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Showing posts from June, 2018

नीलकंठ

कैलाश के उच्चतम शिखर पर,
अग्नि में तप वो कर रहा है,
कौन है वो अद्भुत-अदृश्य,
दिन-रात जिसे वो जप रहा है।
विकराल सा वो विष पिये,
शांत खुद को रख रहा है,
तीव्र जटिल और जग विनाशी,
काल मुख में भर रहा है।
महादेव ही है सबका संरक्षक,
सिद्ध इसे वो कर रहा है,
अस्त-व्यस्त केश, त्रिनेत्र धारी,
भीषण आपदा को वश में कर रहा है।





#ShubhankarThinks

Thought of the day 10june

ये धूप दौड़ और गर्मी में शरीर पसीने से लथपथ,
वक़्त इम्तिहान क्या लेगा, मैंने खुद चुना है ये अग्निपथ।




#shubhankarthinks
#goldenthought

व्यंग : दुनिया भरी हुई है गधों से

दुनिया भरी हुई है गधों से,
कुछ अच्छे गधे, कुछ बुरे गधे!
कुछ सच्चे गधे तो कुछ बेईमान।
कुछ घोड़े की शक्ल में, तो कुछ कम अक्ल हैं।
कुछ खच्चर बने हैं तो कुछ शेरों से तने हैं।
कुछ समझदार हैं गधे तो कुछ जाहिल गँवार गधे।
कुछ ज्यादा बोलते हैं तो कुछ बोलने से पहले तौलते हैं।
कुछ गधों का जमाने में खौफ है तो कुछ गधे बड़े डरकोप हैं।
कुछ गधे सबके काम बनाते हैं तो कुछ बस बोलने का खाते हैं।
गधे ये गधे ही हैं इनमें कोई खच्चर-घोड़ा नहीं,
इनके कंधों पर रखा हुआ वजन कोई थोड़ा नहीं।
फिर भी ये शेरों जैसी डींगें हाँक लेते हैं,
ख़ुद से फुर्सत नहीं फिर भी पड़ौस में झाँक लेते हैं।
गर गधे के अंदर कोई लोमड़ जाग जाता,
तो फिर इन्हें गधा नहीं इंसान कहा जाता।
खैर गधे हैं ये गधे ही तो कहे जाएंगे,
नाम रखने से शेर सिंह ये शेर नहीं बन जाएंगे।
ये दुनिया भरी हुई है गधों से,
कुछ अच्छे गधों से तो कुछ बुरे गधों से।



#ShubhankarThinks