Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2017

एक पत्र : - प्यारे पापा

यह कविता सत्य घटना पर पूर्णतयः आधारित है, जिसमें मैंने ऐसे गंभीर मुद्दे के साथ न्याय करने का एक छोटा सा प्रयास किया है, इसीलिए आपसे निवेदन है की जरूर पढ़ें |



प्यारे पापा ,

मैं आपकी लाड़ली बेटी,

जिसकी फ़िज़ूल की बातें आप बड़े चाव से सुना करते थे,

मगर अब तो काम की बातें सुनने के लिए भी

आपके कान इजाजत नहीं देते शायद!



खैर ,मैं यह पत्र तंज कसने के लिए नहीं लिख रही,

किसी को नीचा दिखाने के लिए नहींं लिख रही|

आपको याद होगा ना जब आपने ,

मेरा रिश्ता तय कर दिया था मेरा किसी के साथ,

उस उम्र में जब स्कूल का रास्ता तय कर पाना भी मेरे लिए मुश्किल था|



10 साल की थी तब मैं और 

स्कूल पूरे 5 किलोमीटर दूर था|

मैंने तब भी कुछ कहा नहीं था,

क्योंकि मुझे भी नहीं पता था यह सब क्या है?

खैर उस बात को अब 7-8 साल हो चुके|



समय बदला और समय के साथ मुझे एक बात समझ में आई है,

वो लड़का मेरे लिए सही नहीं है,

यह रट मैंने बहुत दिनों से लगाई है|

शायद इसी वजह से आप अब सुनते नहीं मुझे,

मगर आज यह बात तो मैं आपको सुनाकर रहूँगी|



वो आपकी मौजूदगी तो कभी गैरमौजूदगी में घर आ जाता है,

मम्मी और आप दोनों को मीठी बातों से रिझाता है!

मगर अकेले में मुझे जब कभी ले जा…

Morning Motivation

तू बस हौसले बुलन्द रखना ऐ इन्सान,

कोशिश से मुँह फेरना नहीं तुझे,

वक़्त का क्या है?

आज नहीं तो कल तेरा भी आयेगा|



भारत का अन्नदाता

सिहरते से आवेग कहीं ज्वालामुखी में लुप्त हो गए हैं,
सरसराते से मनोविचार भूकंप के रौद्र रूप से भयभीत हो गए हैं!

उफनते सी भावनाएँ, बाढ़ के प्रकोप में बह गयीं हैं,
आकाश में आशा की किरण नहीं दिखी,
माथे पर शिकन रह गयी है|

धैर्य की कच्ची प्राचीर इस बार की बारिश में ढह गई है,
प्रकृति रुष्ट है हमसे, शायद सत्कार में कुछ कमी रह गयी है|

शासन प्रशासन को सुध बुध नहीं है,
कृषि उनके लिए बस राजनीति बनकर रह गयी है,
कब मेघ बरसते हैं कोई ख़बर नहीं है?
इंद्रदेव को हमसे शायद कोई दुश्मनी हो गयी है|

अन्नदाता उपनाम मुझे कृपा पूर्ण मिला है,
मेरी स्थिति उसे अब धता बता रही है|







IMG Credit

Thought of the day

सब्जी में थोड़ा मक्खन मिला देने से 

उसका स्वाद वर्धित हो जाता है,

वहीं मक्खन अधिक मात्रा में हो 

जाये तो स्वाद बिगाड़ देता है|

यह बात लगभग सभी बातों पर उचित ही बैठेगी|




#ShubhankarThinks

Morning Motivation

देख मेरे पागलपन को परिस्थिति तक घबराई,

फिर अंतर्मन के एक भवन से आवाज यही बस आयी,

अब रुकना नहीं है मेरे भाई!

अब रुकना नहीं है मेरे भाई!

3 good reasons why Fukrey franchise is grabbing huge audience without any big star

Fukrey Returns is a 2017 Indian comedy film, directed by Mrighdeep Singh Lamba, produced by Farhan Akhtar and Ritesh Sidhwani. Fukrey Returns is a sequel to the 2013 coming-of-age comedy film Fukrey. The film was released on 8 December 2017.

Now the movie is grabbing very good attention from youth and adults, here are few points which prove that there is no need for a big star to pull the audience to theatres.

1-Impact of the first part of Fukrey – As we know, in 2013 Fukrey became popular among youth, people were eagerly waiting for the next part because last part was the complete package of fun and humor. So, this is the one reason to grab the huge audience.

2-Good Story-Line - As we know, a storyline is called the backbone of any movie. In case of Fukrey return, the story is pretty good, the story covers the lots of funny incidents and real humor so that audience can relate their selves to the movie. This is also a plus point to pull the audience into theaters. I still remember the mo…

Thought of the day 23 Dec

कई महीनों से पूरी नींद सोया नहीं हूँ,

- क्यों?

अरे! एक सपना देखा था उस दिन,

बस उसे ही साकार करने में जुटा हुआ हूँ|

जब ये पूरा हो जायेगा तभी नए सपने देखूँगा|




style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

Thought of the day

बड़ी मासूम सी है ये दुनिया,

तुम जरा सी मेहनत खुद की तरक्की के लिए करो,

फ़िर ये अपना भला भूलकर, आपको गिराने की साजिश में वक़्त जाया करती है|

#ShubhankarThinks

style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

Thought of the day

यहाँ रोजमर्रा का खर्च भी नहीं है,

चूल्हा जैसे तैसे जल रहा है!

वहाँ सरकारी कागजों में देखो,

विकास उछल रहा है|

#ShubhankarThinks

style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">



All rights reserved

Morning Thought

आगामी जंग के परिणाम के बारे में सोचकर तू डरना कामयाब बंदे,

मैं तो अपनी नाकामयाबी के लिए हमेशा से मशहूर हूँ|



Morning motivation

ऐसा नहीं है मैं करारा जवाब नहीं देता विरोधियों को ,

बस जवाब देने का तरीका अलग है,

वो उँगली उठाते हैं और मैं उनको नजरअंदाज करके,

खुद को और ऊपर उठाने का प्रयास करता हूँ|




Thought of the day

हो सकता है लोग गिर जाते होंगे अपनी तेज सवारी से,

मुझे क्या गिराओगे मैं रेंगकर जमीन पर चलता हूँ|



style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

सरप्राइज

सरप्राइज अपने दोस्तों को तो सभी देते हैं,

उनकी खुशी कैसी होती है पता नहीं मुझे!

क्योंकि मैंने कभी गिफ्ट दिया नहीं किसी को|

मगर आज अचानक से मैं घर पहुँचा ,

और दादी की वो हँसी वाली खिलखिलाहट 

एक साथ जो छूटी तो लगा कि असल मायने 

में यह सरप्राइज था|


style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

Thought of the day

कुछ लोग जिंदगी को चुनौती देने के लिए पसीना बहाते हैं,

और कुछ लोग दूसरों को धकेलने में|

परिणाम दोनों को कर्म के अनुकूल ही मिलता है|






Composition

Please have patience for sometime,

To hear my frictioning pen.

Have look for sometime,

To watch the ink painting again.

Have patience for sometime,

To understand the hidden intensions.

Do me a favor,

By admiring my dedication and penchants.

Open your mind for sometime,

To accept the reality of the composition.

Please do prediction for sometime,

To calculate my efforts to achieve my ambition.

You'll have to lose yourself in lyrics,

To catch the flow of a composition.

#ShubhankarThinks




माँ को समर्पित

कुण्ठा, बाध्यता और लोक लाज,

मगर हौसले हैं उसके जैसे पर्वत-पठार!

गृहस्थ वो बड़ी यत्न से चलाती है,

और ममता वात्सल्यता के समय

हिम गिरी सी पिघल जाती है|

" माँ "









Bounce Back : Motivation

​You want to destroy my visions 

By applying divisions.

Just because of my Independent decisions.

Wait!

Life is full of ups and downs.
Hold on!

Let me calm down.

But remember,
I will bounce back.

I will bounce back .

I will bounce back.




#ShubhankarThinks



वो बूढ़ी मॉं

वो दानपात्र में लाखों चढ़ा आया मंदिर में जाकर,
बस माँ के लिए सर्दी में जूते लाना शायद वो भूल गया था|

वो मंदिर में जाके घंटो जय माँ जय माँ रटता चला गया,
बस वो अपनी घर में बैठी बूढ़ी माँ को एक बार माँ कहना भूल गया।
वो मंदिर में जाके घंटो जय माँ जय माँ रटता चला गया,
बस वो अपनी घर में बैठी बूढ़ी माँ को एक बार माँ कहना भूल गया।

कल तक जो उसकी खुशी के लिए
पैसे को पानी की तरह बहाती थी,
आज वो कामयाब लड़का
माँ के पैसों का भी हिसाब
लगाना सीख गया है|

कल तक जिन्होंने ने अपने अरमानों को हल्के में लेके,
उसके ख्वाइशों को सराखों पर रखा था!
आज उस कामयाब लड़के को,
उनकी साँसे भी बोझिल हो गईं हैं|

वो चाहती रही,
अपने बेटे को दिल-ओ - जान की तरह,
जो नजरों से उसके ना कभी ओझल रहा!
आज
वो अपनी महबूबा के लिए
उसका घर को सुनसान कर गया|





वो लाड करती रही जिस बेटे को
जैसे भक्ति भगवान की तरह,
छोड़ आया वो उसे वृद्धाश्रम!
जैसे किसी अनजान की तरह|

जिस बेटे को कभी आँचल में दूध पिलाया था,
दुनिया के कष्टों को भी हँसते हँसते उठाया था!
अनजान थी वो इस बात से कल क्या होने वाला है,
नहीं जानती थी बेटे की शक्ल में साँप को उसने पाला है|












CONTENT CR…

Thought of the day

कुछ अलग शौक पाल रखे हैं मैंने,

नींदें काटकर सपने बुनता हूँ|



style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">



पढ़ने गये कविता हम शेर-ओ-शायरी के दौर में,

मेरी पंक्तियाँ कुचल गयीं, वाहवाही के शोर में|



#ShubhankarThinks

Golden thought of life

वक्त बड़ी तेजी से चल रहा है,
आपके पास दो विकल्प हैं ,

या तो ठहर कर जीवन का आनंद लो,
या फिर वक्त की चाल में चाल मिला लो|

अगर बीच का रास्ता चुना तो,

ना काम बचा पाओगे,
ना पहचान बना पाओगे|






style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

Mahadev

भोग विलास का त्याग कर,
श्मशानों में तू रहता है और
अपनी धुन में मस्त मगन,
भांग रगड़ पी लेता है|
मैं भी ठहरा तेरा अखंड भक्त,
जो बस्ती में एकांत ढूंढ
अंतर्मन में रहता है,
संसार का मोह भुला के
जो खुद अपने में जी लेता है|






Thought of the day

बेशक कितना भी नीचे गिरा ले ,मुझे ऐ तकदीर,
लगातार मिली हार से हौसले और भी मजबूत हुए हैं|
अब जितनी भी बार कोशिश करूंगा, पहले से कुछ ज्यादा ही उठूँगा|






style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

आखिर कदम कौन उठायेगा

मानवता की हदें भी करती,
पौरुष की निंदा हैं!
ए-नीच तेरे कुकृत्य से
सभी पुरुष शर्मिंदा हैं|

देख तेरी करतूतों को,
हैवानियत की हदें भी करतीं,
तेरी कठोर निंदा हैं!
जाने कितने फूलों को तूने तोड़ा है,
अब मासूम काली को भी नहीं छोड़ा है!
तेरा हवस प्रेम देख,
दरिंदगी भी तुझ पर कितनी शर्मिंदा है|
हाय! तू कैसा दरिंदा है|

चिता इन हवस के पुजारियों की जलानी होगी,
आग इन व्यभिचारियों को लगानी होगी!
कब तलक लुटती रहेंगी अबलाओं की आबरू,
किसी अर्जुन को फिर से गांडीव की प्रत्यन्चा चढ़ानी ही होगी|

गांडीव कौन उठाएगा?
प्रत्यञ्चा कौन चढ़ायेगा ?
खुद द्रोण यहाँ संलिप्त हुए हैं!
अब कोई कौन्तेय कहाँ बन पायेगा|
शायद स्वाध्याय और ठोकरों से बना
कोई एकलव्य अब आयेगा|







CONTENT CREDIT- कभी कभी दो तीन लोगों की आपसी चर्चा से एक बहुत अच्छा सन्देश निकलता है, आज की कविता के लिए मैं हर्षिता यादव और राकेश सिंह जी को बहुत धन्यवाद देना चाहूँगा, जिन्होंने इसे कविता का रूप देने की संकल्पना की!
आप दोनों का YOURQUOTE पर फॉलो कर सकते हैं-
हर्षिता यादव
राकेश सिंह जी

एवम राकेश जी ने नया ब्लॉग बनाया है आप उनके साथ यहाँ भी जुड़ सकते हैं|


Morning motivation

विरोधियों को अक्सर

मैं असमंजस में डाल जाता हूँ,

हर एक विपदा के बाद

और ज्यादा खिल-खिलाता हूँ|


style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">



#Shame Kolkata incident

कोलकाता में 4 साल की बच्ची के साथ घिनौनी हरकत करने वाले शिक्षक के लिए ये पंक्तियाँ मेरे जेहन से निकलती हैं!

मानवता की हदें भी करतीं,
पौरुष की अब निंदा हैं,
ए-नीच तेरे कुकृत्य से
सभी पुरुष शर्मिंदा हैं|








style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

प्रेम और हिमपात

आज वातावरण में मिठास सी है,
शीत पवन में भी तेरी सुगंध घुली है!


मेरे प्रेम की लहरें और भी तीव्र हो उठी हैं,
हिमपात की कठिन परिस्थिति में,
प्रत्येक शीत अनुभव मुझे,
तुम्हारे श्वांस से निकले उष्ण वायु के
सुखद अनुभव की याद दिलाता है|


तुम पता नहीं कहाँ हो?
लगातार ये शीत वायु मुझे स्पर्श करके,
तुम्हारे प्रेम की महत्ता का ज्ञान करा रही है|



Pic Credit- Google

नमस्कार कैसे हैं आप सभी लोग, यह कविता मूल रूप से Bansi Joshi ने गुजराती में लिखी है, उसके बाद उनके बताये आंकड़ों के आधार पर मैंने इस कविता को हिंदी में पिरोया है| आप बंसी जोशी जी को यहां फॉलो कर सकते हैं|You can follow her on YourQuote too .




style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">



#ShubhankarThinks

Thought of the day

दूसरों का उपहास बनाकर
खुद को ऊँचा दिखाने की
कोशिश में लगे लोग!
हर एक उपहास के बाद
एक पायदान नीचे
खिसक जाते हैं|







style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

Thought of the day

अगर आप किसी कार्य को पहले की भाँति लगातार करते आ रहे हैं,
मगर अब कुछ लोगों ने आपका विरोध करना शुरू कर दिया है!
तो मेरा विश्वास मानिये अब आप बिल्कुल सही दिशा में प्रयास लगा रहे हैं|





style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

Thought of the day

" नई दिशाओं में प्रयास जरूर लगाना जारी रखिये,
हर एक नई दिशा आपके अनुभव और परिचय में दो चार पंक्तियाँ जरूर बढ़ा देगी| "









style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="2629391441">

Thought of the day

I collaborated this quote because this is important to represent the both sides of a coin.



लड़की वाले ने हर नुक्कड़ पर ज्यादा कमाई करने वाले लड़कों का पता पूछा,
फिर शोधकर्ताओं से मंत्रणा करने के बाद ,
बड़े संस्कारों से एक लड़के वाले के यहाँ बोले-
"देखो हम तो लड़के के स्वभाव की तारीफ सुनकर यहाँ आये हैं|"


#ShubhankarThinks




अन्तर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस: Motivation Quote

बेशक खुदा ने मुझे तुम सबसे अंग कम दिए हैं,
मगर हौसले,मैं तुमसे 100गुने ज्यादा रखता हूँ|
तुम निकल ना पाए मोह माया से,
और मैं भूगोल विज्ञान के सिद्धांत गढ़ता हूँ|




[caption id="attachment_435" align="alignnone" width="1280"] Motivational quote[/caption]


Thought of the day

जिन्दगी तो बुलेट ट्रेन जितनी तेज चलेगी,
यह निर्णय आप लेना की आपका स्टेशन कौन सा है और
आपको उतरकर रुकना कहां है?




style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="8314948495">




#ShubhankarThinks

Indian Modernism: आधुनिकता या फिर नकल करने का घातक प्रयास — REIGNITE TWENTIES

खैर, शुरुआत मैंने हिंदी में की है तो आशा करता हूँ , यहाँ सभी पाठक भारत से संबंध रखते होंगे अथवा १ प्रतिशत ऐसे भी होंगे,जिन्हें सर्च इंजन ने यहाँ धकेल दिया होगा| शीर्षक देखकर आपको पता चल ही गया होगा कि यहाँ आज आधुनिकता की बातें होनी हैं| जैसा कि महान इतिहासकार और राजनीतिज्ञ […]

via Indian Modernism: आधुनिकता या फिर नकल करने का घातक प्रयास — REIGNITE TWENTIES