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देश में कुछ लोग बस इम्यूनिटी बढ़ा रहे हैं

शायर शायरी छोड़कर भाषण बना रहे हैं,खिलाड़ी खेल छोड़कर रोडीज में जा रहे हैंअभिनेता अभिनय छोड़कर राजनीति में आ रहे हैंराजनेता नेतागिरी छोड़कर अभिनय दिखा रहे हैंपत्रकार पत्रकारिता छोड़कर धारावाहिक दिखा रहे हैं।मंत्री जी रोटी छोड़कर सरकारी नौकरी खा रहे हैं,अस्पताल पैसे छोड़कर जिंदगी खा रहे हैं।कौन मर रहा है, किसी को क्या फ़र्क पड़ता है,अब तो ड्रग्स लेने वाले बस सुर्खियों में आ रहे हैं।बच्चे किताब छोड़कर स्मार्टफोन चला रहे हैं,मास्टर जी वॉट्सएप की मदद से नौकरी बचा रहे हैं।स्थिति विचित्र है अगर थोड़ा भी ध्यान दिया जाए,सुखी वही हैं जो इम्यूनिटी बढ़ा रहे हैं।~ #ShubhankarThinks
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रिश्तों के मध्य तरलता

भावनाएं अत्यन्त आवश्यक होती हैं रिश्तों के मध्य तरलता बनाए रखने के लिए,वरना टूट जाते है मजबूत से मजबूत जोड़ भी अगर उनके बीच सूखा घर्षण हो।~ #ShubhankarThinks

चापलूसी एवम् प्रशंसा ! विचार

जीवित व्यक्ति की प्रशंसा करना, चापलूसी को श्रेणी में आता है।
~ #ShubhankarThinks

छोटे बड़े की समस्या !

ये उसकी समस्या है, जो खुद को तुमसे बड़ा समझ रहा है,समस्या तुम्हारे अंदर है अगर कोई तुम्हारे सामने ख़ुद को छोटा महसूस करे।~ #ShubhankarThinks

ज्ञान और प्रवचन

ज्ञान में से प्रवचन को घटा दिया जाए तो केवल व्यवहारिकता शेष रह जाती है।अगर प्रवचन में से ज्ञान को हटा दिया जाए तो शेष रह जाते हैं बड़े बड़े बोल।~ #ShubhankarThinks

जीवन को जीना ! विचार - 30 Aug

आधे से ज्यादा जीवन भविष्य की चिंता में बिताया,बचा हुआ समय भूतकाल के पश्चाताप में बिताया!अब बुढ़ापे में भी मरने से उनको डर लग रहा है, क्योंकि जीवन को उन्होंने अभी जिया ही कहां है?#ShubhankarThinks