Skip to main content

State of joyfulness

You become happy when outside circumstances come in your favor,You become joyful when none of the outside circumstances affect you anymore.~ #ShubhankarThinks#joyfull #happy #quote

100. Followers

Thanks for reading my blogs, please always do comment , likes does not matter . If you find any loophole then frankly do bad comment believe me I love critic .keep writing ,keep reading .

Thank you again 

And so much love for all WordPress bloggers . I am still learning . 

If you want to ask  any question about me , you can ask openly in comment box . 

Comments

  1. Congratulations. Well deserved.:)

    https://simpleserenity.wordpress.com

    ReplyDelete
  2. CONGRATULATIONS....
    Keep sparkling...!!

    ReplyDelete
  3. Congo .. keep moving stay blessed

    ReplyDelete
  4. U can call me aunty or jyo di as everyone here calls me.. mam sounds so formal .. welcome to our Bloggers Junction Shiva

    ReplyDelete
  5. Aunty don't sound cool !! So I will choose di much cooler than any other Nick ,thank you again

    ReplyDelete
  6. Haha that's sooo sweet of u Shiva stay blessed

    ReplyDelete

Post a Comment

Please express your views Here!

Popular posts from this blog

Scientific reasons behind Hindu Rituals

Hinduism is the world’s oldest living religion and there are thousands of customs & traditions. Most of us really don’t know what is the scientific reason behind them even we have no idea about it.

1- Blowing Shankha(Conch shell) - In Hinduism, According to our ancient scriptures that Puranas, the shank originated during the Churning of the ocean (Samudra Manthan) by the Deities and Shri Vishnu held it in the form of weapon. As per a holy verse which is regularly chanted during the puja ritual it is mentioned that by the command of Shri Vishnu the deities Moon, Sun and Varun are stationed at the base of the shank, the deity Prajapati on its surface and all the places of pilgrimage like Ganga and Saraswati in its front part.

We blownShankha before starting any religious event even some of the people blown it every day during their regular prayer.

According to science, the blowing of a conch shell enhances the positive psychological vibrations such as courage, determination hope, op…

प्रेम पत्र २(पत्र का जवाब)

जैसा आपने पिछले पत्र में पढा था कि प्रेमिका रूठकर व्यंगपूर्ण पत्र लिखती है और जब यह पत्र उसके प्रेमी को मिलता है तो वो अपनी प्रेमिका को मनाने और भरोसा दिलाने के मकसद से पत्र का प्रेमपूर्ण जवाब लिखता है मगर मस्तिष्क में चलते गणित के कारण कैसे उसके विचार पत्र के माध्यम से निकलते हैं पढ़िए -



IMG source - http://i.huffpost.com/gen/1178281/images/o-LETTER-TO-EX-facebook.jpg








प्रेमी  अपनी प्रेमिका से -

प्रेमिका मेरी ओ प्राण प्यारी!

तुम्हे एक पल हृदय से ना दूर किया है ,

तुम्हारा और मेरा संग तो रसायन विज्ञान में जल बनाने की प्रक्रिया है !

जैसे हाइड्रोजन नहीं छोड़ सकती ऑक्सीजन का संग,

भगवान ने ऐसा रचा है ,हमारा प्रेम प्रसंग|





दुविधा सुनो मेरा क्या हाल हुआ है,

पूरा समय गति के समीकरणों में उलझ गया है !

कभी बल लगाकर पढ़ाई की दिशा में बढ़ता हूँ,

कभी तुम्हारे प्रेम की क्रिया प्रतिक्रिया से पीछे तुम्हारी दिशा में खींचता हूँ|



मेरे विचारों का पाई ग्राफ उलझ जाता है ,

ये Tan@  के मान की तरह कभी ऋणात्मक अनंत तो कभी धनात्मक अनंत तक जाता है !

मेरे ग्राफ रूपी जीवन में सारे मान अस्थिर हैं ,

मगर तुम्हर स्थान मेरे हृदय में पाई(π) …

पथ भ्रष्ट हैं इसलिए कष्ट हैं

क्यों पस्त हैं, क्या कष्ट है? किस अंधेर का आसक्त है। क्यों पस्त है कुछ बोल तू, अगर कष्ट में तो बोल तू, क्यों लड़ रहा हूं खुद से ही, ज़ुबान है तेरी भी, खोल तू।
क्यों भ्रष्ट हैं, वो मस्त हैं, वो निगल रहे हैं सारा देश! हम कष्ट में, पथ भ्रष्ट हैं, नहीं बच रहा है कुछ भी शेष। वो भ्रष्ट हैं क्योंकि हम कष्ट में, वो मस्त हैं क्योंकि ख़ुद हम भ्रष्ट हैं।
जो सख़्त हैं वो लड़ रहे हैं, जो कष्ट में भी बढ़ रहे हैं! जो कष्ट में भी सख़्त हैं, जो सख़्त हैं, वो समृद्ध हैं। क्यों हतप्रभ है, किसी समृद्ध से, तेरे भी हस्त हैं, चला इन्हें शस्त्र से! तेरे पास वक़्त है, तेरे पास शस्त्र हैं, फ़िर क्यों तू स्तब्ध है, यूं कष्ट में?
क्यों निर्वस्त्र है अगर वस्त्र हैं, क्यों चल रहा ये नग्न भेष, अगर निर्वस्त्र ज्यादा सभ्य है, तो मत कहो कि मानव है विशेष। कहो जीव सारे सभ्य हैं, वो सब भी तो निर्वस्त्र हैं| सब निर्वस्त्र ही समृद्ध थे, तो कोई लाया ही क्यों ये वस्त्र है। अब ये वस्त्र हैं तो बढ़ा कष्ट है, कोई सभ्य है तो कोई निर्वस्त्र है।
कुछ कटु सत्य हैं, जो कहीं लुप्त हैं, सही वक्तव्य हैं जो अभी गुप्त हैं। ना कुछ लुप्त ह…