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हालात एक जैसे कभी ना रहे

 ख़्वाब हो सकते हैं कितने भी हसीन, ऐसा कभी होता नहीं है कि सब सही रहे।  दो चीजें अलग हैं तो वो अलग ही रहेंगी, हो भी कैसे सकता है कि तनातनी ना रहे। सब जद्दोजहद में कि खुशियां हो मेरे हिस्से, ग़म का साया मेरे इर्दगिर्द कहीं ना रहे। कभी रौनक हुई तो कभी लंबे सन्नाटे मगर हालात एक जैसे तो कभी ना रहे। सांस छोड़ने से मौत और सांस आए तो जिंदगी, ध्यान से देख लें अगर तो ये डर कभी ना रहे। कुदरत ने बनाए हैं दुनिया में अंधेरे उजाले, ताकि मनोरंजन में कभी कोई कमी ना रहे। ~ #ShubhankarThinks

जिंदगी का निर्देशन

जिंदगी सही खेल खेलती है हमारे साथ,
वो आपको मजबूर करती है कि आप दूसरों की
जिंदगी में दखल दो और ऐसी दखल जिसे करने से आपको भी परेशानी हो और दूसरा इंसान आपसे नफरत करने लगे।


खासकर ऐसा काम मिलता है उन लोगों को जिन्हें दूसरों के जीवन में दखलंदाजी करने का रत्ती भर भी शौक नहीं है, जिंदगी ये काम देती है उस इंसान को जिसे खुद के जीवन में भी किसी की दखल पसंद नहीं और वह खुद सहन नहीं कर सकता कि उसकी जिंदगी में कोई दूसरा इंसान दखल दे। मगर इतना सब कुछ आसान होता तो इसे जिंदगी नाम क्यों दिया जाता, जिंदगी तो बनी ही है आपसे वो सब करा लेने के लिए जो आप कभी करने का सोच भी नहीं सकते थे। यह काम अच्छी दिशा में हो या बुरी दिशा में।

जिंदगी बिल्कुल निर्देशक की तरह है, जो अभिनेता को चुनौती देती है कि इस भूमिका को निभाकर दिखा दे तो जानें और उस निर्देशक को जरा भी फर्क नहीं पड़ता कि यह भूमिका निभाने के बाद उसकी लोगों के बीच छवि क्या बन जाएगी? लोग उसे कुशल अभिनेता समझकर तालियाँ बजायेंगे अथवा उसे विलेन समझकर गालियाँ देंगे और नफरत करने लगेंगे। वो लोग फिर भूल जायेंगे की यह उसके अभिनय का ही तो एक हिस्सा है, उसने तो अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी से निभाई है। अब यह तो निर्देशक की मर्जी थी ना की उस भूमिका में उसे अच्छा पात्र बनाया गया था या फिर बुरा पात्र।

इन सबके बीच निर्देशक ही अकेला ऐसा इंसान है , जो जब चाहे, जिसको चाहे अपने इशारों पर नचायेगा। वह चाहे कोई अभिनेता हो या फिर कोई सहायक कलाकार या कोई पर्दे के पीछे का कलाकार।

दर्शकों को क्या फर्क पड़ता है कि पर्दे के सामने और पर्दे के पीछे दोनों तरफ के जमीन और आसमान अलग अलग हैं, उन्हें क्या फर्क पड़ता है कि कलाकार की भूमिका और असल किरदार के अभिनय में कितना फर्क है? उन्हें तो मतलब है बस तालियाँ बजाने से, सीटी मारने से या फिर गालियाँ देने से।

सब सोची समझी साजिश के तहत होता है,

बहुत खुद्दार है तू जिंदगी!

देख कल तक मैं तुझसे हारा नहीं था, ना ही आगे हारूँगा!

कभी मुलाकात हुई तो कसम से बदला जरूर लूँगा।


#ShubhankarThinks

Comments

  1. bahut hi khubsurati se apne dil ki baaton ko darshayaa hai....
    जिंदगी सही खेल खेलती है हमारे साथ,
    वो आपको मजबूर करती है कि आप दूसरों की
    जिंदगी में दखल दो और ऐसी दखल जिसे करने से आपको भी परेशानी हो और दूसरा इंसान आपसे नफरत करने लगे।

    ReplyDelete
  2. Bilkul thik kaha hai aapne jindagi ek nirdeshak hi hai or hum ek aise abhineta jisko abhinay karna majburi hai chahe wo jaisa bhi ho accha ho bura ho sahi ho ya galat ho bs karna hi hota hai ….
    Behad khubsurti se likha hai aapne keep it up👏👏

    ReplyDelete
  3. shubhankarthinksMay 12, 2018 at 6:06 PM

    Dhanyawad apka sir

    ReplyDelete
  4. shubhankarthinksMay 12, 2018 at 6:06 PM

    Dhanyawad apka

    ReplyDelete
  5. Sahi kaha Hai Shubhankar. Zindagi aisi cheez Hai jise jiyo toh nahi banta, na marte banta Hai. Insaan bas yunhi latka rehta Hai beech mein. Na yahan ka na wahan ka.

    ReplyDelete
  6. shubhankarthinksJune 2, 2018 at 11:09 PM

    Haan didi
    Thanks for reading 🙏

    ReplyDelete

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