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जब आप जिंदगी के किसी मोड़ पर लगातार असफल हो रहे हो तो आपके पास दो रास्ते हैं-
पहला रास्ता यह है, कि आप यहीं रुक जाओ और आने वाली पीढ़ी को यहाँ रुकने के बहाने गिनाओ !
दूसरा यह है, कि आप लगातार प्रयास करते रहो और इतने आगे बढ़ जाओ और खुद किसी का प्रेरणास्रोत बन जाओ|

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Thursday, May 24, 2018

गरीबी vs सर्वशिक्षा अभियान

दरअसल मेरे भी मन में कई बार आता है की ये छोटे बच्चे काम क्यों करते हैं!आखिर सरकार इन्हें पढाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत क्या कुछ नहीं करती है।



ज्यादा इमोशनल मोड़ देना मुझे नहीं आता है मगर मैंने भुट्टे वाले 10 साल के लड़के से हँसते हुए ही पूछा "तू पढ़ने नहीं जाता क्या?" वो चहककर बोला गर्मी की छुट्टी चल रही हैं। मैंने पूछा अगर स्कूल खुल गए तब क्या करेगा? उसने बड़े कॉन्फिडेंस के साथ बोला कि ये सब बन्द कर दूँगा।
अब मैं खुश नहीं हुआ यह सुनकर क्योंकि एक मात्र शिक्षा सब चीजों का समाधान नहीं हो सकती, हो सकता है उसके घर की परिस्थिति इतनी खराब हो कि वो ठेला 10 साल के बच्चे से लगवा रहे हैं। ऐसे में वो कुछ कमा कर दे रहा है तो मुझे इसमें कोई बुराई नहीं लगती अगर कोई बच्चा ,बड़ा या बूढ़ा काम करके कुछ भी कमा रहा है।
जाते जाते मुझे सलाह तो नहीं देनी थी मगर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उससे कहा कि तेरी छुट्टी कितने बजे होती है तो वो बोला "एक बजे " मैंने कहा तब तो तू 4,5 बजे से लेकर रात तक यहाँ ठेला लगा लेना। उसके चेहरे पर हँसी आ गयी बोला "हां ये सही रहेगा"|
अब नियम कायदे कानून बताने वाले बहुत मिल जायेंगे मगर सच्चाई यही है कि आप किस सर्वांगीण विकास के सपने देखते हो, अगले इंसान को रोटी नसीब नहीं होगी अगर वो काम पर नहीं गया तो। फिर शिक्षा, समाज और तरक्की की बात दूर की रह जाती है।

4 comments:

  1. bilkul sahi likha aur hakikat likha hai........
    garibi aisi ki kadam udhar chal deta hai
    jidhar roti bulati hai.....
    padhayee to bahut dur najar aati hai.

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  2. shubhankarthinksMay 30, 2018 at 1:52 AM

    Bilkul sahi kaha apne yhi uddeshya tha mere likhne ka

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  3. Baat toh tumne sahi pakdi Hai lekin Shubhankar, baat yeh bhi Hai ki uss bachhe ko bachpan bhi ek he milega. Ya toh woh ise haste khelte guzar le, ya toh mehnat karke, woh toh paristhitiyaan he tay karti hain. Lekin mai samajhti hoon ki Jin Maa baap ne Jana Hai aulaad ko use ek bachpan Dena bhi unhi ka kartavya Hai, nahi toh bachhe nahi paida karne chahiye.

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  4. shubhankarthinksJune 2, 2018 at 10:28 AM

    फिर वही बात आती है परिस्थिति
    माँ बाप ही ना हो किसी के या फिर माँ हो केवल बाप ना हो, या फिर माँ अकेली कमाती हो थोड़ा बहुत , बाप शराबी हो।
    दी जितने लोग हैं उतनी अलग अलग समस्या तो ऐसे में बचपन बलिदान करना पड़ता है जिंदा रहने के लिए वरना हँसने खेलने का मन किसका नहीं करता

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