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पलायन

चार दिन बारिश पडी, मैं घर से दूर चला गया !

रास्ते कुछ संकरे पडे , मैं मजिल की तलाश में बढता चला गया |

कुछ भीड सी थी रास्ते में , जाने कौन कब बिछडता चला गया?

मैं भी पूरे रौब में था, मैंने सोचा जाने दो मेरा कौन क्या लेके चला गया ?

फिर आये कुछ सुकून के दिन , पर वक्त है साहब बडी तेजी में गुजारता चला गया !

मैंने कोशिश की कुछ अन्दर झांकने की, कोई विचार मुझे अन्दर तक कुरेद कर चला गया,

फिर से उमंग उठी घर वापस जाने की , वापसी की राह पर चलता चला गया||

जैसे ही पास आया गांव अपना, अतीत का साया आंखों में उतरता चला गया!

जैसे ही पास आया मौहल्ले में, कोई ख्वाब मेरी आंखों से चुराकर चला गया,

कोई बाढ का पानी आया था गांव में, जो मेरे घर के साथ रिश्तों को भी बहा कर चला गया ||
_ Confused thoughts       कविता के रुप में जीवन के कुछ अनुभवों को उकेरा है अगर आप पढते हो तो अपनी राय अवश्य दें ताकि मुझे सुधार का मौका मिल सके 

-धन्यवाद

Comments

  1. As of your previous... You know better how to condense deep feelings within word" thats the real beauty... 😊😊 Keep writing Mr.

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  2. Thank you so much Ananya 😃😃!
    When someone read my blog I feel awesome

    ReplyDelete
  3. Thanks bhai ! Your comment are valuable for me

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  4. बहुत खूब लिखा है जी

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  5. Bhut dhanyavaad !
    Mere Vichar pdhne k liye abhaar
    Khali samay milte h apke post jrur pdhunga

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  6. Aram se padhna bhai, aapke post achche lge sirf isliye hi comment kiye he... :D

    ReplyDelete
  7. M sbke blog pdhta hu aur bilkul apki trah comment bhi krta hu agr acha lgta h to aur kmi ho to vo b btata hu 😁😁

    ReplyDelete
  8. Bhut dhanyavaad apka !
    Ye Meri sbse phli kavita thi , TB mujhe khudpar itna confidence nhi Tha ki Mei Kavita bhi likh skta hu !

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IMG source - http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg








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