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जब आप जिंदगी के किसी मोड़ पर लगातार असफल हो रहे हो तो आपके पास दो रास्ते हैं-
पहला रास्ता यह है, कि आप यहीं रुक जाओ और आने वाली पीढ़ी को यहाँ रुकने के बहाने गिनाओ !
दूसरा यह है, कि आप लगातार प्रयास करते रहो और इतने आगे बढ़ जाओ और खुद किसी का प्रेरणास्रोत बन जाओ|

Saturday, April 8, 2017

बोधकथा 4- बालक ध्रुव

आज बोधकथा के क्रम में आज मैं फिर से एक बोधकथा लेकर आया हूँ जो मैंने पहले की भांति स्कूल में सुनी थी -
पुरातन काल की बात है किसी राज्य में एक राजा रहता था , राजा का नाम उत्तानपाद था और राजा की दो पत्नियां थी पहली पत्नी का नाम सुनिती था और दूसरी का नाम सुरुचि था !

सुरुचि की संतान का नाम उत्तम था और सुनिती के पुत्र का नाम ध्रुव था उसकी उम्र 5 वर्ष थी , राजा को दोनों रानियों में से सुरुचि अधिक प्रिय थी और सुनिती को कोई विशेष महत्व नहीं दिया जाता था !

एक बार की बात है ध्रुव अपने पिता की गोद में खेल रहा था , तभी सुरुचि उसे खेलता देख लेती है और ईर्ष्या के कारण वो ध्रुव को गोद से उतारकर उत्तम को बैठा देती है , अब छोटा बच्चा ध्रुव शिकायत करता है कि मुझे क्यों उतार दिया आपने ?

तो सुरुचि तिरस्कार से कहती है "तुम राजा की गोद में तो बैठ नहीं सकते हां भगवान के पास जाओ सिर्फ वो ही तुम्हे अपनी गोद में बैठा सकते हैं "

ध्रुव रोता हुआ सीधा अपनी माँ सुनिती के पास जाता है

सुनीति उसे दुलारती है समझाती है कि बेटा जिद्द नहीं करते जब उत्तम वहाँ नहीं रहेगा तब तुम बैठ जाना मगर ध्रुव कहाँ मानने वाला था वो लगातार पूछ रहा था मैं क्यों नहीं बैठ सकता आखिर वो मेरे भी तो पिता हैं !

सुनीति बेचारी निःशब्द हो जाती है और बच्चे के इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाती ,

मगर ध्रुव बाल बुद्धि था उसे अभी भी अपनी दूसरी माँ सुरुचि की बातें याद आ रही थी तब उसे याद आया कि कोई भगवान नाम का प्राणी है जो मुझे गोद में बैठा सकता है अगर मैं उनसे विनती करूँ तो बस यह बात उसके हृदय में घर कर गयी थी और रात को सबके सो जाने के बाद वो चुपचाप निकल पड़ा जंगल की ओर भगवान को ढूंढ़ने अब बच्चे की ऐसी हठ देख नारद ने उसकी मदद करने की तरकीब सोची और साधारण मनुष्य का रूप धारण कर उसके पास प्रकट होकर बोले  "पुत्र तुम रात्रि के समय घनघोर जंगल में क्या कर रहे हो अगर कोई जंगली जीव आ गया तो तुम्हारा भक्षण कर लेगा !"

ध्रुव निडरता से कहता है "मुझे भगवान के पास जाना है और माँ ने बताया है वो मुझे गोद में बैठाएंगे बस उन्हें ही ढूंढ रहा हूँ पता नहीं कहाँ रहते हैं वो क्या आप उनका नाम पता बता सकते हैं ?"
बालक की ऐसी हठ देख नारद भी अचंभित हो जाते हैं और बोलते हैं "पुत्र उनका नाम विष्णु है और वो खुद तुम्हारे पास आ जाएंगे अगर तुम उन्हें सच्चे मन से तप करके बुलाओगे , तुम सिर्फ "ओम नमो भगवते वासुदेवाय " मंत्र का निरंतर उच्चारण करना जब तक वो खुद तुम्हारे सामने प्रकट ना हो जाएं !"

इतना कहकर नारद अदृश्य हो जाते हैं

वो बालक वहीं खड़ा होकर हाथ जोड़कर मंत्र का उच्चारण प्रारम्भ कर देता है , तप करते करते उसे रात दिन , धूप बरसात किसी भी बात की सुध नहीं रहती और बिना कुछ खाये पिये ऐसे ही छः मास तक घोर तपस्या करता है आखिरकार विष्णु भगवान उसकी तपस्या से प्रसन्न होते हैं और उसके सामने प्रकट होकर बोलते हैं "आंखें खोलो पुत्र !तुमने इतनी कम अवस्था में कठोर तप करके मुझे प्रसन्न कर दिया तुम अब मुझसे कोई भी वर मांग सकते हो ?"

ध्रुव आंखें खोलता है और भगवान को प्रणाम करते हुए बोलता है "भगवान मुझे हमेशा के लिए आपकी गोद में बैठना है मुझे अपने साथ ले चलो (बाल अज्ञानता के कारण उसे मोक्ष शब्द का ज्ञान नहीं था )

भगवान प्रसन्नता पूर्वक उसे अपनी गोद में बैठकर विष्णुलोक में खिलाते हैं और मोक्ष के बाद पृथ्वी लोक में सर्वोच्च स्थान देने का वरदान भी दे देते हैं !

मोक्ष प्राप्ति के बाद ध्रुव को एक तारे के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त हुआ जिसे हम आज भी ध्रुव तारे के रूप में जानते हैं और उसके उसे 7 ऋषि मुनि तारे के रूप में घेरे हुए हमेशा उपस्थित रहते हैं !

शिक्षा - सच्चे मन और पूरी निष्ठा लगन के साथ किसी कार्य को अगर कोई करे तो कोई भी कार्य इस पृथ्वी पर असंभव नहीं है !



बोधकथा guest post invitation


 बोधकथा -1


बोधकथा -2


बोधकथा 3- तुलसीदास

अगर आपके पास भी ऐसी कोई बोधकथा है तो आपका स्वागत है मैं अगले रविवार को आपकी कथा अपने ब्लॉग पर गेस्ट पोस्ट की तरह प्रकाशित करूँगा 

अधिक जानकारी के लिए 

You can send me a email - shubhankarsharma428@gmail.com

28 comments:

  1. बहुत अच्छा ------बचपन में ये कथा सूना करते थे परंतु माफ़ करना भाई ------जहां तक हमें ज्ञात है ध्रुव अपने माँ सुनीति के कहने पर भगवान् को पुकारने लगा--- न की सौतेली माँ के कहने पर-------वैसे सही कहा जो संतान अपनी माँ बाप की बातों का अनुशरण कर मेहनत करते है उन्हें भगवान् तक मिल जाते हैं.......बहुत अच्छा।

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  2. आपका बोध कथा सीरिज़ बड़ा अच्छा लगता है. ऐसे ही लिखते रहिये. मैंने नचिकेता पर कविता लिखी थी. आप चाहे तो उसकी कहानी भी लिख सकते है.

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  3. Sir apne bhut achi baten likhi h
    AB apko to PTA h story tellers alag alag way m story sunate hain mujhe aisa sunne ko Mila
    Mgr Saar sabhi ka ek HOTA h
    Jisme bhut acha lesson chupa HOTA h bss usi uddeshya SE mene ye likha tha
    Post pdhne aur vichar vyakt krne me liye dhanyavaad

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  4. Dhanyavaad Meri bodhkatha pdhne k liye
    Mere liye bdi khushi ki baat hogi AGR AP ye kahani mere ISS bodhkatha series k liye as a guest post dengi
    Mera phle plan Tha ki sari guest posts hi rhe ISS series m mgr koi b guest post na Milne ki vjh SE mene apni kathayen start ki thi
    Apni raay jrur dena

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  5. पोस्ट एवं उद्देश्य आपका कत्तई गलत नहीं है------पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा-----हम दोनों एक दूसरे को और बेहतर बनाने का प्रयास करें ----धन्यवाद।

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  6. गेस्ट पोस्ट के सम्मान व के इंविटेशन के लिए बहुत शुक्रिया। आपने देखा होगा मैं तो ज्यादा कविताएं ही लिखती हूं । कहानी अभी तुरंत भेजने की स्थिति में नहीं हूं , समय अभाव के कारण। आशा है आप अन्यथा नहीं लेंगे। अपनी बोधकथा लिखना ऐसे ही जारी रखें भूली बिसरी कहानियों को पढ़ना अच्छा लगता है।
    अगर चाहें तब मेरी कविता इस लिंक पर देख सकते हैं, मैं अपने कविता के लिंक भेज रही हूं -
    https://rekhasahay.wordpress.com/2016/09/11/नचिकेता-और-यम-मोक्ष-संवाद/

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  7. Mujhe apki Kavita publish KRNE m koi problem Ni h Aur time Abhi pura week pda hua Hai next Sunday ko post krni h agli bodhkatha
    AP agr chahe ho ek bar ISS bAt par vichar kr skti Hai !
    Praroop yhi rhega guest post ka bs starting m AP APNA chota SA intro likh Dena blog k sath
    Aur agr AP chahe ho mujhe vo praroop send kr skti Hai shubhankarsharma428@gmail.com
    Vichaar rkhne k liye dhanyavaad

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  8. Apke vichar wakai bhut achhe Hai
    Asha krta hu age BHI blog k jariye mulakat Hoti rhegi comments Mai
    Dhanyavaad sir

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  9. Shubhankr abhi kuch samay mai kasfi vyast hun. Jab bhi time milegaa mai likhne ki koshish karungi.

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  10. Dhanyavaad mam
    Koi baat nahi AP JB BHI kabhi likhne ka MN kre AP bhej skti Hai
    Hmesha swagat Hai kyoki ye bodhkatha series chlti rhegi AISE hi
    Kabhi BHI bhej skte hain AP
    Dhanyavaad

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  11. बहुत धन्यवाद. 😊😊

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  12. Vah, vah. Maza aa gaya padh kar. Mujhe Dhruv Taare ki yeh kahani bilkul nahi pata thi. Thank you for this. Ab mai bhi apni beti ko yehi kahani sunaoungi

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  13. Ye line pdhne ke Baad Dil Khush ho gya mano sare din ki thakan utar gyi !
    Actually ye concept bachhon k liye hi Hai aur apne vo last wLi line bolkr ISS Moto ko safal kr Diya

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  14. I'm glad my words encouraged you, par jab kahani he itni achhi tarah batayi gayi ho toh wah wah kaise na kare ;)

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  15. Hi! nominated you for The Mystery Blogger Award! the links for the nominations: https://thepunkpenblog.wordpress.com/2017/07/07/a-new-award/?iframe=true&preview=true&calypso_token=41a6bfbe-6c02-4b7c-a53e-7261bf9de9cc

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  16. Thank you so much Ashi for nomination !
    I am so sorry for replying late.

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  17. Nevermind, I'm glad you received it!

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