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State of joyfulness

You become happy when outside circumstances come in your favor,You become joyful when none of the outside circumstances affect you anymore.~ #ShubhankarThinks#joyfull #happy #quote

समर शेष है

कठिनाइयों की मारामार,

ऊपर से विफलताओं का अचूक प्रहार!

निराशाओं से भ्रमित विचार,

जैसे रुक गया हो ये संसार||

 

मस्तिष्क का वो पृष्ठ भाग ,

कर रहा अलग ही भागम भाग!

गति तीव्र हो गयी है रक्त की शिराओं की,

दिशाएं भ्रमित हैं रक्तिकाओं की|

 

ये परिणाम है सब असफलता का,

सतत प्रयासों के बाद भी मिल रही विफलता का !

यह बात नहीं अब कोई विशेष है,

समर अभी शेष है|

 

परिस्थितियों ने किये हैं सहस्रों प्रहार

कसर रही नहीं कुछ बाकि है,

हो गया हो तुम्हारा प्रकोप लाने का प्रयास !

तो ध्यान रखो खेल में अगली मेरी बाजी है|

 

खेल का रंग अब देख चुका,

सारे पड़ाव मैं देख चुका!

हार का मुख मैं देख चुका ,

दिन में रात मैं देख चुका!

 

जीत का अंतर माप चुका,

गंम्भीर स्थिति भांप चुका!

हारी बाजियाँ खेल चुका,

अब तक कितना समय मैं ठेल चुका!

कभी निराशा कभी हताशा ,

मैं सारी परिस्थितियां झेल चुका।

 

कुछ बचा नहीं अब परिस्थितियों के पाले में,

शायद नयी चाल नहीं, अब उनके पाले में!

 

अबकी बाजी मैं खेलूंगा ,

हारा हुआ सब एक बार में वापस ले लूंगा!

कितने तनाव और कष्ट दिए ,

मैं सबका हिसाब ले लूंगा|

 

ऐ! परिस्थिति तुझे पहले ही करता हूँ,सावधान!,

बाद मैं मत कहना होकर हैरान,

की उस समय खेल पर नहीं था मेरा ध्यान|

 

तू अपनी चालें सब खेल चुकी है,

खेल में खेलने की मेरी अब बाजी है!

शेष समर है हमारे बीच ,

देखना रोमांच अभी भी बाकि है।





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Comments

  1. सही अौर साकारात्मक !!!

    ReplyDelete
  2. bhut dhanyvaad apka mam

    ReplyDelete
  3. bahut hi khubsurat kavita.....jitne ki prerna deti huyee.
    तुम जीत गए हम हार गए,
    क्यों इतनी ख़ुशी मनाते हो,
    मैं लौट कर वापस आऊंगा,
    क्यों इतना तुम इतराते हो,

    ReplyDelete
  4. bhut achiii lines likhi hai apne
    dhanyavaad apka ki apne pdhaa aur saraha

    ReplyDelete
  5. Bahut kam likha maine......aapka khubsurat kavita anant bhawnaye jagaa di....swagat apka..

    ReplyDelete
  6. abhaar apka

    ReplyDelete
  7. Aapki atikhubsurat kavita man me anginat bhav bhar diye.....byast tha aur shabd apne aap kavitaa ka rup le rahe they magar byastata ne kalam nahi Chalne diya......dubara shanti es kavita ko padhunga....

    ReplyDelete
  8. sir apki itni bhavpurn abhivyakti sunkr din bn gya sach mai , mujhe bhi prerna milti hai aisi pratikriyayen sunkr
    tahe dilse shukriya ek bar fir se

    ReplyDelete
  9. Bandan to hame bhi karna chahiye jo etni sundar kavita padhne ko mili....swagat apka...🙏🙏

    ReplyDelete
  10. Bandan to hame bhi karna chahiye jo etni sundar kavita padhne ko mili....swagat apka...🙏🙏

    ReplyDelete
  11. sir ye to apka badappan hai

    ReplyDelete

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