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जब आप जिंदगी के किसी मोड़ पर लगातार असफल हो रहे हो तो आपके पास दो रास्ते हैं-
पहला रास्ता यह है, कि आप यहीं रुक जाओ और आने वाली पीढ़ी को यहाँ रुकने के बहाने गिनाओ !
दूसरा यह है, कि आप लगातार प्रयास करते रहो और इतने आगे बढ़ जाओ और खुद किसी का प्रेरणास्रोत बन जाओ|

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Friday, September 29, 2017

व्यंग :- आखिर दोषी कौन है?




आज विजयादशमी के मौके पर ,
एक व्यंग मेरे दिमाग में अनायास चल रहा है!
पुतला शायद रावण का फूंका जायेगा,
मगर मेरे अंतःकरण में एक रावण जल रहा है|

तर्क-कुतर्क व्यापक हुआ है,
हठी, मूढ़ी भी बुद्धिजीवी बना है!
आज दशहरा के मौके पर कोई सीता पक्ष तो,
कोई रावण पक्ष की पैरवी में लगा है|

एक व्यंग मेरा भी इस मुक़दमे में जोड़ लो,
विचारों को एक और नया मोड़ दो!

देखो राम ने सीता का त्याग किया था,
इसके लिए उन्हें मैं कुछ देर के लिए दोषी मानता हूँ|
दोष-निर्दोष, कोप-प्रकोप, समर्थन-विद्रोह,
इन सबको चंद पंक्तियों में बखानता हूँ|

अगर बात करें हम न्यायपालिका की,
तो दोषी ठहराओ हर एक सम्राट को जो युद्ध में विजयी हुआ!
क्योंकि सैनिकों की हत्या करके,
उसने भी तो अपराध अपने सिर लिया|

दोषी वो अरि पक्ष भी है,
क्योंकि संख्या थोड़ी कम सही,
मगर हत्याएं तो उसने भी जरुर की होंगी!



दोषी ये सारे बुद्धिजीवी भी हैं,
क्योंकि कुतर्क गढ़ना भी एक अपराध की श्रेणी में आता है!

दोषी मैं भी हूँ,
क्योंकि मिथ्या कहानियाँ गढ़ना भी दंडनीय अपराध है!
दोषी आप भी हैं न्यायपालिका के अनुसार,
क्योंकि मिथ्या और निंदा सुनना भी अक्षम्य पाप है|

अंत में दोषी न्यायव्यवस्था भी है,
जो सबको दंड सुनाती है!
आखिर किसी व्यक्ति पर अत्याचार करना ,
भी तो एक अपराध है|

अब बताओ दोषी आखिर है कौन?






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आप सभी को विजयदशी की हार्दिक शुभकामनायें,
अगर आपको मेरी कविता अच्छी लगी है तो कमेंट करके अपनी प्रतिक्रियाएं अवश्य दें|

नोट- वर्डप्रेस मोबाइल थीम उसेर्स को कमेंट बॉक्स दिखाई नहीं देगा तो आप कृपया वेब लिंक पर जाकर अपनी प्रतिक्रयाएं दे सकते हैं|

धन्यवाद!

© 2017 Shubhankar Thinks. All rights reserved.

4 comments:

  1. Aapne prashno me uljhaa diye…doahi kaun…..?

    ReplyDelete
  2. 😁😁vhi Mera bhi prashn Tha akhir doshi Hai kaun?

    ReplyDelete
  3. Thanks Pooja

    ReplyDelete
  4. Wow amazing suprb blog

    ReplyDelete

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