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जब आप जिंदगी के किसी मोड़ पर लगातार असफल हो रहे हो तो आपके पास दो रास्ते हैं-
पहला रास्ता यह है, कि आप यहीं रुक जाओ और आने वाली पीढ़ी को यहाँ रुकने के बहाने गिनाओ !
दूसरा यह है, कि आप लगातार प्रयास करते रहो और इतने आगे बढ़ जाओ और खुद किसी का प्रेरणास्रोत बन जाओ|

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Thursday, February 16, 2017

कल्पना

​*कल्पना कविता का अभिप्राय उस अनुपमा कन्या की छवि से है जो किसी नवयुवक के स्वप्नों में निर्मित हुई है 
तुम्हारे बारे में क्या कहूं 

शायद तुम कोई सौन्दर्य रस की कविता हो ,

जिसमें समस्त उपमायें सम्मिलित हैं !
नहीं तुम उन सभी दीपों का प्रकाश हो ,

जो मेरे ह्रदय रूपी आंगन में प्रज्वल्लित हैं !
या फिर तुम लेखनी हो किसी प्रेम ग्रन्थ की ,

जो पूर्णतयः हस्तलिखित है !
तुम जरूर पुष्पमाला हो उस प्रेम मन्दिर की,

जिससे समस्त स्थल सुसज्जित है!
तुम कोकिला हो उस उद्यान की,

जो तुम्हारे मधुर स्वरों से कलरवित है !
हां तुम अभिमान हो किसी तुच्छ मनुज का ,

जिसके ह्रदय में तुम्हारी मूर्ति प्रतिष्ठित है!

अब सत्य कहूं या मिथ्य कहूं !

तुम हो भी या नहीं भी ?

या फिर यह सब कल्पित है !

©Confused Thoughts 

13 comments:

  1. बहुत बहुत बहुत खूबसूरत रचना...👌👌👌👌

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद मैम !

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  3. वाह भाई बहुत खूबसूरत लिखा है, मजा आ गया सही में। हिंदी बहुत अच्छी है आपकी।
    ये पंक्ति पढ़ कर तो सही में वाह निकली
    "या फिर तुम लेखनी हो किसी प्रेम ग्रन्थ की ,
    जो पूर्णतयः हस्तलिखित है "
    बहुत खूब, लिखते रहिए…:)

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  4. तुम जरूर पुष्पमाला हो उस प्रेम मन्दिर की.....👌

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  5. नहीं वो कल्पना सिर्फ एक कल्पना ही थी वरना प्रेम मेरा प्रिय विषय नहीं है !
    मैं इस बारे में कुछ खास अच्छा नहीं लिख पाता!

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  6. हाँ शब्द नही है मेरे पास....इसलिए मैंने कहा मौन में सब है....हाँ मैं समझ गई वो सिर्फ एक कल्पना है...:)

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  7. इतना अच्छे से समझने के लिए फिर से धन्यवाद आपका 😀😀

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