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Showing posts from December, 2018

आओ बैठो थोड़ी देर

 बैठो कुछ देर अकेले आख़िर कब तक भागोगे ऐसे ही, यात्रा कभी समाप्त होगी नहीं, तुम्हें ही रुक कर आराम करना होगा। जब इतनी दूर चल लिए तो अब आओ बैठो थोड़ी देर, ये गठरी जो तुमने बेवजह लादी हुई है कंधे पर उतार के रख दो किसी किनारे पर, कब तक स्वयं को बोझ से दबाते रहोगे, थोड़ा देर ठहरो देखो क्या भरा है इस गठरी में, कहीं तुम कंकड़ पत्थर तो भर कर नहीं घूम रहे हैं, अरे पागल ये तो पड़े ही हुए हैं सब जगह तुम क्यों इन्हें लाद कर फिर रहे हो। सब संसार की फिक्र तुम ही लिए बैठे हो, कभी थोड़ी देर खुद का हाल चाल भी तो पूछो। क्या पता तुम्हें तुम्हारे बारे में फिक्र करने की सबसे ज्यादा जरूरत हो। तुम सुन कहाँ रहे हो अपनी, तुम चले आ रहे हो सबके अनुसार सबके प्रभाव में सबको देखकर। कभी देखो खुद को वो चाहता है कि विश्राम हो,  वो नहीं चाहता कि तुम कठिन बन जाओ, वो चाहता है कि सब काम सरलता से निपट जायें तो बोझ हल्का रहेगा। लेकिन तुम सुनते कहाँ हो? तुम तो अपनी विशेषता साबित करने में खप गए हो। किसे साबित करके दिखाना चाहते हो! क्या तुम जानते हो कि तुम भी हो इस दुनिया में? तुम्हारा भी वजूद है। अभी समय है आओ बैठो कुछ देर, बैठो ख

एक साल नया अब आने को

एक साल ख़त्म अब होने को, कहीं आँख मूँदकर सोने! नया साल शुरू अब होने को, कुछ पाने को कुछ खोने को। एक साल रेत सा फिसल गया, वक़्त अच्छा बुरा सब निकल गया! मगर कुछ बाकि रही बातें हैं, कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ वादे हैं। पूरे साल रही है उथल-पुथल कुछ खट्टी मीठी यादें हैं। एक साल रहा जैसे रण संग्राम, चुनौती भरा, रही मुश्किलें तमाम! एक साल नहीं रही वक़्त पर लगाम, कब निकलता था दिन और कब ढ़लती थी शाम? एक साल रिश्ते कुछ बनाये गये, कुछ अपने बने तो कुछ पराये बने ! कुछ गैर थे जो खास बने, कुछ पास थे जो गैर बने। एक साल सबक, सीखों से भरा, पूरा साल इम्तेहां सरीखे रहा! ये साल बनेगा कभी यादगार, की एक साल रहा था शानदार। खैर नया साल अब आने को, अनुभव कुछ नए दिलाने को ! कुछ रिश्ते नए बनवाने को, कुछ तोड़ने को कुछ बनाने को, कुछ खोने को कुछ पाने को! एक साल नया अब आने को, एक साल नया अब आने को। ~ #shubhankarthinks #happynewyear2019 #newyear2019