बातें, जो अब कम बोलती हैं| कुछ चापलूसी की बातें जो सलाम ठोकती हैं, कुछ वफ़ादा