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हालात एक जैसे कभी ना रहे

 ख़्वाब हो सकते हैं कितने भी हसीन, ऐसा कभी होता नहीं है कि सब सही रहे।  दो चीजें अलग हैं तो वो अलग ही रहेंगी, हो भी कैसे सकता है कि तनातनी ना रहे। सब जद्दोजहद में कि खुशियां हो मेरे हिस्से, ग़म का साया मेरे इर्दगिर्द कहीं ना रहे। कभी रौनक हुई तो कभी लंबे सन्नाटे मगर हालात एक जैसे तो कभी ना रहे। सांस छोड़ने से मौत और सांस आए तो जिंदगी, ध्यान से देख लें अगर तो ये डर कभी ना रहे। कुदरत ने बनाए हैं दुनिया में अंधेरे उजाले, ताकि मनोरंजन में कभी कोई कमी ना रहे। ~ #ShubhankarThinks

भारत का दंगानामा

नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप सभी लोग, आशा है सभी अच्छे से अपने कार्य में व्यस्त हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं|

काफी कुछ बातें मेरे दिमाग में चल रही हैं, इस पोस्ट में वो सभी बातें बताने की कोशिश करूंगा| अगर आपके पास थोड़ा समय खाली है तो ही पढ़ने की शुरुआत करें क्योंकि मुझे नहीं पता आज कितनी लम्बी बातें होंगी| अपनी स्वाभाविक भाषा के माध्यम से में शुरुआत करूंगा तो जरूरी नहीं यह कोई कविता होगी या फिर एक लेख अथवा कोई पत्र|

Life Style Blog












मेरे द्वारा कलम को सभी दिशाओं में मोड़ा जायेगा,

पाठकों से निवेदन है की

इसे किसी भी धर्म से नहीं जोड़ा जायेगा |

 

भावनायें मैं प्रखर और स्पष्ट लिखूंगा,

इसलिए यह सभी मेरे निजी विचार रहेंगे!

मैंने पक्षपात किया तो यह आपकी नैतिक जिम्मेदारी रहेगी

की आप पढ़ने के बाद बेधड़क सवाल करेंगे|

जैसा की हम सभी जानते ही हैं की भारत पिछले 100-200 वर्षों से सभी धर्मों के मेलजोल और मिलती जुलती सभ्यता का केंद्र रहा है| आजादी के बाद का माहौल कुछ अलग ही तरह से बदला है, देश के हिस्से तो कटे ही साथ ही साथ नफरत की एक नई फसल बढ़ी थी| मगर वक़्त की गाड़ी में सब कुछ बदला तब से लेकर आज तक अनेकों दंगे हुए, उपद्रव हुए! मगर इन सबके बावजूद भी देश ने अर्थव्यवस्था में तरक्की की| एक देश जिसको आजादी के बाद अनाज तक खाने के लिए पड़ौसी देशों ने मदद के लिए हाथ तक आगे नहीं बढ़ाया था| आज वही देश के लोग यहाँ का संस्कृति, सभ्यता, प्रतिभा और सिनेमा का लोहा ,मानते हैं| आज इंटरनेट की दुनिया में गूगल, फेसबुक, व्हाट्सएप्प जैसे अप्लीकेशन के सबसे ज्यादा उपयोगकर्ता देशों में भारत का नाम शीर्ष २-३ देशों में आता है| जब यहां के आईआईटी संस्थानों में प्लेसमेंट शुरू होते हैं तो विदेश की हजारों बड़ी कंपनी यहाँ के छात्रों को अपनी कंपनी में ले जाने के लिए लालायित रहते हैं| यह बात खुद विश्व में सबसे ज्यादा महीने की कमाई करने वाले सीईओ बिल गेट्स ने स्वीकार की है की अगर वह भारत के सॉफ्टवेयर इंजीनियर को माइक्रोसॉफ्ट में काम नहीं देंगे तो वो भारत में ही दूसरी माइक्रोसॉफ्ट कंपनी खड़ा करने की काबिलियत रखते हैं|

इन सबके बावजूद आज 2018 में मुझे शर्म आती है, यहाँ के लोगों की करतूतें देखकर, जहाँ बलात्कार, यौनशोषण जैसी निंदक घटनायें रुकने का नाम नहीं ले रहीं| वहीं दूसरी ओर महामारी जैसी धार्मिक लड़ाईयाँ खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं| पिछले दो तीन वर्षों में इन घटनाओं में अच्छी खासी वृद्धि हुई है|

यह घटनायें कुछ इस तरह से हैं-

 

कहीं धार्मिक भावनाओं की आड़ लेकर किसी की भी हत्या कर दी जाती है

तो कभी एक साधारण मौत को बढ़ा चढ़ाकर उसका राजनीतिकरण कर दिया जाता है| 

कहीं किसी बाबा के समर्थन में सडकों पर करोड़ों के वाहन फूंक दिए जाते हैं|

तो कभी आरक्षण के नाम पर करोड़ों की तोड़फोड़ कर दी जाती है|

कहीं सामान्य सी घटना को सुलझाने की बजाय उसका राष्ट्रीयकरण करके उठा दिया जाता है,

तो कहीं बेहद गंभीर मुद्दे को उठाने की बजाय कागजों में दबा दिया जाता है|

 

कभी दोषी जेल से सबूतों के अभाव में रिहा होते हैं,

तो कभी खुद न्यायधीश खुद कठघरे में खड़े होते हैं|

कुछ बीमारी देश में बड़ी तेजी से फैली हैं,

जिसमें अलग अलग संगठन ने बाजी खेली हैं|

 

अब भारतीयता की बन गयी हैं अलग अलग किस्म,

लिबरल, सेकुलरिज्म, नेशनलिज़्म, पेट्रियोटिक, फेमिनिज्म|

सब अपने अपने ढंग पर गुरूर किये हैं,

काफी लोग इसी आँधी में मशहूर हुए हैं|

 

कभी गौ हत्या के विरोध में लोगों को मार दिया जाता है,

तो कहीं तिरंगे को लेकर हुई लड़ाई में भारतीय ही

भारतीय के हाथों मार दिया जाता है|

 

सभी दंगों के पीछे वोट बैंक छीनने की साजिश रहती है,

ये लड़ाई राजनितिक फायदे के लिए कराई जाती हैं|

ये बात लगभग हर दूसरे तीसरे इंसान को अच्छे से समझ में आती है|

मगर फिर भी ना दंगे रुकने का नाम लेते हैं ना कहीं सांप्रदायिक हिंसा,

ऐसे समय पर सबकी मति क्यों मारी जाती है|

 

कुरआन में कहाँ नफ़रत लिखी है,

वेद संहिता कहाँ किसी को हत्या करना सिखाती है!

किस बात को लेकर नफरत हो रही है,

हिंसा तुम्हें परिणाम में क्या दे जाती है?

 

सभी दोषी मजे लूटते हैं और अंत में

किसी निर्दोष की हत्या हो जाती है|

बची हुई कसर पूरी करने फिर मीडिया की पूरी टीम वहाँ जाती है,

झूठी सच्ची खबर, अफवाहें फैलाकर धार्मिक मोड़ दिखलाती है|

 

सिलसिला यहीं थमने का नाम नहीं लेता,

कोई घटना पर विराम नहीं देता!

फिर फ़र्ज़ी सन्देश तैयार करके सभी ग्रुप में पहुंचाए जाते हैं,

झूठे सच्चे किस्से अनजान लोगों को पढवाये जाते हैं|

 

फिर लिबरल की एक टीम स्वघोषित देशभक्तों से ट्विटर पर भिड़ जाती है,

और नफरत की लड़ाई फिर सोशल मीडिया पर शुरू हो जाती है|

यह विज्ञान में बताये जल चक्र की तरह हो गया है,

जिसमें बर्फ के पानी बन जाने की प्रक्रिया हर बार दोहराई जाती है|

 

इन सबके दौरान कुछ चीज रह जाती है,

हर घटना के बाद इंसानियत मर जाती है|

मीडिया पत्रकार तक गिरगिट के रंग की तरह खबरें बदल लेते हैं,

अब तो विश्वास की बनी ईमारत की नींव दरक जाती है|

सोशल मीडिया अब बदनाम हो चुका है,

जहाँ मेलजोल बढ़ाने की जगह नफरत सिखाई जाती है|

 

अंत में बस यही पंक्तियाँ कहूंगा-

मेलजोल से रहने में किसी की दाल नहीं गलती,

अब एक चूल्हे पर सँयुक्त परिवार की रोटियां नहीं सिकतीं!

पत्रकारिता से विश्वास उठ चुका है,

बिना मसाले के किसी की खबर नहीं बिकती|

भारत अब आग में झुलस चुका है,

भारतीयता की खूबसूरती अब नहीं दिखती|












खैर आज में कुछ लेख लिखने आया था मगर भाव मुझे अलग दिशा में ले गए और अंत भी मुझे कविता के रूप में करना पड़ा|  आप अगर अंत तक पढ़ रहे हैं तो आप सभी के धैर्य का मैं सम्मान करता हूँ|  अपने कीमती विचार देना नहीं भूलें|

10 Most famous things of punjab

Comments

  1. सटीक सत्य लिखा है। मगर स्वार्थ में अंधे लोगों पर असर होने पर ही स्थिति में सुधार सम्भव है।

    ReplyDelete
  2. बिल्कुल सही।।जोरदार लेखन।।बहुसंख्यक समान विचारधारा पर अल्पसंख्यक विचारधाराओंवाले लोग धर्म की आड़ में दंगे की राजनीति करते हैं फिर झुलसने और झुलसाने का खेल शुरू हो जाता है।अब तो आम लोग भी एक दूसरे को नफरत की दृष्टि से द्वखने लगे हैं।धर्मान्धता बढ़ रही है धर्म कहां रहा अब।हम इंसान कम ,देश से पहले जाति और धर्म से बंधे लोग हैं।अब तो प्रमाणपत्र भी मिलते हैं।

    कितना तुमपर ऐतवार किया ऐ लोकतंत्र तुम भी छल बैठे,
    गोद में जाकर तुम भी टोपीवाले की आखिर चढ़ बैठे।।

    ReplyDelete
  3. it's so wonderful details,and really helpful post.keep up and thanks to writer...

    https://www.lukhidiamond.com/LOOSE-DIAMONDS

    ReplyDelete

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