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Showing posts from October, 2018

कुछ क्षण ऐसे भी आते हैं ! 10 May 2022

 कभी कभी घिर जाते हैं हम गहरे किसी दलदल में, फँस जाते हैं जिंदगी के चक्के किसी कीचड़ में, तब जिंदगी चलती भी है तो रेंगकर, लगता है सब रुका हुआ सा। बेहोशी में लगता है सब सही है, पता नहीं रहता अपने होने का भी, तब बेहोशी हमें पता नहीं लगने देती कि होश पूरा जा चुका है। ठीक भी है बेहोशी ना हो तो पता कैसे लगाइएगा की होश में रहना क्या होता है, विपरीत से ही दूसरे विपरीत को प्रकाश मिलता है अन्यथा महत्व क्या रह जायेगा किसी भी बात का फिर तो सही भी ना रहेगा गलत भी ना रहेगा सब शून्य रहेगा। बेहोशी भी रूकती नहीं हमेशा के लिए कभी आते हैं ऐसे क्षण भी जब एक दम से यूटूर्न मार जाती है आपकी नियति, आपको लगता है जैसे आँधी आयी कोई और उसने सब साफ कर दिया, बेहोशी गिर गयी धड़ाम से जमीन पर, आपसे अलग होकर। अभी आप देख पा रहे हो बाहर की चीजें साफ साफ, आपको दिख रहा है कि बेहोशी में जो कुछ चल रहा था वो मेरे भीतर कभी नही चला। जो भी था सब बाहर की बात थी, मैं तो बस भूल गया था खुद को बेहोशी में, ध्यान ना रहा था कि सब जो चल रहा था कोई स्वप्न था। खैर जो भी था सही था, जैसी प्रभु की इच्छा, जब मन किया ध्यान में डुबो दिया जब मन कि

याद आता है वो गुजरा जमाना

वक़्त चल रहा था, लोग भी ठहरे नहीं थे, खुली रहती थीं किबाड़, तब उतने पहरे नहीं थे। खुला आसमान, ये चाँद और सितारे बग़ीचे में मचलते ये रंगीन फ़व्वारे। दरख़्तों से निकली हवा की फ़ुहारें, कहीं बच्चों के हाथों में रंगीन गुब्बारे। पंछियों के गुटों का घर वापस आना, माँ को देखकर बच्चों का यूँ खिल जाना। काम से थके हारे लोगों घर वापस आना, फिर चौपालों पर बैठकर ठहठहा लगाना। गली नुक्कड़ पर बच्चों का हुजूम लग जाना, फ़िर खेल-करतब करते-करते उनका थक जाना। घर में घुसते ही भूख का ज़ोरों से दौड़ जाना, फिर चूल्हे की रोटी और माँ के हाथ का खाना। शाम अब भी वही है, लोग अब भी वहीं हैं, अब बातें नई हैं और बदल गया है जमाना। मगर बात जब भी सुकून की होती है, तब- तब याद आता है वो गुजरा जमाना! याद आता है वो गुजरा जमाना।      #ShubhankarThinks

आदत बन गयी है

शराब पीने का मैं आदी नहीं था, मगर तेरी आँखों की मयकशी, अब लत बन गयी है| घुटन होती थी मुझे चादर ओढ़ने में, मगर मखमली सा जिस्म ओढ़ना, आदत बन गयी है। मैं था काफ़िर जो ना कभी दुआ पढ़ता था, मगर तुझे होठों से छूना, अब इबादत बन गयी है| मुझे ना खौफ़ है, मौत के आ जाने का, तेरी धड़कनों की रफ़्तार, क़यामत बन गयी है। तूफ़ान हल्का होता तो खुद में समेट लेता मगर गर्म साँसे और सिसकियाँ आफ़त बन गयी हैं।   #ShubhankarThinks    Pic Credit-  

Life Quote 9 OCT/18

सिलसिलेवार एक के बाद एक, घटनाओं का क्रम है जारी, ना जाने कितने प्लेटफार्म से गुजरेगी, जिंदगी की ये रेलगाड़ी। #Lifequotes #Shubhankarthinks

जीवन का कटु सत्य - Thought of the day

हम सब एक वहम में कई साल निकाल देते हैं, वहम इस बात का होता है कि ये सब सगे संबंधी, रिश्ते नाते, दोस्त सब हमारे लिए ही तो पैदा हुए हैं। किसी को कुछ भी हो मगर मेरे अपनों को तो कुछ नहीं हो सकता क्योंकि वो आपके अपने हैं। आप गलती से भी ये ख्याल तक नहीं रखते कि ये सब लोग भी बाकी उन सभी की तरह हैं, जो अमर नहीं है। एक दिन सबको यहाँ से जाना है। फिर जब आप पूरे गुरूर में होते हैं कि आपके पास सब कुछ है, ऐसे समय पर वक़्त आता है और एक क्षण में आपके किसी अपने को उठा ले जाता है और आपको आपकी औकात का खूब अहसास करा देता है कि दुनिया आपके हिसाब से नहीं चलेगी। ये दुनिया कैसे चल रही है, आपको उसके हिसाब से चलना पड़ेगा और खुद को ढालना पड़ेगा। वक़्त हमें ये अहसास दिलाता है कि हम कितनी भी विज्ञान पढ़ लें कितनी भी तकनीकी बना लें मगर हम वक़्त के आगे बोने ही रहेंगे। वो जब चाहेगा आपसे वो करायेगा, वो जब चाहेगा आपको किसी भी हालत में छोड़ देगा। वो जब चाहेगा किसी को भी खुश करेगा और अगले पल खोखला कर देना। इतना अंदर तक खोखला कर देगा कि आपका दुबारा हँसने का मन ना करे। आप कितना भी मजबूत बन जाओ , कितना भी खुद को सक्ष

Thought of the day : Motivation

कोशिशें नाकाम हैं बेशक मगर इरादे सख्त हैं, कोई ग़लतफ़हमी में मत रहना कि हौसले पस्त हैं|  #ShubhankarThinks #thoughoftheday #mondaymotivation