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Showing posts from January, 2017

Selfish or self care

(hello guys , how are you all? As you know I started my Hindi story but unfortunately I could not justice to story as per your reactions because when I started people have lot of views but after 2,3 part , you people just did  the favour to me by  your likes :)m sorry but I can't stop my words so today again I am going to start a story so please give me a chance and pay your attention 😁)





Part -1

" Hey dude "- Rohan is doing workout in gym and suddenly , words came to him . Within second Rohan respond "Yo man!"

Actually it was Akash who is the close friend of Rohan and both are gym partner also .Today he got late so Rohan have started workout and during workout Akash enter and say that line after finishing a set Rohan give response to him and ask the reason "why  you are late today "

Akash is little bit funny and flirty so he speak in a naughty way "you know Deepti na! Just having chill pill with her ;)"

Rohan knows everything about him so he is …

अन्तिम दृश्य - भाग -४

इस बार चित्रण थोड़ा आगे निकल चुका था। मानो जितने समय सुधीर व्यस्त हुआ उस वक्त का सारा अध्याय निकलकर आगे पहुंच गया हो...
"भैया वो बात ये है कि मैं इस लडकी से शादी नहीं कर सकता!" - विनोद ने संकोचवश बड़ी धीमी आवाज में बड़े भाई से फुसफुसाते हुए कहा।
इतना सुनते ही सुधीर के पैरों तले जमीन खिसक गयी आखिर बात ही ऐसी बोली थी।
हुआ ये था कि सुधीर अब २३ वर्ष का हो गया था और अच्छी खासी नौकरी भी लग गयी थी तो शक्तिप्रसाद को लगा कोई अच्छी लड़की देखकर इसकी भी शादी कर देता हूं। फिर सारे कर्मों से तृप्त होकर पत्नी के साथ तीर्थ दर्शन को निकल जाऊंगा।
सोचने की देरी थी, बिना किसी की मर्जी पूछे बोल दिया पंड़ित जी से "अगर कोई अच्छा रिश्ता आये तो बता देना।"
पहले दोनों बेटों की शादी ऐसे ही तय हुईं थीं। अब भला शक्तिप्रसाद का निर्णय कौन टाल सकता था। भाग्यवश पंड़ित जी की नजर में एक अध्यापक की लड़की सुनिधि थी, जो पढ़ाई में विलक्षण और गृहकार्य में दक्ष थी और रूप ऐसा कि मानो कामदेव अगर देख ले तो सहर्ष सेवक बनने को तैयार हो जाये।
सारे गुणों का अवलोकन करने बाद अगर उसे कोई देख ले, तो किसी देवी से कम नहीं लग…

मतलबी

मतलबी सी दुनिया है

बातें मतलबी सी हैं !

बिल्कुल ऐसे जैसे 

बातों में फरेब है 

या फिर 

फरेब की सी बातें हैं !!
मैं भी मतलबी हूं यार

तू भी मतलबी है यार,

मतलबों की दोस्ती है 

या मैं कहुं 

दोस्ती में कोई मतलब है छिपा !

मतलबी हर कोई  इंसान है

मतलबी सारा जहान है , 

मतलब के लिए रिश्ते हैं 

या फिर 

रिश्तों में भी मतलब मिला है

पता नहीं ये खुद बने थे ,

या फिर किसी मतलब के लिए बनाये गये थे !!
मतलबी सा प्यार है  सब 

मतलब के लिए दिलदार हैं सब 

मैं भी मतलबी हूं यार क्योंकि

मतलबी संसार है अब !!
©Confused Thoughts

My Confused Thoughts - Words

Hello friends, how are you all? Hope you all are doing well if not then hit me back.

Now let's come to the point, as you know I am confused by my thoughts so today again words are pulling me to write something on WordPress, I really don't know what will be that title but I am writing first.

Today I opened YouTube and listened to poetry. Some poetries were heart touching, some of them were normal (I can't judge if I can't write like this ) but there was a difference between heart touching and normal poetry. It was just words, everyone knows that English has 26, and Hindi has only 52 alphabets but the matter is that how the poet uses the alphabet? How beautifully he/she has arranged the words! 

Honestly, I am writing since December but still, I don't care about words, maybe it is my laziness or lack of knowledge but still, I am learning, I learn very much from your posts, your poems so it is your responsibility (WP family)you should point out mistakes if I or anyone is …

अन्तिम दृश्य भाग-३

"ट्रिंग.... ट्रिंग......." - इतने भीषण सन्नाटे को चीरते हुए फोन की रिंग ने पूरे कमरे में कोलाहल कर दिया। रात के १२ बजे थे, ये ध्वनि थी सुधीर के फोन की, जिसने पल भर में सुधीर को वर्षों के अतीत से निकालकर वर्तमान समय में एक छोटे कमरे में लाकर पटक दिया!
सुधीर ने पहले इधर - उधर देखा, फिर बायें जेब में हाथ ड़ाला मगर फोन दायें जेब में था, फोन निकाला और कान से लगाया!
"सॉरी भैया! मैं एक इम्पोर्टेन्ट मीटिंग में था। अभी - अभी वापस घर पहुंचा हूं -......" - ये आवाज थी अजीत की!
"हां कोई बात नहीं! सुनो, वो, पिताजी की तबियत बहुत ज्यादा खराब है। हॉस्पिटल में भर्ती है और सुबह से तुम दोनों को याद किये जा रहे हैं"-

सुधीर ने अजीत को बीच में ही रोकते हुए ये बात कही।
"मगर भैया! आप तो जानते हैं यहां से आने और जाने में पूरा दिन लग जाता है। अगर मैं आने की कोशिश भी करूंगा तो आप जानते ही हैं प्राइवेट जाब्स में देर नहीं लगाते नौकरी से निकालने में। ऊपर से श्वेता और निक्कू को अकेला रहना पड़ जायेगा। उनका ख्याल कौन रखेगा इस अंजान शहर में!" - अजीत बड़ी परेशानी दर्शाते हुए बोला।
&quo…

चुनावी मौसम

फिर से लगीं मुजलिसें वहॉं   पर

 शमा भी हसीन हो चलीं हैं 

वो वीरान सी पड़ी बस्ती में 

अब रातों में भी रोशनी जलने लगी हैं 

वर्षों से सूखे पड़े दीयों में 

तेल जाने  अब  कौन दे रहा है?

अब शामें भी खुशनसीब हो चली हैं !

वो पूछ रहा था हाल चाल उन सबसे 


जिनके हिस्से की रोटी 

वो कबकी डकार चुका है 

पूछ रहा है घर के हालात उस गरीब से 

जिसके हिस्से के पैसे वो कबसे मार रहा है ! 

शातिर दिमाग हो तो तुम जैसा 


बेसुरा राग हो तो तुम जैसा 

उस दिन हाथ जोडकर वोट मांगा था तुमने

फिर मुड़कर कभी ना देखा था तुमने 

मगर आज फिर से सिर झुकाया है तुमने 

कोई बेशरम हो तो तुम्हारे जैसा !

वो गरीब आज भी उम्मीदें रखता है 


तभी कड़ी धूप में तुम्हारे भाषण देखता है 

मगर कौन समझाये उस बेचारे को 

ये सियासत है मेरे दोस्त

 यहां हर कोई जिस्म से लेकर ईमान तक बेचता है !




©Confused Thoughts

Wings

Hello guys, I hope you all are doing well, today I am going to publish my first English poem name as Wings and I dedicate my poem to all who are daughters, sisters, friends, and wife of anyone.




I wish I can fly 

High in the sky 

My dreams are fresh 

But the road map is dry.


I wish I could 


Go to the  high 

way is toughest 

But lemme try.



Concrete on street 

Darkness around me

I dont fear it cz 

Motivation is high



​I may fall I can fail 

Chances are high

I will never give up

It is my firm intention

That is why

Will never cry.

My goal is clear 

My dreams are superior

I have all strengths

I should, I have to 

Make me satisfy 

Because my wings are 

Made to fly in the sky.



©Confused Thoughts



अन्तिम दृश्य _ भाग-२

​चाचा आप सो गये क्या बैठे - बैठे? रात काफी है, अगर नींद आ रही है तो मैं आपको घर छोड़ आऊं? " - पीछे से सुधीर बड़े धीमे स्वर में बोला।




"नहीं - नहीं! मैं जाग रहा हूं" -एक साथ सकपकाकर कर जमुनादास उठे, जाग तो रहे थे मगर आंखें ऐसे खुली जैसे गहरी नींद से उठे हों! 




फिर आंखें मलते हुए बोले - "तुम अकेले रह जाओगे यहां, गम की रातें बहुत लम्बी हो जाती हैं, बेटा! एक - एक पल वर्षों के जैसा लगता है, अगर दोनों रहेंगे तो बोलते - बतियाते रात गुजर जायेगी।"




अब सुधीर निःशब्द था, सहमति भरते हुए बोला - "ठीक है।"




तभी बहुत हलके से स्वर में कुछ आवाज आई-




ये स्वर थे शक्तिप्रसाद के! बड़ी हिम्मत और कोशिश के बाद ये स्वर निकले थे, सुधीर दौड़ता हुआ समीप आया और बोला "हां, पिताजी!"




"अजीत" - सिर्फ इतना ही बोल पाये वो, बोलना तो और भी बहुत कुछ चाहते थे मगर शरीर खुद उनका  अवरोध कर रहा था! 




सुधीर चुप खड़ा था, मानो उसने बात ही नहीं सुनी हो। एक पल आपको लगेगा उसने ध्यान नहीं दिया था, मगर वो सिर्फ एक शब्द में सब कुछ समझ गया था कि आखिर बोलना क्या चाहते हैं पिताजी! मगर प्रश्न का उत्त…

अन्तिम दृश्य भाग-१

दृश्य -




अस्पताल के एक छोटे  से कमरे में ४ बेड पड़े हुए हैं, उनमें से एक बेड पर शक्ति प्रसाद अचेत - सी अवस्था में जीवन और मृत्यु की लड़ाई बड़ी कठोरता से लड़ रहे हैं। उनके ठीक बगल में उनके छोटे भाई जमुना प्रसाद बहुत गंभीर मुद्रा में कुछ अतीत के साये में घिरे हुए , कुर्सी पर सतर्क बैठे हुए हैं ! कुछ पिछले वर्षों की यादें आज भी उनकी आखों में तार रही हैं। एक समय हुआ करता था जब गांव में शक्ति प्रसाद बड़े रौब से घूमा करते थे। बचपन की खिलायी पिलायी थी और कुछ पुराने जमाने के अनाज का असर था, कि शक्ति प्रसाद का कद यही कुछ ६ फुट के करीब होगा और छाती योद्धा जैसी विशाल थी, गांव में जब भी कहीं रिश्ता और कबड्डी होती तो वहां उनका उपस्थित होना , अनिवार्य - सा हो चला था, क्योंकि खेल के सभी नियम  सिर्फ उन्हें ही आते थें, यहां तक कि ६५ साल की उम्र में भी २१ साल के नौजवानों को धोबी पाट मारने में समय नहीं लगाते थे ! दूर दूर के गावों में उनकी क्षमता की निकाल दी जाती थी, ढ़ाई मन अनाज कंधे पर ऐसे रख लाते थे मानो कोई फूंस - सी हल्की चीज ला रहे हो!




सुबह ४ बजे उठना और नित्य कर्म से निवृत्त होकर , स्नानादि के बाद सी…

मानवता का पतन

​मानवता का पतन




किसी ने बोला जान की कीमतें खूब घटी हैं




बड़े अफसोस की बात है साहब 




मेरे देश में जान से ज्यादा आबरू लुटी है




मुझे  एक क्षण विश्वास नहीं होता था ऐसी बातों पर 




मगर ऐसी घटनायें यहां खूब घटी हैं!
एक रोज सुबह मुझसे कोई आकर बोला 




मैंने झटपट अखबार खोला 




मुंह लाल पड़ गया खबरें पढ़कर 




फिर मन ही मन खूब बोला!







मन में इतनी आग भरी थी




अब वो घटना आंखों में हरी - भरी थी




हैवानों की हैवानियत तो समझ आती है मगर 




वो भीड में इंसानियत क्यों चुपचाप खड़ी थी!

चलो माना दरिंदों की संख्या अधिक थी 




मगर इतनी भीड़ क्या वहां आंख सेंकने खड़ी थी 




शर्म नहीं आती तुम्हें अपने आपको देखकर 




तुम्हारी मानवता क्या कहीं गिरवी पड़ी थी ! 

एक बार हिम्मत जुटाकर तो देखते




अपने जज्बात जगाकर तो देखते




एक प्रहार तो करते दरिंदों पर




कुछ और भी आ जाते देखते - देखते! 







सुकून से रहते हो अपने घर में 




तुम्हे क्यों ये सब ख्याल आयेगा 




वक्त पलटने में समय नहीं लगता दोस्त 




आज नहीं कल तुम्हारा भी वक्त आयेगा 
जब तुम ही आगे नहीं बढ़ते कभी 




तो तुम्हारी मदद में अब कोई क्यों आयेगा ?







https://youtu.be/0NshNKKH0-k

रंग_ए_चमन -२

खुदगर्जी का आलम फिर इस कदर छाया

एक भाई ने दूसरे भाई का हिस्सा खाया

अब खौफ फैल चुका था पूरे वतन में 

अब जिन्दगानियों पर रहता था संगीन का साया!




रंगचमन की खुशबू कहीं काफूर हो गयी 

इन्सानियत की तस्वीरें अब                  

अपने ही घर पर चकनाचूर हो गयी 

कौमें भी अपने अलग नशे में चूर हो गयीं

रंगचमन की खुशबू कहीं काफूर हो गयी 




बाज के पांव अब सटीक लगे हैं 

नजरबाद का साये में 

काले बादल अब जहां पर छाने लगे हैं 

नासमझों की बातें बेवकूफाना होती हैं 

मगर तजुर्बेकार भी साजिशों में लगे हैं!




शरमहया सब दांव पर लगी फिर

इज्जत की बोली बाजारों में लगी फिर 

अबलाओं की इज्जत भी

भरे बाजारों में लुटी फिर !!




इन्सान की हैवानियत का किस्सा 

आपको क्या सुनाऊं साहब!

दरिंदगी की इंतेहां अब क्या बताऊं साहब 

जब इन्सानियत का हर रोज खून हो 

किस्से बुजदिली के क्या छुपाऊं साहब!

जब आदमी की कौम अब जानवर बन चुकी है 

तो फख्र आदमी होने का क्या जताऊं साहब!




औरत की आबरू खेल बनी फिर 

लोगों की वहां भीड लगी फिर 

मर्द बहुत थे मौकावारदात पर 

मुठ्टी भर दरिंदे लगाये थे बेचारी को घात पर

 मर्दानगी पर जंग लगी फिर !




मुहल्ले की फिजायें अब बिगड गयीं हैं 

हवायें भी रूख …

Importance after death

Scene3:-People were sitting around a picture , some people were discussing about his good deeds , some were praising him very much , Relatives were crying with tears and .

Scene1-   Mr xyz  is no more now , he was a cancer patient . Bytheway Mr xyz have large family but his son and daughter live in other cities with their families . So he was alone since 10 years. Today at morning time  , his soul left his body and doctor said " patient is no more " . 

Scene2- someone informed to his family they came after 14 hours and some other relatives came fastly .all people of society are sitting here .

Scene 0- Mr xyz is still on earth , means his soul is moving here , no one cant watch him , no one cant hear but he is still in home and watching all . Soul say to him " oh man! How lucky you are , lot of people are missing you badly , look at your son , he can't take breath ,he is weeping alot with tears , look at your daughter she is getting mad also crying after every minute . …

ख्वाब

आंखे खोलकर ख्वाब देखो

बडा मजा आयेगा
ख्वाबों को अरमानों के साथ तौलकर देखो 
और भी मजा आयेगा
पूरा करना है जो ख्वाब तुम्हे 
एक बार खुद से बोलकर देखो 
मजा आयेगा !


प्यारी सी नींद से आंखे खोलकर देखो 
फिर मजा आयेगा ! 
एक बार दिन में जागकर ख्वाब तो देखो
बडा मजा आयेगा 
कुछ करना है अगर अपने ख्वाबों के लिए 
तो मेहनत के दरवाजों को खोलकर तो देखो 
बडा मजा आयेगा!

कुछ इतिहास के पन्नों को खोलकर देखो 
सफल लोगों के नजरिये से 
वक्त के मोल को देखो 
फिर अपने जीवन से उसे तौल कर देखो 
बाद में बडा मजा आयेगा !


दुनिया के नजरिये से अलग 
अपनी दुनिया तुम खोलकर तो देखो 
ख्वाबों में तो जी लेते हैं लोग दुनियाभर के 
तुम जिन्दगी में ख्वाबों को
घोल कर तो देखो 
बडा मजा आयेगा 
बडा मजा आयेगा !

अंत्येष्टि

ढोल नगाडों से स्वागत हुआ था ,

मीठे भोगों से आवाभगत किया था!

मां ने  सारा सुख परित्याग किया था,

जब उस नन्हे से जीव ने जन्म लिया था ||

फिर गली मौहल्ले  नापकर चला वो ,


उठता सम्हलता कभी दौडता चला वो !

कभी सुख  तो कभी दुख में चला वो ,

जिन्दगी के पथ पर बढता चला वो !

कंधों पर लिए जिम्मेदारी का बोझा ,

अपने जीवन की गाडी को हांकता चला वो||






कभी बारिश में भीगा तो कभी तूफानों लडा था,

कभी खेतों की खातिर तपती दुपहरी में खडा था!

कभी औरों की मोल ली लडाई में लडा था ,

कभी अपनों की खातिर चट्टान सा खडा था||


सारी जिन्दगी में क्या क्या रंग देखे थे उसने ,


कुदरत के बनाये सब खेल खेले थे उसने !

सब दुख दर्द खुद ठेले थे उसने ,

क्योंकि सारे मौसम देखे थे उसने ||


समय का चक्र तेजी से गुजरता गया था,


वो जिन्दगी की लडाई लडता गया था!

अब चलने से कुछ लडखडा गया था,

जाने क्यों वो अब उखड सा गया था||






फिर घिर गया वो बीमारी के घेरे में,

वक्त गुजरता अब हकीम के खेमे में!

कुछ अपने लगे थे देखभाली में उसके,

कुछ अपने लगे उसे औषधी देने में||

अब राम नाम वो पुकारने लगा था,


सत्य को वो पहचानने लगा था!

मृत्युं की घडी अब निकट है मेरे,

इस सार्थक सत्य को  मानने लगा था||






कु…

रिश्तों का दायरा (Scope of relationships)

नमस्कार दोस्तो hello guys

वो कहते हैं ना इन्सान कितनी भी भाषाओं में लिख,बोल व सुन सकता है मगर सोचता अपनी मातृभाषा में ही है| (सबकी बात नहीं कर रहा सिर्फ अपने विचार रख रहा हूं 😁)

आज मैं सीधे मुद्दे पर आता हूं , जैसा कि मेरा आज का शीर्षक है रिश्तों का दायरा जैसा कि आप सब अच्छी तरह जानते हैं! रिश्तों का कोई दायरा नहीं होता , चाहे वो बाप बेटे का रिश्ता हो ,चाहे भाई भाई का रिश्ता हो , मां बच्चों का रिश्ता हो इन सबकी कोई सीमा नहीं होती ! इन रिश्तों में प्रेम बिना किसी लालच के किया जाता है !खैर मैं उलझा रहा हूं अब आपको मेरा विश्वास करो ,मैं आपको भ्रमित करना बिल्कुल नहीं चाहता मगर हमने बचपन से ही सफाई देना सीखा है मतलब अपनी कडवी बात को ऐसे रखो जैसे जहर के ऊपर से चाशनी की परत चढा दी हो!वही मेरे दुर्गुणों में सम्मिलित है|

जैसा कि आप सबको पता है अंग्रेजी कैलेण्डर का नववर्ष प्रारम्भ होने वाला है, चारों ओर बधाईयां , कार्ड, मैसेज, ऑफर्स का तांता लगा हुआ है| मैं भी बहुत प्रसन्न था क्योंकि मुझे भी अपने सभी मित्रों, सम्बन्धियों को बधाईयां देनी थी | जैसा कि आप सबको पता है , व्हाट्सऐप, फेसबुक का जमाना…