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Showing posts from December, 2016

मौसम बदले जीवन बदले, तुम फिर फिर अपने गीत सुनाना

जीवन है तो मौसम हैं, मरने के बाद बस एक मौसम रहेगा। फिर कभी नए नए मौसम देखने का मौका ना रहेगा। जीवन है तो आयेंगे उबासी भरे दिन, कभी बसंत महोत्सव कभी पतझड़ कभी बरसाती काली रातें। तुम चलते रहना अपनी राह, चाहे कोई भी हो। तुम बदल मत लेना चलने का ढ़ंग सिर्फ़ इसलिए  क्योंकि पूरी दुनिया तुम्हारे साथ गलत कर रही है। तुम रुक मत जाना देखकर कि कितना आसान है सब यहाँ, जहाँ तुम्हारे लिए सब कुछ उपलब्ध हो बिना किसी कठिनता के। तुम बहक मत जाना सुख देखकर, रखना याद की ये केवल एक मौसम है बदल जायेगा, तुम मन मत बना लेना सबसे कट जाने का इसलिए कि तुम्हारे साथ कोई ज्यादती हुई है, तुम ख़ुद से बचकर मत भागना इसलिए कि तुम में कमियाँ बहुत हैं। तुम कोई बोझ मत लाद लेना, अपने कंधे पर की तुम्हारे बिना ये सब काम कोई और ना करेगा। तुम होना खड़े किसी रास्ते पर, देखना ऊपर आसमान में और देखना फिर अपने शरीर को, कोई फ़र्क नहीं है तुम में और इस खुले आसमान में। तुम ऐसे चलना जैसे कोई राजा चलता है, ऐसे बोलना जैसे राजा बोलते हैं। तुम राजी मत हो जाना किसी के गुलाम बनने को, तुम देना सबको जितना दे सको, देखना मत मुड़कर पीछे की तरफ, राजा देते हैं

रंग_ए_चमन-1

​चैन और सुकून से भरा था मुहल्ला, आवाम ए हिन्द बडी मौज में रहती थी| महफिल ए शायरी करते थे लोग वहां, मुशायरे में होती थीं रौनकें जहां की! कोई शमा मुजलिस में मशगूल होती थी| मुफलिसी में रहते थे वो फकीर वहां के, मगर उनकी बातों में भी अमीरी सी होती थी| हुस्न ए अदा थी तहजीब में उनके, तालीम की पहचान भी अदब बातों से होती थी | एक बाज की नजर ए बाद थी  बस्ती पर , उसे आवाम के चैन अमन से तकलीफ सी होती थी| कुदरत का बदस्तूर जमाने पर नागवार गुजरा, उस बाज ने कुछ नापाक तरकीब सी सोची थी| एक जगह थी सबके पानी पीने की, जहां मुहब्बत अदब से सबकी भरपाई होती थी| मजहबी जहर को मिलाया था पानी में , अब पानी की जरूरत तो लगभग सभी को होती थी| पानी पीना जंग ए मैदान बन गया , अब पानी  के लिए लोगों में तकरार सी होती थीं| धीरे धीरे जहर असर दिखाने लगा था, बाज की तरकीब अब कामयाब हो रही थी| तकरारों का सिलसिला रफ्तार से बढा फिर, अब मौका ए वारदात पर मौंते भी हो रही थी| पैगाम ए अमन तो ख्वाबों में भी नहीं था, महफिलों में भी अब नफरत ए दास्तां होती थी| अमन और मुहब्बत तो सब किस्से बन गये, अब तो रातें भी वीरानियों के मंजर में सोती थीं

Trip To Kota Rajasthan

​Hello everyone I am not a travel blogger but today I am going to discuss my small trip, hope it will help you if in future you go to Kota (Rajasthan) One of my sisters is preparing for the medical exam in Kota so I went there with my cousin's brother. My sis did not visit any place there also she was not interested in it as you know about study freak child :) (because she is preparing for medical). But I and my brother were excited to visit some famous places in Kota so, first of all, I took all suggestions from people after that we started to visit them one by one but lack of time, I visited a few of them. I am going to discuss all those places  CHAMBAL GARDEN- I thought that the Chambal garden- will be like a normal garden, different types of flowers and trees will be there, it will be amazing but sadly when I entered, I was shocked because it seemed like very normal park which you can find anywhere or in any city/society. But when I went to the right corner of

100. Followers

Thanks for reading my blogs, please always do comment , likes does not matter . If you find any loophole then frankly do bad comment believe me I love critic .keep writing ,keep reading . Thank you again  And so much love for all WordPress bloggers . I am still learning .  If you want to ask  any question about me , you can ask openly in comment box . 

प्रतिशोध की घडी

​ध्वज को तुम थाम लो, शस्त्र तुम निकाल लो ! मिट्टी को बना मुकुट , मस्तकों पे धार लो ! प्रतिशोध की घड़ी है, अब ये बात मन में ठान लो || जा युद्ध का आह्वान कर, शत्रु को हैरान कर ! गूंज उठे शब्द  गगन में , ऐसा तू गुंजाल कर ! प्रतिशोध की घडी है ये  आज बात मन में गाढ लो || कुछ वीरों का ध्यान कर , कुछ भागवत का सार पढ, कुछ भाव ला क्रोध के! आज अशोक को तू याद कर , यही घडी मिली है प्रतिशोध की! आज बात मन में ठान ले|| युद्ध के लिए उठा ध्वजा , ढोल को आज जोर से बजा! रथ को तू वधु जैसा सजा , जा शत्रुओं को दे सजा ! यही घडी है प्रतिशोध की, आज मन में ठान ले|| आज ह्रदय को तू निकाल कर, बाजुओं को ढाल कर, तिलक लगा तू भाल पर ! रूप को विकराल कर , प्रतिशोध की घड़ी है अब ! आज निकल तू ये ठान कर|| युद्ध का आरम्भ कर , कुछ स्थिति प्रचंड़ कर ! देव को प्रणाम कर , धनुष पर तू बाण धर! प्रतिशोध का आरम्भ कर , आज ह्रदय को बांध कर|| तरकश को तू धार ले , तलवार को साध ले ! लपट उठा दे रणभूमि में , कुछ ऐसा प्रमाण दे ! प्रतिशोध की अग्नि है य

Love Or Lust

Hello guys   i hope you all are doing well  So let's come to the point , as you know about my username confused thoughts, in real life I m so confused , I can't decide what to do , what to write  so today again I am going to discuss some messy things .  I heard very much about love , I am m honest , I have no experience about love or relationships so I can't get the depth of topic , but I will try to find out some questions? Which always comes to my mind  Question is : what is love or what is lust ?  Today m not gonna discuss about all types of love because I can't explain love in single blog  or I would like to say " no one can give the proper explanation about love , no boundaries can cover up the height of love " But main topic is youth love stories , today youth are very frank and they never feel hesitation About their relationships , they accept it publicly , generally I see the couple pics  on Instagram or fb or whatsapp , they also post their cuddle pic

बंटवारा

पिता को गुजरे कुछ दिन ही गुजरे थे , बेटों ने किया फिर सम्पत्ति का मुआयना ! और अब आन पडा था बंटवारा | कुछ लोग बाहर से बुलाये गये ,  जमीनों के मूल्य आंक पर लगाये गये , क्योंकि अब आन पडा था बंटवारा| कुछ चीजें बाप की कमाई हुईं थी, कुछ चीजें मां ने सन्दूकों में छुपाई हुई थीं, आज सबका हिस्सा होगा! क्योंकि अब आन पडा है बंटवारा| फिर क्या था जमीन को बाराबर बांटा गया, हर चीज का बराबर मूल्य आंका गया , क्योंकि यही तो कहलाता है बंटवारा | वो बूढी मां सब देख रही थी, कभी बिलखती कभी मन ही मन मचल रही थी! कुछ कसोट रहा था उसे मन ही मन में , जाने क्यों उसे भी नहीं रहा था ये बंटवारा| मां कब तक  अपने अन्तर्मन पर काबू पाती? अपने ह्र्दय के ज्वार भाटा को कब तक दबाती? फिर बोली कुछ सकपकाकर ! ऐसे कहां पूरा हुआ बंटवारा? जमीन और चीजें तो सब बांट ली तुमने , अब यादें बांटने कौन आयेगा? जिन्दगी भर खिलाया था तुमको, उसका हिसाब कौन चुकायेगा ? मैं अब भी कहती हूं मत करो ये बंटवारा! बेटे कुछ झुंझलाकर बोले ! मां हमको  जीने का हक नहीं है, किया तो क्या किया उन्होने   हमारे लिए ? क्या ?उनकी सम्पत्ति पर हमारा कोई हक नहीं है ! आज न

पहलू

वो आज हमारे पास आकर कठोर स्वर में बोले, "तुम खुद को समझते क्या हो? नहीं करनी अब मुझे कोई वार्तालाप तुमसे! अब नहीं करूंगी छिपकर मिलाप तुमसे!" हमसे रुष्ट हुए अभी कुछ पल ही गुजरे थें, एक व्यंग्य हमें भी सुझा और हम बोले, "नाराज रहने से हम रिश्तों को खोते हैं। पहले बात को समझिए - हर बात के दो पहलू होते हैं।" कुछ नाराजगी भी चरम पर थी उनकी, वो तपाक से हम पर पलटकर बोले, "तुम्हारी बातें मेरे लिए अब व्यर्थ जैसी हैं, क्योंकि तुम्हारी सारी गलतियां खुद मैंने अपनी आंखों से देखी हैं। अब तुम कह भी कैसे सकते हो- हर बात के दो पहलू होते हैं!" अब दुविधा बड़ी आन पड़ी थी, फिर हम कुछ सोचकर बोले- " कुछ त्रुटियां हमसे भूलवश हुईं थीं, तो कुछ आपने बदले में की थीं। मैं मानता हूं आपके मस्तिष्क में अब मेरे लिए विरोध होते हैं। मगर वार्तालाप से मुद्दा सुलझ सकता है। आपको हमसे बात करने में क्या अवरोध होते हैं? मैं फिर से कहूंगा- हर बात के दो पहलू होते हैं!" अब वो कुछ शांत होकर बोले- "तुम्हारा निवेदन कभी अस्वीकार नहीं कर सकती और दोबारा तुमसे वार्तालाप की तो रिश्ते से इंकार नह

LIFT

Hello bloggers , Hope you all are doing well  I lived at hostel because of study,when I was 16 I had to left home.basically I belong to a small town, where I grew up and taught many life lessons . I love to spend my holidays at home so most of weekend I have to travel , hostel to home  and after weekend have to return back home to hostel . Honestly I don't have car or other personal vehicle (generally people say mere Papa ambani ni h 😂) so I prefer public transport (roadways bus) . So I pick up bus from that city(where hostel is situated) and bus  dropped me at intersection point , which is 2 km far from my home because that point is outer from my village (  word town don't have any feel , word village  is much loving than city or  town so I use village ).when bus drop me at intersection point then I have two options to reach home 1- walking  2- Lift  Word lift can confuse you because it have lot of meanings .if I try to find meaning behalf of you so let's analize the situ

पलायन

चार दिन बारिश पडी, मैं घर से दूर चला गया ! रास्ते कुछ संकरे पडे , मैं मजिल की तलाश में बढता चला गया | कुछ भीड सी थी रास्ते में , जाने कौन कब बिछडता चला गया? मैं भी पूरे रौब में था, मैंने सोचा जाने दो मेरा कौन क्या लेके चला गया ? फिर आये कुछ सुकून के दिन , पर वक्त है साहब बडी तेजी में गुजारता चला गया ! मैंने कोशिश की कुछ अन्दर झांकने की, कोई विचार मुझे अन्दर तक कुरेद कर चला गया, फिर से उमंग उठी घर वापस जाने की , वापसी की राह पर चलता चला गया|| जैसे ही पास आया गांव अपना, अतीत का साया आंखों में उतरता चला गया! जैसे ही पास आया मौहल्ले में, कोई ख्वाब मेरी आंखों से चुराकर चला गया, कोई बाढ का पानी आया था गांव में, जो मेरे घर के साथ रिश्तों को भी बहा कर चला गया || _ Confused thoughts       कविता के रुप में जीवन के कुछ अनुभवों को उकेरा है अगर आप पढते हो तो अपनी राय अवश्य दें ताकि मुझे सुधार का मौका मिल सके  -धन्यवाद

Dear crush

​Sometimes a question comes to my mind , I should express my feelings to my crush but I can't so today m gonna confess with all strangers (don't think I am sick lover or etc :) )    Dear crush,  The day when I saw you first time was best day of my life , first day of my college and I was going to attend morning lecture ,I was much nurvous because I have crowd fear.i was moving out in porch that time at the corner of class room you were coming in my direction , firstly I did not pay attention but when you came next to me , I looked at you avidly .( All we know it's human nature) but we crossed each other in a moment . But a image was still swimming into my eyes , two flickering eyes and beautiful face cut is still walking around in my mind believe me I really did not notice what dress you put up , what was the color of dress because of your magical eyes I was unable to think anything . But I thought it is just dream and I went to classroom , day spent well in class because o

Stress

There are two parts of stress first one positive other one negative. Positive part tends to performance improvement . It gives the motivation to us . We feel like "oh man ! So much pressure of work , so much pressure of study , so much pressure of exam but overall we have a hope and say to us " I dont care about pressure , I will do work hard and automatically stress will be released " this comes from our strength if we have power to control over this situation . Positive part of  stress works when we have quality and have guts to handle situations . This thing tends to success , we can achieve our dreams ,no matter how many times I get fail .Second part of stress tends to fatigue, fatigue is directly proportional to performance decrement . We cant always think positive , our mind mostly think negatively but our heart always wants to remove negativity but mind have control over thoughts and 70% times we think about negativity, when we are not happy with work or we don

A Rain Shower

I always read every post which comes to my timeline but some of them deserve to share  Sorry http://vaidusworld.com  I am sharing your post without your permission :) A Rain Shower (Short Story) - https://vaidusworld.com/2016/12/03/short-story-rain-shower/ Must read!