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जब आप जिंदगी के किसी मोड़ पर लगातार असफल हो रहे हो तो आपके पास दो रास्ते हैं-
पहला रास्ता यह है, कि आप यहीं रुक जाओ और आने वाली पीढ़ी को यहाँ रुकने के बहाने गिनाओ !
दूसरा यह है, कि आप लगातार प्रयास करते रहो और इतने आगे बढ़ जाओ और खुद किसी का प्रेरणास्रोत बन जाओ|

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Saturday, April 22, 2017

मेरे अंतर्मन का बेनाम नगर

​वो मेरे अंतर्मन के बेनाम नगर में 

अमुक स्थान से निकलती संकरी राहों से गुजरने के बाद 

एक आवास श्रेणी है !

वहां कोई अज्ञात लोगों का पूरा समूह छिपा है ,

हाँ!एक दो नहीं हैं ,उनका तो पूरा झुंड है पूरा का पूरा !

शान्ति से रहें तो भी ठीक है ,

मगर वो अशिष्ट जन कोलाहल करते हैं

मैं ठहरा लाचार , निर्बल उनके सामने ,

आखिर अकेला प्राणी पूरे झुंड से कैसे लड़ाई करेगा!

वैसे एक नहीं हैं वो लोग 

मगर अच्छा होता अगर वो समूह में एक होते 

विचारधाराएं, परिकल्पनाएं , मार्ग, अभिलाषाएं सब एक होते 

मस्तिष्क - नगर में जाने के मार्ग ना अनेक होते !

दुर्भाग्य कहूँ या फिर मन की पिपासा

हाँ! सारी त्रुटियां मन ने ही तो की हैं ,

क्या जरूरत थी अंतर्मन - आवास श्रेणी में इतने रिक्त स्थान बनाने की ?

अब देख लो अज्ञात लोग अवैध कब्जा करके काल सर्प की भांति कुंडली मार के बैठे हैं !

फिर मैं विचार करता हूँ 

अच्छा ही तो है , जो यहां अनेकों रहते हैं 

वरना इतने बड़े रिक्तस्थान पर कोई

विशाल , वीरान , भुतहा खण्डहर होता !

जिन्न, छलावा और राक्षस ये सब यहां घर कर लेते 

उनके दुष्प्रभाव से शायद मैं भी कोई दानव होता !

अब मन पर प्रश्न चिन्ह लगाना छोटे मुंह बड़ी बात हो गयी

मेरा कद ही क्या है उसके सामने ?

शायद आपको नहीं पता होगा !

मैं भी तो उसी दुर्गम श्रेणी के एक आवास में रहता हूँ

शांत, एकदम अचल , द्वंद्वपूर्ण  विचारों से आच्छादित और असहाय

हाँ यही विशेषताएं उपयुक्त हैं मेरे लिए  !

हाँ एक बात है 

अपने ग्रह में स्थायी रूप से निवास करता हूँ

अब इसे आप मेरी हठवादिता कहो या फिर जुझारूपन 

या फिर आश्रित हूँ मैं 

मगर इन अज्ञात प्राणियों का क्या है ?

अस्थिरता इनके स्वभाव में है 

आज कोई यहां से जाता है तो कल दूसरा कोई रहने आ जाता है !

अनेकों विचार -धाराओं के चलते ये उद्दंडी झुंड कोलाहल बहुत करता है !







नमस्कार दोस्तों ,

जैसा कि आपने नोटिस भी किया होगा पहले के मुकाबले मेरी पोस्ट्स अब नहीं आ रहीं हैं , उसके लिए क्षमा चाहूँगा मुझे भी कुछ समझ नहीं आता आखिर क्यों ?

ऐसा नहीं है राइटिंग का मन नहीं करता !करता है मगर 24 घंटे से ज्यादा मेरे पास भी नहीं हैं सब कुछ करना चाहता हूं एक तरफ सोचता हूँ कुछ भी छूट ना जाये , ये भी कर लूं वो भी कर लूं 

मगर एक तरफ मन कहता है ये सब व्यर्थ की मोह माया है , शांति से रहो मगर फिर भी अंतर्मन अनेकों रूप धारण करके मुझे लगातार भ्रमित करता है कुछ ऐसी व्यथा को मैंने समय निकालकर लिखा है अगर आपको ये द्वंद अपना से लगता है तो विचार अवश्य देना !

धन्यवाद

©Confused Thoughts

21 comments:

  1. आज कोई यहां से जाता है तो कल दूसरा कोई रहने आ जाता है .........बहुत खूब---।

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  2. Bhaiya kya likha hai ki sir ke upad से udd gaya, tumhari bhasha ki mai kayal ho chuki hoon. Marvellous! And in the end what you've written about not being able to write because of lack of time, is precisely what I'm going through as well. So I know what you're going through, but continue writing.

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  3. क्षमा चाहूँगा
    मेरे विचार भी अब मेरी तरह उलझ गए हैं मुझे नहीं पता मैंने इतनी अजीब सी कविता क्यों लिखी 😂😂
    Thanks for appreciations even poetry is not understandable to you 😁
    Yes I will continue like this 🙏
    Kabhi kabhi aunga weird posts k sath

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  4. Don't worry. We love your stuff, weird or not

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  5. So well framed👏👏I liked the way it way written👏Beautiful!

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  6. Thank you so much dear
    Your appreciations mean alot to me
    Keep visiting
    Keep writing

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  7. For sure👍I had been busy so really sorry for not being so regular, but will surely catch up! Most welcome,😇

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  8. Not an issue !
    I am also much busy nowdays

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  9. बहुत अच्छा !! लिखते रहिये, समय की कमी का सामना तो हम सभी करते रहते हैं।

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