Skip to main content

Posts

Showing posts from July, 2017

बातों को बातों में ही रहने दो !

​आशियाना किसको नहीं भाता ?सबको भाता है ,

तुम्हें नए नए आशियाने भाते हैं ,

और मुझे अच्छे लगते हैं  पुराने मकान!
तुम हर्षोल्लास के साथ नये नये स्थानों पर रहो,

मेरा क्या?मैं ठहरा हठी !

मुझे तुम उसी पुराने मकान में रहने दो !

वो अठखेलियाँ,वार्तालाप सब भूतकाल की बातें हैं ,

अब उन सब बातों को सिर्फ बातें ही रहने दो |

हिंदी चलचित्र पटकथा के समान तुम्हारे इस प्रेम प्रसंग में,

प्रेमी नायक का किरदार मैं नहीं निभा सकता !

हाँ! वो बात अलग है कि नायिका के लिए उपयुक्त पात्र तो तुम भी नहीं थीं!

मगर ये सब बातें हैं इन्हें बातों में रहने दो|

विशिष्ट सुरक्षा घेरे में घिरे तुम्हारे क़ैद मन मस्तिष्क का,

भला कैसे में गहन अध्ययन कर पाता ?

तुम्हें तो लगता है , जैसे मेरे पास कोई दिव्य शक्ति है विचारों को पढ़ने की !

अगर शक्ति होती तो मैं साधारण मनुज कहाँ कहलाता ?

खैर ये सब बातें हैं अब इन्हें बातें ही रहने दो |

तुम हो कोई प्रख्यात सुकुमारी जैसी,

तुम रहो आरामदायक , वातगामी अपने नये नये घरों में !

मैं हूँ युद्ध में सब कुछ हार चुके राजा के जैसा ,

मुझे पीड़ानाशक वनवास में सिर झुकाकर अकेले रहने दो !
स्वप्नों की आकांक्षाएं और प्रेम पिपासा!

 …

कच्चे मकान!

​दशक डेढ़ दशकों में कुछ बदलाव मेरे गांव में हुए हैं ,

वो कच्चे मिट्टी वाले मकान अब पक्के हो गए हैं !




बदलाव भी बड़ी गज़ब प्रक्रिया है ,

अब देखो!

मकान तो सारे के सारे पक्के हो गए मगर रिश्ते-नाते , विश्वास और मेलजोल ये सब कच्चे हो गए !

कभी खेला करते थे जिस शैतानों की टोली में ,

आज व्यस्त और समझदार वो सब बच्चे हो गए |







कुछ अपनापन सा था उन कच्चे मकानों में,

जो मिला नहीं कभी इन पक्के मकानों में !







वो तंगहाली और ऊपर से घनघोर बरसात ,

घर की कच्ची छत से पानी का रिसाव ,

फिर भी अपनेपन का ना था कोई अभाव!







उस कच्ची छत में गोरैया के अनेकों घोंसले ,

मानो एक कच्चे घर में पूरा मोहल्ला बस गया हो !

दिन भर उनके बच्चों की चहचाहट ,

ऐसे लगता था जैसे सारे मिलकर शैतानियां कर रहे हों |







शाम ढ़लते ही लगता था जैसे दुनिया थम सी गयी हो,

आँगन में बैठकर घर वापसी करते पक्षियों को एकटक निहारना ,

ऐसा प्रतीत होता था ,जैसे वो भी अब आराम की तलब में हैं!

फिर कुछ पहर बाद गूँजता था सन्नाटा|



Img Source - http://images.sncurjanchal.in//2017/04/img-20170420-wa0062-583x330.jpg

मगर आज वो गोरैया कहीं गायब हो गयी ,
आसमान में पक्षियों की कतारें संध्या वेला से नदा…

One-sided lens of my Spectacles

Hello every one,
I hope you all are doing well
, today am going to share my problem, I am facing a problem of myopia since last few years. If you are not aware with this word, then I would like to tell you that Blurry vision in one eye or both eyes may be a symptom of myopia. I went to doctors and they fully checked up my eyes with the scanner and they found everything okay also they recommended me eat healthy foods and vegetables after that I followed up a diet plan for 2 months but my problem remained the same. Now again I visited the eye care center and again doctors scanned my eyes and again they found everything okay, I was totally shocked to know that my eye nerves are totally fit. I returned home and discussed this problem with some friends of mine, one of them was my closest friend and he recommended me to visit a psychologist. I was totally helpless so the next day I fixed an appointment with a famous psychologist in my city, He asked me  “so! what’s your problem man?”

“Sir, ac…

लिबास

Img credit- http://im.rediff.com/money/2013/nov/01india1.jpg

​तन ढ़कने के लिए या फिर लाज हया के लिए किसी कारीगर ने ये लिबास,

शाम ढ़लते बाजारों में बनावटी चकाचौंध में दुकानों पर सजे हैं ढ़ेरों लिबास !
कुछ कौड़ियों में बिक रहे हैं 

बड़े कीमती हैं कुछ लिबास,

कुछ सूती, कुछ मख़मली तो कुछ रेशमी धागों से बने हैं ये सब लिबास !

खैर ये नहीं थी कोई बात खास|

आज बात होगी नज़र - ऐ-जहाँ  की ,

इंसान के गुस्ताख़ आलम और बनावटी समां की !
ऐ ! आदम तेरी शेखियाँ इंसानियत के लिए ख़तरनाक हैं,

तेरी एक तरफा अदालत में वकील बनी नज़र की दलीलें दर्दनाक हैं |
कुछ सच्चाई के किस्से फरमाता हूँ,

जगज़ाहिर हक़ीक़त से आपको दोबारा रूबरू कराता  हूँ!

इन लिबासों में छिपा कोई करिश्मा है,

यक़ीन नहीं तो अपनी चश्मदीद आंखों से पूछ लो !

ये तुम्हारी आंखें चश्मदीद गवाह हैं ,


लिबासों की करतूतें उन्हें खूब अच्छे से पता हैं|
अच्छा देखो!

ये सड़क किनारे कौड़ियों के लिबास पहनकर इंसान भी दो कौड़ी का हो जाता है ,

वो ऊंची दुकान पर शीशे में कैद कीमती लिबास पहनकर शैतान भी फ़रिश्ता बन जाता है!

आँखों के इस तुग़लकी फ़ैसले के लिए क़सूरवार किसे ठहराऊं,

दोष दूँ लिबास को या नज़र - ए - जहाँ के ब…