Skip to main content

Posts

Showing posts from May, 2018

गरीबी vs सर्वशिक्षा अभियान

दरअसल मेरे भी मन में कई बार आता है की ये छोटे बच्चे काम क्यों करते हैं!आखिर सरकार इन्हें पढाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत क्या कुछ नहीं करती है।



ज्यादा इमोशनल मोड़ देना मुझे नहीं आता है मगर मैंने भुट्टे वाले 10 साल के लड़के से हँसते हुए ही पूछा "तू पढ़ने नहीं जाता क्या?" वो चहककर बोला गर्मी की छुट्टी चल रही हैं। मैंने पूछा अगर स्कूल खुल गए तब क्या करेगा? उसने बड़े कॉन्फिडेंस के साथ बोला कि ये सब बन्द कर दूँगा।
अब मैं खुश नहीं हुआ यह सुनकर क्योंकि एक मात्र शिक्षा सब चीजों का समाधान नहीं हो सकती, हो सकता है उसके घर की परिस्थिति इतनी खराब हो कि वो ठेला 10 साल के बच्चे से लगवा रहे हैं। ऐसे में वो कुछ कमा कर दे रहा है तो मुझे इसमें कोई बुराई नहीं लगती अगर कोई बच्चा ,बड़ा या बूढ़ा काम करके कुछ भी कमा रहा है।
जाते जाते मुझे सलाह तो नहीं देनी थी मगर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उससे कहा कि तेरी छुट्टी कितने बजे होती है तो वो बोला "एक बजे " मैंने कहा तब तो तू 4,5 बजे से लेकर रात तक यहाँ ठेला लगा लेना। उसके चेहरे पर हँसी आ गयी बोला "हां ये सही रहेगा"|
अब नियम का…

जिस्मानी मोहब्बत !Erotica

Declaimer- Strictly 18+ content, read at your own risk.

रूह की मौजूदगी क्या कर पायेगी, जिस्मों की सनसनी जब महफ़िल जमायेगी।
हैं तैयार दो बदन रुख़सत की शिरकत में, हवस तौर से उतरेगी मोहब्बत की कसरत में।
गुनाह माफ़ कर देना अब इनसे तौबा ना होगी, जिस्मानी हसरतें अब हौव्वा ना होगी।
लगाकर जाम होठों पर, शौक से मयकशी होगी, फ़ेंक कर लिबास कोने में खूब बेकदरी होगी।
जिस्म ऐसे चिपक जाए, जैसे गोंद से जोड़ दिए हों, बदन ऐसे झुके होंगे, जैसे कमर से मोड़ दिए हों।
रात खौफ़ में होगी कहीं वजूद ना हिल जाए, आवाज़ों के डर से कहीं दिन ना निकल जाए।
पलँग चरचराहट में आज टूट ना जाये, दोनों जी भर के खेलेंगे, कुछ भी छूट ना जाये।


#ShubhankarThinks

Image Credit - Pixabay

Note- यह मेरी अब तक कि कविताओं से बिल्कुल अलग लिखा है, लिखने के पीछे कोई खास वजह नहीं थी। आप अपनी राय कॉमेंट में बता सकते हैं। धन्यवाद।

Thought of the day 8may

कई बार होता यह है कि हम क्रोध में आकर या फिर किसी बात को बिना जाने ही निर्णय लेने की कोशिश करते हैं|जो कई बार आपकी लड़ाई करा देता है अथवा लोगों को आपके खिलाफ करा देता है। क्योंकि आपके द्वारा गुस्से में लिए हुए निर्णय की चपेट में कई बार वो लोग भी आ जाते हैं , जो अपनी जगह ठीक होते हैं। इसलिए कोई भी बात बोलने से पहले या फिर निर्णय लेने से पहले खुद की मानसिक स्थिति को जाँच लें कहीं आप गुस्से में तो नहीं हैं।