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Showing posts from February, 2017

सैनिक

कभी तपती दुपहरी में

मैदान के बीचों - बीच खड़ा है!

आज इसी दिन के लिए वो 

तूफान - सा दौड़ा है!

प्रथम आया है वो प्रतियोगिता में 

तभी गर्वित होकर चयनित खड़ा है!

कुछ करने की ललक है हौसलों में इसके 

तभी देश सेवा के लिए 

बिल्कुल उत्सुक खड़ा है!

फिर गांव की गलियॉं सुनसान कर चला वो

अपने घर को एकदम वीरान कर चला वो 

आखिर देश की रक्षा करनी है उसको 

अचानक दोस्तों को भी हैरान कर चला वो 

मॉं की आखों में अश्रु ला कर 

एक मॉं की खातिर अभिमान से चला वो ! 

मॉं तो आखिर मॉं होती है 

ममता को सन्नाटे में गुमनाम कर चला वो !

आगे का क्रम कुछ ऐसे बढ़ा फिर

आज वो सिपाही पर्वत पर खड़ा है 

बर्फ पड़ रही है पर्वत के तल पर

भीषण ठंड़ में भी चट्टान - सा अड़ा है!

देश का रक्षक है वो आखिर 

तभी तो इतने गुमान से खड़ा है!

बाहर का प्रहरी तो ये है मगर

अब अन्दर का क्रम कुछ ऐसे बढ़ा है!

राजनीति का जैसे जुनून - सा छाया है

लोगों को कुछ अलग शौक चढ़ा है!

वाद - विवादों की सीमा नहीं अब 

देशभक्ति शब्द खुद कटघरे में खड़ा है!

वोटों की राजनीति के बोझ तले दबकर

वो विकास कहीं गर्त में पड़ा है! 

हाथों को जोड़े बहरूपिया के भेष में 

हजारों की भीड़ में आन - बान से खड़ा है!

जनता क…

सती कथा -2

सारा दृश्य भोलेनाथ समाधी में बैठे बैठे देख रहे थे मगर सती के यूँ अग्नि में कूदने से वो विचलित हो उठे -

अब आगे 



भंगुर हुई समाधि कालेश्वर की 

लाल मुख नेत्र विकराल महेश्वर की 

गण चकित हुए ,भूत प्रेत मन ही मन बोले 

क्या त्रुटि हुई हमसे भोले ,हमें क्षमा करो हे भोले !

फिर प्रकट हुए वो कनखल में 

शांति सी छा गयी समस्त हलचल में 

डगमग डगमग दिक् गज डोले 

जब क्रोधित हुए बम भोले!

पृथ्वी आकाश पाताल 

अग्नि वायु और भुताल,

गौ, कच्छप ,गज और ब्रह्माण्ड 

सब भयभीत थे ऐसे जैसे 

अब होगा कोई भीषण विश्व संग्राम !

पक्षी जंतु सब स्तब्ध खड़े थे 

देव जन नतमस्तक पड़े थे ,

हुआ शांत प्रकृति का संगीत अब

सामान्य जन का तो हाल व्यथित था 

कुछ मूर्छित थे बाकि भयभीत थे सब !
देख सती को दहनते हुए 

महादेव प्रेम से द्रवित हुए ,

दहाड़ उठे वो गगन तक 

कन्धों पर शव सती का लिए !



गर्जना सुन गगन तक डोला 

जब ताण्डव नृत्य करने लगे बम भोला 

नेत्रों में ज्वाला झांक रही थी

वसुधा भी थर थर काँप रही थी 

आशंका थी उसे विनाश प्रलय की 

नृत्य का भार वो भलीभांति भांप रही थी !!

 .ऋषि ,मुनि  ,राक्षस ,चांडाल ,श्वान 
मनुज , देव और जन जीव तमाम 

रहे देख रौद्र रूप का स्वांग 

और लगा रहे त्र…

सती कथा -१

भगवान शिव और सती कैलाश पर बैठे हुए हैं, तभी सती देखती है आकाश में कुछ विमान जा रहे हैं-



एक दिन प्रात: भोर बेला में 

कैलाश पर्वत की दुर्गम श्रृंखला में 

शिव - सती शिला पर विराजे हैं 

देख गगन में विमान पंक्तिबद्ध 

बोली सती सहज उत्सुकतावश-

प्रभु एक बार तो देखो गगन को

कभी मन्द कभी तीव्र चलायमान पवन को

विमान की कतारों से खचाखच गगन को 

क्या आज कोई विशिष्ट दिवस है

सर्वज्ञानी मुस्कुराकर बोले 

विमान के ओर दिखाकर बोले 

सभी देव - देवांगनाओं को निमंत्रित किया 

दक्ष ने आज महायज्ञ आयोजित किया है।
कुछ चकित हुए खिसियाकर बोली 

"क्या हमें निमंत्रण नहीं आया?

बताओ प्रभु हमारे पास नहीं है क्या कोई बुलावा?"
शंकर फिर मुस्कुरा कर बोले

सती को समझाकर बोले 

देवी तात तुम्हारे रुष्ट हुए है

देवसभा में मुझसे क्रुद्ध  हुए है 

बैर के सामने ना वे संबंध देखते 

अब मुझ शत्रु को निमंत्रण क्यों भेजते 
सुन वचन प्रभु के स्तब्ध हुई

मगर उत्सव की कल्पनाओं में बद्ध हुई

हे नाथ! मेरे प्रभु प्राणपति

माना क्रूद्ध है आपसे प्रजापति 
किन्तु मैं तो हूं कन्या उनकी

क्यों प्रतिक्षा करूं निमंत्रण की?
महादेव शांत होकर बोले

देवी अब तुम मेरी अर्धांगिनी हो

युगपर्यं…

Unconditional

One day , one night 

Our dreams will be bright 

You and me 

Will make love at sight 

I know it's just mind creation 

Dreams are real 

 let me give them appreciation.

I know it is just imagination 

Make some memories

Let make their aggregation.

Our future should be like a fiction 

There will be a lot confliction .

Don't think much about our story 

It will be untraditional 

Do love me and let me love you 

Let's make it unconditional .



©Confused Thoughts 

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Hello guys

good after noon all ,

hope you all are doing well

i started blogging in December that time i had never thought that you guys will give your huge support and love .you all are amazing ,every blog have different thought different tone ,i always admire you all even i learned much from you so first of all i would like to say thanks to all of you .WordPress is perfect way to express your feelings and i feel  amazing because i am a member of this beautiful family.daily i meet wonderful personalities even some of them seems like friends,yesterday i joined another blogging platform(one of our fellow blogger posted a blog on it ) ,which is named as IndiBlogger so those who are already on IndiBlogger they can ADD ME or can give their profile link by comments ,

also you can join me on other social sites-

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one more thing me and one of my friend have started a small YouTube channel please

visit our channel once

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love y…

Father

In whom presence

Your manhood make sense

He never let you feel discomfort

At any moment, in his existance

Always pay for you in any how 

Whatever you do study or do disco dance 
When you find out your lover 

You leave his home forever

Never understand his feelings

But look at him 

He still gives thousands of blessings .
He make sacrifices for your happiness 

Wore the old clothes for your smartness 

He  putted the old boots 

Because of your  expensive suits.

Now look at his kindness . 



©Confused Thoughts

पहल

​कुछ समस्यायें तुम्हारी हैं 

कुछ उलझनें मेरी भी हैं

दोनों एक पग दूर खड़े हैं 

मतभेदों में मजबूर खड़े हैं 

कोई तो रिक्तस्थान भरो

पहल मैं करूं या तुम करो !



दोनों के मन  विचलित हैं 

विचारों में अधिकल्पित हैं

करुण क्रुन्दन सा है अंतर्मन में 

कंपित है तन वियोग के आगमन में

इस विचित्र स्थिति में अब क्या करूँ ?

पहल तुम करो या मैं करूँ !
मिलन की प्रतीक्षा में दोनों नयन आतुर हैं 

अवरोध खड़ा है कठोर मस्तिष्क 

हाय ये बहुत निष्ठुर है 

विरह में व्यतीत हो रहे हैं 

पल पल योजन के जैसे 

मगर कोई पहल करे तो करे कैसे ?

अभी भी स्थिति स्थिर बनी है 

पहल  मैं करूं या तुम करो ! 
©Confused Thoughts

अंतिम दृश्य भाग-७

प्रतिदिन की भांति आज भी शक्तिप्रसाद सुबह भोर में उठकर नहा धोकर गांव के बाहर वाले शिव मंदिर पर पूजा करने गए थे , अब उन्हें ये कहाँ पता था आज होनी को कुछ और मंजूर है ,जैसे ही घर वापस आये हर रोज की भांति उन्हें लगा मधुमति चूल्हे पर चाय वगरह बना रही होगी मगर आज दृश्य पूर्णतयः परिवर्तित था , बाहर बरामद एकदम शान्त था और आज कोई बर्तन की आवाज भी नहीं आ रही थी !

शक्तिप्रसाद अंदर घुसे तो देखा मधुमती खाट पर पड़ी पीड़ा से कराह रही थी , पूरा जीवन सबका ख्याल रखने में निकाल दिया कभी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने का मौका ही नहीं मिला हाँ कभी तबियत खराब होती तो पास वाले गांव में एक वैध जी थे उनसे औषधि की पुड़िया ले आती और ठीक हो जाती, क्या पता ठीक होती थी या फिर दर्द सहने की आदत पड़ जाती थी ये तो वो ही जाने क्योंकि काम करने वाले व्यक्ति की छोटा मोटा दर्द महसूस कहाँ होता है !

मगर सच ये है कि ये छोटा सा दर्द शरीर में घुन की भांति लगता है जो धीरे धीरे पुरे शरीर की खोखला कर देता है और अंत में मिटटी का ढेर बना देता है !

अब मधुमती को इस अवस्था में देखकर शक्तिप्रसाद ने क्षण भर नहीं लगाया समझने में की कोई गंभीर समस्य…

कल्पना

​*कल्पना कविता का अभिप्राय उस अनुपमा कन्या की छवि से है जो किसी नवयुवक के स्वप्नों में निर्मित हुई है 
तुम्हारे बारे में क्या कहूं 

शायद तुम कोई सौन्दर्य रस की कविता हो ,

जिसमें समस्त उपमायें सम्मिलित हैं !
नहीं तुम उन सभी दीपों का प्रकाश हो ,

जो मेरे ह्रदय रूपी आंगन में प्रज्वल्लित हैं !
या फिर तुम लेखनी हो किसी प्रेम ग्रन्थ की ,

जो पूर्णतयः हस्तलिखित है !
तुम जरूर पुष्पमाला हो उस प्रेम मन्दिर की,

जिससे समस्त स्थल सुसज्जित है!
तुम कोकिला हो उस उद्यान की,

जो तुम्हारे मधुर स्वरों से कलरवित है !
हां तुम अभिमान हो किसी तुच्छ मनुज का ,

जिसके ह्रदय में तुम्हारी मूर्ति प्रतिष्ठित है!

अब सत्य कहूं या मिथ्य कहूं !

तुम हो भी या नहीं भी ?

या फिर यह सब कल्पित है !

©Confused Thoughts 

स्वाभिमान

ख्वाबों में आकर दुनिया सजाती थी 

मुझे पता था वो सब वहम था मेरा
मगर तू भी मुझे कुछ कम नहीं उकसाती थी
खैर मैंने अब तुझे भुला दिया
तेरा नाम पता सब मिटा दिया
आखिर स्वाभिमान भी अहम था मेरा !

कोशिश तो की थी मैंने भी   भरपूर मगर

हर   बार  उसे नाकाम बनाना रहम था तेरा

क्या पता मैं ही गलत था ?

क्या पता मेरा सब कुछ एकतरफा था ?

अगर ये सब सच है तो 

फिर मुझे रिझाने का क्यों जतन था तेरा?




जाने क्या पागलपन था मुझको 

दिल पर पत्थर रखकर कोशिशें करता था 

शायद तेरे तेवर बदलने की उम्मीद थी मुझे 

तभी मैं खुद की बनाई बंदिशें खुद ही चूर करता था !




एक तरफ दिल की जिद्द थी तुझे हर हाल में मनाने की 

दूसरी तरफ उस घायल मन की पुकार थी 

तुझे हमेशा के लिए भूल जाने की 

तूने भी खूब छकाया अपनी बेरुखी दिखाकर 

तुझे कहीं ना कहीं लगा की 

ये तो इसकी आदत है गिड़गिड़ाने की !




आखिर मन के आगे दिल हार गया 

ख्वाब उसका चकनाचूर हुआ 

एक ना चलने दी मन ने उसकी 

फिर वो ख्वाब आँखों से दूर हुआ 

स्वाभिमान भी जरूरी होता है 

बस यही सोचकर मैं तुझसे दूर हुआ 

पीछे मुड़कर देखना फितरत में नहीं मेरे 

बस यही सोचकर तुझे कभी ना देखने का कठोर फैसला 

मेरे दिल की अदालत में मंजूर हुआ !





@CONF…

SELFISH OR SELF CARE -2

PREVIOUSLY ROHAN GOT texts from a unknown number he was so excited,

now next_

As we know Rohan love to keep himself alone, that’s who don’t behave like other those who share their all naughty chat conversation with friends so this time he keep same. Sometimes Rohan talk to himself beacuase no one cant make control over  the thoughts. His first thought tells him “Rohan may be there will be a relative” but he reply to thought “But I have all contacts in my phone then how can it possible “  within second  Another thought come to him “Rohan sure any friend of you is there and wants to troll you “  again Rohan says “No man ! I don’t have lame friends like this if anyone wants to troll he will directly come to my room , why he will waste his time by sending messages” during this session one another thought was on hold since starting but Rohan does not want to think about it or he think why any girl will send him message even none of his friend is girl . Finally he decide to ask directly to t…

Completed 200* followers

Hello guys 

I know you all are amazing , you are doing great yaar 

I am your biggest fan , love the way you do support with your warm comments ,

Your comments work like fuel which push me to write more and more 

I hope you will be continue , again I would like to say please do comment ,don't care you are criticising or appreciating me cz I need both .

I can't list out all readers but I have tried to point out some heart touching comments , may be few of them have left by mistake .

















Thank you all 

Love you so much !  💓💓💓💓💓

Huge respect from heart 💓🙏🙏🙏🙏

अंतिम दृश्य -६

दुःख और सुख दोनों एक दूसरे के संगी हैं , सुख आता है तो इसके पीछे पीछे दुःख भी चला आता है !

खैर बेटा बहु को शहर गये पूरा एक वर्ष व्यतीत हो गया है इस बीच दीपावली पर सभी लोग इकठठे हुए थे मधुमती का वश चलता तो दीपावली के त्यौहार को रमजान के सरीखा एक महीने लम्बा खींच देतीं मगर ये उसके नियंत्रण से बाहर की बात है आखिर उसका वश तो खुद के परिवार पर भी नहीं है जिनसे वो यह भी नहीं कह सकती की दो चार दिन और रुक जाओ !

अब उस बेचारी को कौन समझाए सबकी अपनी व्यस्त जिंदगी है मगर उसके हृदय की टीस कौन जाने जिसकी जिंदगी बस यही है इन सबके बिना उसका जीवन एकदम नीरस है !

शक्तिप्रसाद भी बेचारे क्या करें अब तो वो कुश्ती देखने भी नहीं जाते क्योंकि वो नहीं चाहते मधुमती घर पर अकली रोती रहे , हाँ वो अलग बात है कि वो कुछ बोल नहीं पाते अब क्या करें घर गृहस्थ में कभी ऐसा अवसर ही नहीं मिला की दोनों ने प्रेमपूर्ण वार्तालाप की हो अब इसे अखड़पन कहे या शर्मीला स्वाभाव मगर इन सबके बीच प्रेम कहीं छुपा था वरना वो अपनी प्रिय कुश्ती छोड़ कर घर पर नहीं रुकते हाँ वो बात अलग है अब उन्होंने घर पर पशुओं से मित्रता कर ली है उनके साथ उपहास ऐस…

Three faces of society

Hello guys hope you all are doing well 

I am sorry I am too busy now days so both story series are getting late but today topic is different :- 

Actually I always saw the different blogs about social issues also I anylize them today I would like to give my opinion which comes after a case study , I don't know I am describing it in right manner or just throwing useless content .

Now let's start 

First of all we talk about general social issues it may be any riot , rape case , kidnapping , political issue , religious issue or any other type of harrasement and so on .

After every case we just blame others for circumstances , we never try to observe the situation , we never try to make any changes we just think that we will speak up and it will increase our social image , I am sorry I am bitter speaker but it is truth .I think I should cut the crap because it will distract me from the real  topic which is am gonna discuss with you .

When a bad event happen in our country then people spe…

अन्तिम दृश्य भाग-५

आप कृपया कमरा खाली कर दीजिए ,मुझे सफाई.करनी. है " ये भावुक आवाज थी हास्पिटल के सफाई कर्मी की.,.उसने ये बात बहुत संकोचवश बोली थी मानो अन्दर से हृदय उसे ये करने के लिये मना कर रहा हो वो कहते हैं ना "गन्दा है मगर धंधा है "! सभी को बाहर निकलवाना मजबूरी है उसकी वरना अपनों को ऐसी स्थिति में एक पल भी दूर करने का दर्द उसे अच्छे से पता है !

खैर सुधीर बाहर टहलने चला गया और कम्पाउंडर कमरे में चादर बदलने के लिये घुसा और उसने शक्तिप्रसाद को भी उठा दिया , उन्होंने ऑंखें तो खोल ली मगर उठकर बैठने जितनी हिम्मत अब नहीं थी , अब मुश्किल थी उन्हें बैठाने की पूरे ९० किलो के भारी शरीर को दुबला सा अकेला आदमी कहाँ उठा पाता मानो एक दिन की मजदूरी करने वाले श्रमिक को एक साथ ३-४ दिन का काम दे दिया हो बेचारा विफल होकर सुधीर को आवाज दे देता है "साहब बाबा जी को उठाने में मदद कर दो इनकी चादर बदलवानी है " सुनकर सुधीर अंदर कमरे में प्रवेश करता है और दोनों लोग मिलके उठा देते हैं अब बेचारे शक्ति प्रसाद भी क्या करें "उनकी गिनती ना जिंदों में है ना मरों में "





एक वक्त हुआ करता था ९०-१०० किलो…