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Showing posts from December, 2018

एक साल नया अब आने को

एक साल ख़त्म अब होने को,
कहीं आँख मूँदकर सोने!
नया साल शुरू अब होने को,
कुछ पाने को कुछ खोने को।

एक साल रेत सा फिसल गया,
वक़्त अच्छा बुरा सब निकल गया!

मगर कुछ बाकि रही बातें हैं,
कुछ अधूरे ख़्वाब, कुछ वादे हैं।
पूरे साल रही है उथल-पुथल
कुछ खट्टी मीठी यादें हैं।

एक साल रहा जैसे रण संग्राम,
चुनौती भरा, रही मुश्किलें तमाम!
एक साल नहीं रही वक़्त पर लगाम,
कब निकलता था दिन और कब ढ़लती थी शाम?

एक साल रिश्ते कुछ बनाये गये,
कुछ अपने बने तो कुछ पराये बने !
कुछ गैर थे जो खास बने,
कुछ पास थे जो गैर बने।

एक साल सबक, सीखों से भरा,
पूरा साल इम्तेहां सरीखे रहा!
ये साल बनेगा कभी यादगार,
की एक साल रहा था शानदार।

खैर नया साल अब आने को,
अनुभव कुछ नए दिलाने को !
कुछ रिश्ते नए बनवाने को,
कुछ तोड़ने को कुछ बनाने को,
कुछ खोने को कुछ पाने को!
एक साल नया अब आने को,
एक साल नया अब आने को।

~ #shubhankarthinks
#happynewyear2019
#newyear2019