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Showing posts from September, 2017

व्यंग :- आखिर दोषी कौन है?

आज विजयादशमी के मौके पर ,
एक व्यंग मेरे दिमाग में अनायास चल रहा है!
पुतला शायद रावण का फूंका जायेगा,
मगर मेरे अंतःकरण में एक रावण जल रहा है|

तर्क-कुतर्क व्यापक हुआ है,
हठी, मूढ़ी भी बुद्धिजीवी बना है!
आज दशहरा के मौके पर कोई सीता पक्ष तो,
कोई रावण पक्ष की पैरवी में लगा है|

एक व्यंग मेरा भी इस मुक़दमे में जोड़ लो,
विचारों को एक और नया मोड़ दो!

देखो राम ने सीता का त्याग किया था,
इसके लिए उन्हें मैं कुछ देर के लिए दोषी मानता हूँ|
दोष-निर्दोष, कोप-प्रकोप, समर्थन-विद्रोह,
इन सबको चंद पंक्तियों में बखानता हूँ|

अगर बात करें हम न्यायपालिका की,
तो दोषी ठहराओ हर एक सम्राट को जो युद्ध में विजयी हुआ!
क्योंकि सैनिकों की हत्या करके,
उसने भी तो अपराध अपने सिर लिया|

दोषी वो अरि पक्ष भी है,
क्योंकि संख्या थोड़ी कम सही,
मगर हत्याएं तो उसने भी जरुर की होंगी!



दोषी ये सारे बुद्धिजीवी भी हैं,
क्योंकि कुतर्क गढ़ना भी एक अपराध की श्रेणी में आता है!

दोषी मैं भी हूँ,
क्योंकि मिथ्या कहानियाँ गढ़ना भी दंडनीय अपराध है!
दोषी आप भी हैं न्यायपालिका के अनुसार,
क्योंकि मिथ्या और निंदा सुनना भी अक्षम्य पाप है|

अंत में दोषी न्यायव्यवस्था भी है,
जो सब…

Introduction

Hello,

Welcome to my new blog, I know this is not my first post still, as I noticed, Many fellow bloggers of mine didn't recognize my new blog so  I would like to feature this post for introduction purpose -

My name is Shubhankar Sharma(as my domain says), I am a software engineering student by profession, a web and an Android app developer by choice, a good reader, and a writer as well.

I have been blogging on WordPress for last 10 months, My another Wordpress Link is HereConfusedThoughts, here you will find a good number of posts, soon I will import all posts from that blog to here so please make sure that you are following this blog.

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Thanks to all!

Happy Blogging!

Note- I am running Self-hosted blog on Wordpress that's why comment box will is missing if you are using mobile app so you have to open this post in any browser to make comments.

ख़बर ना रही अब

नमस्कार दोस्तों , कभी कभी मन में कल्पनाएं चल रही होती हैं , जिनका कोई आधार नहीं होता फिर भी आनंद आता है उन्हें लिखने में तो पढ़िए मेरी ये छोटी सी कविता -


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ख़बर ना तुझे रही अब ,

ना मुझे कोई ख़बर है!

तुझे पूछना भी बंद कर दिया है अब

हाल चाल मेरा,

तो अपनी तरफ से बताना ,

मैं अब वाजिब नहीं समझता !

शायद दूरियां पसंद हैं तुझको,

कोशिश मेरी भी अब कुछ ऐसी ही है|

कुछ था और अभी भी कुछ है,

हम दोनों के बीच

वो प्यार नहीं, शायद दोस्ती नहीं ,

कुछ अलग सा है वो जिसका नाम किसी कहानी किस्से में पढ़ा नहीं अभी तक!

जाहिर नहीं करती कभी इरादों को अपने,

बड़ा बैचैन हो जाता हूँ मैं ये सब सोचकर!

कुछ अलग सा हूँ,

मैं भी बाकी सबसे

वो सबके जैसे हरकतें करना मुझे नहीं आता!

बहुत ज्यादा उलझा हुआ रहता हूँ ,

खुद में तो कभी दुनिया की बातों में!

तूने सच बोला था या झूठ की

तुझे मैं उलझा हुआ पसंद हूँ|

पता नहीं क्या लिख रहा हूँ …

Brainwashing : A brain attack

Hello folks,
I hope you all are doing well; Today I am going to share some view on a sensible topic so I hope you will read this article till the end.





So, today’s topic is brainwashing, so firstly let’s know the definition of this word
“pressurize (someone) into adopting radically different beliefs by using systematic and often forcible means.” (source Google)” or

in simple words we can say “Brainwashing is a process which is used to Re-educate someone “

or in other words

In process of brainwashing, A person is convinced by others to adopt the new beliefs and knowledge”.
May be still these explanations are not enough to understand the behavior and effects of brainwash so let’s take an example -
There is a 2 years old baby in our family, who has just started to speak few words like “Maa”,”Paaa”,”daaa”. If I say that’s the result of brainwash then you might disagree with me but firstly let me explain , remember that time when this baby was born, all parents used to speak “call me Mumma”, “ca…