Skip to main content

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर मन की बात, Delhi Smog

नमस्कार कैसे हैं आप सभी लोग? आशा है सभी अच्छे से अपनी जिन्दगी में कुशल-मंगल होंगे, आज के ब्लॉग की अगर मैं बात करूँ आज विषय है दिल्ली के प्रदूषण का, जैसा की किसी भी ब्लॉग के पीछे उद्देश्य होता है, वैसा आज कुछ भी नहीं है, मैं शीर्षक सोचे बिना शुरू करने जा रहा हूँ|




जैसा की आप सभी को पता होगा, २०१६ जैसा ग्रेट स्मोग देश की राजधानी दिल्ली में फिर से आ गया है, जिसका मुख्य कारण हरियाणा और पंजाब में धान की फसल से निकले भूसे को जलाना बताया जाता है और उसका प्रभाव प्रत्येक वर्ष इसी तरह होता है मगर इस बार स्थिति भयावह बन गयी है, पिछले ३-४ दिनों से लगातार धुंध छाया हुआ है, जो थमने का नाम नहीं ले रहा और इसके दुष्प्रभाव से सम्पूर्ण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, दिल्ली एनसीआर के सभी स्कूल में सोमवार तक का अवकाश घोषित कर दिया है| खैर यह सारी खबरें आप लगातार टेलीविज़न पर देख रहे होंगे तो मैं अब अपने विचार प्रस्तुत करना चाहूँगा|




सबसे पहले अगर हम बात करें की दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है?

प्रदूषण के मुख्य कारण - दिल्ली पूरे भारत में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर होने के साथ साथ विश्व के १०  सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में अपना स्थान रखता है जिसके बारे में मैंने पूरा एक ब्लॉग पहले भी लिखा था जिसे आप पढ़ सकते हैं|

कारणों की बात करें तो -

१-वाहनों से होने वाला प्रदूषण ही दिल्ली में ७० प्रतिशत योगदान देता है|

२- इंडस्ट्रियल एरिया से निकलने वाले धुँए और अपशिष्ट पदार्थ(wastage)

३- एयर कंडीशन से निकलने वाला हानिकारक उत्सर्जन|

४ -  जनसंख्या विस्फोट की स्थिति(over populated)

इन सभी के बारे में मैंने अपने पहले ब्लॉग में विस्तार से आंकड़ों के साथ लिखा है आप वहाँ जाकर पढ़ सकते हैं|




अब बात आती है मेरे सवालों की और मन में जो गुबार भरा है वो निकालने की ,

तो सबसे पहले मैं शुरू करता हूँ, वर्तमान स्थिति से, जो अलग अलग लोगों से सवाल करती है?

सुप्रीम कोर्ट का क्रैकर बैन निर्णय- यह निर्णय सिर्फ नवम्बर के लिए लिया गया था ताकि दीवाली पर लोग पठाखे ना जलायें और प्रदूषण पर काबू पाया जा सके, मेरा सवाल यह की क्या सुप्रीम पूरे १० साल के लिए यह निर्णय नहीं ले सकता है| आखिर यह देश के एक शहर में फैलते घातक प्रदूषण का है तो सुप्रीम कोर्ट को सख्त निर्णय क्यों नहीं लेने चाहिए|



style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="8314948495">






दूसरा सवाल है,सरकार से - दिल्ली में केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें जनता ने बहुमत से जितायी हैं और दोनों ही पिछले तीन साल से लगातार कार्य कर रहीं हैं, तो मेरा सवाल यह है, की क्या किसी भी सरकार की यह जिम्मेदारी नहीं बनती की वो कठोर कानून लायें वाहनों की बिक्री को लेकर क्योंकि दिल्ली में ७ मिलियन वाहन चलते हैं, जो संख्या प्रतिदिन १४०० बढ़ जाती है, तो क्या सरकार ये निर्णय मनमानी से नहीं कर सकती, की दिल्ली में वाहन खरीदने से पहले अनुमति लेनी होगी|  साथ ही साथ एक परिवार एक नियंत्रित संख्या में वाहन खरीद सकता है|



अब बात करते हैं दिल्ली के शिक्षित नागरिकों की- दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार से ज्यादा साक्षरता वाला प्रदेश माना जाता है, देश के हर कोने से पढ़े  यहां रहते हैं और सारे फैशन ट्रेंड सब कुछ यहाँ पाश्चात्य देशों से तुरंत कॉपी किया जाता है| मगर उनसे कभी यह नहीं सीखा की बिना कार में घूमे भी आप अमीर कहला सकते हो, गर्लफ्रेंड घुमाने के लिए कार खरीदना जरूरी नहीं है| आप कॉलेज के छात्र हो या फिर किसी मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हो तो आपको इतनी समझ होनी  चाहिए, यह शहर आपका है तो कठिन परिस्थिति में आप अगर थोड़ा अपने आधुनिक संसाधन पूर्ण जीवन से दो चार संसाधन कम करके एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं तो आप ऐसा करिये| आप सीखिए पश्चिमी देशों से जहाँ साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है, जहाँ ग्रीन एवोलुशन के लिए लोग साइकिल से चलने में शर्म महसूस नहीं करते|



style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="8314948495">









खैर यह सभी शिकायतें मेरी लोगों से थी, मुझे पता है, इससे कोई समाधान तो होगा नहीं ना ही लोग किसी की बात मानते फिर भी मै अपने सुझाव रखना चाहूंगा-

१- वाहनों की अंधाधुंध बिक्री पर रोक लगनी चाहिए साथ ही साथ पेट्रोल डीज़ल के वहान कोई भी कंपनी दिल्ली में ना बेचे ऐसा कठोर कानून लाना चाहिए जिससे  भविष्य में सभी ऑटोमोबाइल कंपनी सीएनजी वाहन लाना स्वयं शुरू कर देंगी| किसी महान वैज्ञानिक ने कहा है की "आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है" मतलब जब पेट्रोल डीज़ल के वाहन बंद होंगे लोग खुद ही उसका उपाय खोज निकलेंगे और शोध संस्थानों को बढ़ावा मिलेगा| 

२- ऑड इवन फार्मूला अगले ५ या फिर १० वर्षों के लिए लागू कर देना चाहिए- आखिर सवाल देश की राजधानी  के वजूद का है तो लोगों को भी सहयोग करना चाहिए ताकि दिल्ली को  बेहतर बनाया जा सके और आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहे|

३- इंडस्ट्रियल एरिया को निर्देश  जायें की अपशिष्ट पदार्थ को दिल्ली से बहार ले जाकर वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाये|

४-सभी लोगों को प्रण लेना चाहिए की वो महीने में एक दिन घर, दुकानों और कंपनी में एयर कंडीशन बंद रखेंगे दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए और सभी सरकारी अफसरों और स्वयं सरकार को भी इस नियम का पालन करना चाहिए|

५- युवा वर्ग से मेरा अनुरोध है आप दिन में २० सिगरेट अगर नहीं पीएंगे तो भी वो कुछ हद तक प्रदूषण को कम करने में योगदान देगा, क्योंकि छोटी छोटी पहल ही बड़ा बदलाव लाती हैं | मुझे अच्छे से पता है, आप लोगों को मौत से डर नहीं लगता इसलिए आप चरस,गांजा पीने से नहीं हिचकिचाते, यहां तक की दिल्ली की लड़कियां भी लड़कों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर कश लगाती हैं| महिला सशक्तिकरण अच्छी बात हैं सभी को सामान अधिकार प्राप्त हैं इसलिए मेरा दोनों ही वर्गों से निवेदन है, कम से कम अपने लिए ना सही तो मेरे लिए और मेरे जैसे बाकि लोगों के लिए, जिन्हे लम्बे समय तक जीने की हार्दिक इच्छा है, के लिए सिगरेट पीना कम कर दो|







style="display:block; text-align:center;"
data-ad-layout="in-article"
data-ad-format="fluid"
data-ad-client="ca-pub-5231674881305671"
data-ad-slot="8314948495">









खैर यह सभी बातें मुझे परेशान कर रहीं थीं तो सोचा आप सभी के साथ शेयर करूँ, अगर आप अभी भी पढ़ रहे हैं तो कमेंट करके  विचार बताएं की दिल्ली के प्रदूषण को लेकर आपके क्या उपाय हैं या फिर विचार हैं ?

धन्यवाद|

shubhankarthinks

All rights reserved.

Comments

Popular posts from this blog

Scientific reasons behind Hindu Rituals

Hinduism is the world’s oldest living religion and there are thousands of customs & traditions. Most of us really don’t know what is the scientific reason behind them even we have no idea about it.

1- Blowing Shankha(Conch shell) - In Hinduism, According to our ancient scriptures that Puranas, the shank originated during the Churning of the ocean (Samudra Manthan) by the Deities and Shri Vishnu held it in the form of weapon. As per a holy verse which is regularly chanted during the puja ritual it is mentioned that by the command of Shri Vishnu the deities Moon, Sun and Varun are stationed at the base of the shank, the deity Prajapati on its surface and all the places of pilgrimage like Ganga and Saraswati in its front part.

We blownShankha before starting any religious event even some of the people blown it every day during their regular prayer.

According to science, the blowing of a conch shell enhances the positive psychological vibrations such as courage, determination hope, op…

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

जैसा आपने पिछले पत्र में पढा था कि प्रेमिका रूठकर व्यंगपूर्ण पत्र लिखती है और जब यह पत्र उसके प्रेमी को मिलता है तो वो अपनी प्रेमिका को मनाने और भरोसा दिलाने के मकसद से पत्र का प्रेमपूर्ण जवाब लिखता है मगर मस्तिष्क में चलते गणित के कारण कैसे उसके विचार पत्र के माध्यम से निकलते हैं पढ़िए -



IMG source - http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg








प्रेमी  अपनी प्रेमिका से -

प्रेमिका मेरी ओ प्राण प्यारी!

तुम्हे एक पल हृदय से ना दूर किया है ,

तुम्हारा और मेरा संग तो रसायन विज्ञान में जल बनाने की प्रक्रिया है !

जैसे हाइड्रोजन नहीं छोड़ सकती ऑक्सीजन का संग,

भगवान ने ऐसा रचा है ,हमारा प्रेम प्रसंग|





दुविधा सुनो मेरा क्या हाल हुआ है,

पूरा समय गति के समीकरणों में उलझ गया है !

कभी बल लगाकर पढ़ाई की दिशा में बढ़ता हूँ,

कभी तुम्हारे प्रेम की क्रिया प्रतिक्रिया से पीछे तुम्हारी दिशा में खींचता हूँ|



मेरे विचारों का पाई ग्राफ उलझ जाता है ,

ये Tan@  के मान की तरह कभी ऋणात्मक अनंत तो कभी धनात्मक अनंत तक जाता है !

मेरे ग्राफ रूपी जीवन में सारे मान अस्थिर हैं ,

मगर तुम्हर स्थान मेरे हृदय में पाई(π) …

पथ भ्रष्ट हैं इसलिए कष्ट हैं

क्यों पस्त हैं, क्या कष्ट है? किस अंधेर का आसक्त है। क्यों पस्त है कुछ बोल तू, अगर कष्ट में तो बोल तू, क्यों लड़ रहा हूं खुद से ही, ज़ुबान है तेरी भी, खोल तू।
क्यों भ्रष्ट हैं, वो मस्त हैं, वो निगल रहे हैं सारा देश! हम कष्ट में, पथ भ्रष्ट हैं, नहीं बच रहा है कुछ भी शेष। वो भ्रष्ट हैं क्योंकि हम कष्ट में, वो मस्त हैं क्योंकि ख़ुद हम भ्रष्ट हैं।
जो सख़्त हैं वो लड़ रहे हैं, जो कष्ट में भी बढ़ रहे हैं! जो कष्ट में भी सख़्त हैं, जो सख़्त हैं, वो समृद्ध हैं। क्यों हतप्रभ है, किसी समृद्ध से, तेरे भी हस्त हैं, चला इन्हें शस्त्र से! तेरे पास वक़्त है, तेरे पास शस्त्र हैं, फ़िर क्यों तू स्तब्ध है, यूं कष्ट में?
क्यों निर्वस्त्र है अगर वस्त्र हैं, क्यों चल रहा ये नग्न भेष, अगर निर्वस्त्र ज्यादा सभ्य है, तो मत कहो कि मानव है विशेष। कहो जीव सारे सभ्य हैं, वो सब भी तो निर्वस्त्र हैं| सब निर्वस्त्र ही समृद्ध थे, तो कोई लाया ही क्यों ये वस्त्र है। अब ये वस्त्र हैं तो बढ़ा कष्ट है, कोई सभ्य है तो कोई निर्वस्त्र है।
कुछ कटु सत्य हैं, जो कहीं लुप्त हैं, सही वक्तव्य हैं जो अभी गुप्त हैं। ना कुछ लुप्त ह…